Bihar District Hospital Services: बिहार के जिला अस्पतालों में मरीजों को सुलभ, त्वरित और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने राज्यस्तरीय समीक्षा की। स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ बैठक कर अस्पतालों के प्रदर्शन की समीक्षा की। बैठक में IPD में मरीजों के दाखिले, Electronic Health Record (EHR) लिंकेज, एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी सेवाओं, विभागवार और जिलावार सर्जरी, आयुष्मान भारत योजना, रेफरल व्यवस्था और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता एवं उपयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई।
सितंबर में 49,450 मरीज IPD में भर्ती
समीक्षा के दौरान बताया गया कि सितंबर 2026 में राज्य के जिला अस्पतालों में कुल 49,450 मरीज IPD में भर्ती हुए। जून में यह संख्या 26,443, जुलाई में 36,680 और अगस्त में 49,973 थी। सितंबर में IPD दाखिले के मामले में मधेपुरा 8,037 मरीजों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद बांका में 2,488, मुंगेर में 2,327, अररिया में 2,065 और सहरसा में 1,709 मरीज भर्ती हुए। स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने की भी समीक्षा की गई। सितंबर में राज्यभर में 4,413 EHR लिंक किए गए। मधेपुरा में सबसे अधिक 1,787 रिकॉर्ड लिंक हुए। अररिया, पटना, गोपालगंज और वैशाली का प्रदर्शन भी बेहतर रहा। वहीं कटिहार में एक भी EHR लिंक नहीं होने तथा सहरसा, सिवान, सुपौल और सारण में कम प्रगति पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताई और तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
इमरजेंसी में 2 लाख से ज्यादा मरीजों का पंजीकरण
सितंबर में जिला अस्पतालों के एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी विभागों में कुल 2,05,566 मरीजों का पंजीकरण हुआ। भोजपुर में सबसे अधिक 16,570 मरीजों ने इमरजेंसी सेवा का लाभ लिया। इसके बाद सिवान, अररिया, वैशाली और मधेपुरा का स्थान रहा। स्वास्थ्य सचिव ने सभी जिला अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों को समय पर जरूरी जांच और उपचार उपलब्ध कराया जाए।

जून के मुकाबले सितंबर में सर्जरी करीब चार गुना
जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। जून 2026 में कुल 2,428 सर्जरी हुई थीं, जो जुलाई में बढ़कर 5,650, अगस्त में 8,209 और सितंबर में 9,705 हो गईं। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में सर्जरी जून के 2,156 से बढ़कर सितंबर में 6,131 हो गई। जनरल सर्जरी 174 से बढ़कर 1,420 और ऑर्थोपेडिक्स में 25 से बढ़कर 1,408 हो गई। सितंबर में ENT की 300, नेत्र रोग की 222 और दंत रोग से संबंधित 224 सर्जरी भी हुईं। सितंबर में सबसे अधिक सर्जरी मधेपुरा में 790, पटना में 710, वैशाली में 682, अररिया में 495 और सारण में 456 हुईं। विभिन्न प्रकार की सर्जरी के मामले में पटना में 52 प्रकार की सर्जरी हुईं। बेगूसराय में 42, भोजपुर में 32, नालंदा में 31 और मधुबनी में 25 प्रकार की सर्जरी की गईं। कम प्रदर्शन वाले जिलों को उपलब्ध विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर सर्जरी की संख्या और विविधता बढ़ाने का निर्देश दिया गया।

आयुष्मान भारत योजना पर भी स्वास्थ्य विभाग सख्त
बैठक में बताया गया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रोसीजर और सर्जरी की संख्या पिछले महीने के 1,728 से बढ़कर 2,098 हो गई है। इसके साथ ही क्लेम राशि में करीब 30 लाख रुपये की वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि अरवल, जहानाबाद, पूर्णिया, शेखपुरा, शिवहर, समस्तीपुर, औरंगाबाद, बक्सर और सहरसा में अपेक्षित प्रगति नहीं मिलने पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जिन सरकारी और सदर अस्पतालों का प्रदर्शन निजी अस्पतालों से कम है, वहां जवाबदेही तय की जाएगी। आयुष्मान भारत से प्राप्त राशि का उपयोग अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और नियमानुसार चिकित्सकों को प्रोत्साहन राशि देने में किया जाएगा।
अनावश्यक रेफरल रोकने और रोज समीक्षा के निर्देश
स्वास्थ्य सचिव ने PHC, CHC, अनुमंडलीय और जिला अस्पतालों को अपनी क्षमता के अनुसार स्थानीय स्तर पर ही मरीजों का उपचार करने का निर्देश दिया, ताकि अनावश्यक रेफरल कम किया जा सके। सभी सिविल सर्जन, अस्पताल उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधकों को प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट समीक्षा बैठक करने को कहा गया। ‘कायाकल्प’ योजना के मानकों के अनुरूप अस्पतालों में स्वच्छता और स्वास्थ्य सुविधाओं की नियमित निगरानी के निर्देश भी दिए गए। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए बायोमेट्रिक और ऐप आधारित अटेंडेंस व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।
अक्टूबर में जिला अस्पतालों को मिलेंगे नए उपकरण
BMSICL के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अक्टूबर में जिला अस्पतालों को जनरल सर्जरी OT के लिए 14 प्रकार, गायनी OT के लिए 17 प्रकार और ऑर्थो OT के लिए 16 प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा 14 स्थानों पर C-Arm मशीनें स्थापित की जा रही हैं। अधिकांश उपकरणों का इंस्टॉलेशन 15 से 20 अक्टूबर तक और शत-प्रतिशत इंस्टॉलेशन 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सभी उपकरणों की KTL पोर्टल पर प्रविष्टि के साथ AMC/CMC की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। बैठक के अंत में स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने सभी जिलों को उपलब्ध डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जिला अस्पतालों को ऐसी मजबूत स्वास्थ्य इकाई के रूप में विकसित करने पर जोर दिया, जहां मरीजों को समय पर, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।


















