NEET UG Admission Scam: रिम्स और पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में फर्जी दिव्यांग बनाकर MBBS सीट दिलाने का खुलासा

NEET UG एडमिशन में फर्जी दिव्यांग और जाति प्रमाण पत्र से आरक्षित सीट दिलाने वाले अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। रिम्स और पूर्णिया कनेक्शन सामने आया।


NEET UG Admission Scam पटना: मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के नाम पर चल रहे फर्जीवाड़े की जांच में एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है। पटना से गिरफ्तार मेडिकल छात्र और गिरोह के कथित मुख्य सरगना डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट से पूछताछ के बाद आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU को रांची के रिम्स और बिहार के पूर्णिया मेडिकल कॉलेज तक इस नेटवर्क के तार जुड़े होने की जानकारी मिली है। आरोप है कि गिरोह कम अंक हासिल करने वाले सामान्य अभ्यर्थियों को फर्जी दिव्यांग और जाति प्रमाण पत्र के जरिए NEET UG की आरक्षित सीटों का लाभ दिलाता था।

NEET UG Admission Scam:फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से आरक्षित सीट हासिल कराने का खेल

EOU की जांच के अनुसार गिरोह अभ्यर्थियों को दिव्यांग बताकर आरक्षित श्रेणी में दाखिला दिलाने की योजना बनाता था। इसके लिए कथित तौर पर फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र और जाली जाति प्रमाण पत्र तैयार कराए जाते थे।

गिरोह का फायदा केवल आरक्षित सीट हासिल करने तक सीमित नहीं था। जांच में सामने आया है कि दिव्यांग अभ्यर्थी के लिए NEET UG परीक्षा में स्क्राइब की अनुमति ली जाती थी। इसके बाद मेधावी मेडिकल छात्रों को स्क्राइब के नाम पर परीक्षा केंद्र में बैठाकर कथित तौर पर सॉल्वर के रूप में इस्तेमाल किया जाता था।

इस तरह कम अंक वाले अभ्यर्थियों को परीक्षा और काउंसलिंग, दोनों स्तरों पर फायदा पहुंचाने की कोशिश की जाती थी। EOU की जांच में इस नेटवर्क के कई मेडिकल कॉलेजों तक पहुंचने के संकेत मिले हैं।

NEET UG Admission Scam:रिम्स में काजल कुमारी के नाम से सामने आया कनेक्शन

रांची के राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान यानी RIMS में वर्ष 2025 के MBBS दाखिले से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र के मामले की जांच पहले से CID कर रही है। सार्वजनिक रिपोर्टों के अनुसार, काजल कुमारी का नामांकन फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में रद्द किया जा चुका है। CID ने रिम्स में दाखिले से जुड़े दस्तावेजों की जांच भी की है।

अब EOU की जांच में बताया गया है कि पटना के सुनैना अपार्टमेंट से जब्त किए गए 11 प्रपत्र-A में काजल कुमारी का नाम भी मिला था। इससे रिम्स में सामने आए फर्जी प्रमाण पत्र मामले और पटना से पकड़े गए कथित सिंडिकेट के बीच कनेक्शन की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।

रिम्स में फर्जी प्रमाण पत्र से दाखिले की शिकायतों को लेकर CID ने जून 2026 में संस्थान में दस्तावेजों की जांच और तलाशी की थी। जांच का दायरा अन्य छात्रों और दाखिले से जुड़े कर्मचारियों तक भी बढ़ाया गया है।

NEET UG Admission Scam:पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में 7 छात्र फरार

EOU की जांच में सामने आए कथित मॉडस ऑपरेंडी की पुष्टि पूर्णिया मेडिकल कॉलेज से जुड़े मामले से भी होती है। वहां फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर दिव्यांग कोटे से दाखिला लेने के आरोप में सात मेडिकल छात्रों पर कार्रवाई की गई। कॉलेज प्रशासन ने प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की तो संबंधित छात्र हॉस्टल छोड़कर फरार हो गए।

इन सातों छात्रों के प्रमाण पत्रों में कान की दिव्यांगता का उल्लेख था। इससे जांच एजेंसियों के सामने यह सवाल भी आया कि गिरोह बार-बार आंख और कान से जुड़ी दिव्यांगता को ही क्यों इस्तेमाल करता था।

EOU की पूछताछ में डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट ने कथित तौर पर इसका कारण बताया। उसके अनुसार आंख और कान की दिव्यांगता का मौके पर मेडिकल बोर्ड के जरिए तत्काल भौतिक सत्यापन करना अपेक्षाकृत जटिल होता है। इसी वजह से इन श्रेणियों के प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल किया जाता था।

पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र से दाखिले का मामला पहले भी जांच के दायरे में आ चुका है।


Key Highlights

  • रिम्स और पूर्णिया मेडिकल कॉलेज तक पहुंचा कथित NEET UG एडमिशन सिंडिकेट
  • फर्जी दिव्यांग और जाति प्रमाण पत्र के इस्तेमाल का आरोप
  • स्क्राइब के नाम पर सॉल्वर बैठाने का भी खुलासा
  • रिम्स की काजल कुमारी के नाम से पटना में जब्त दस्तावेजों में कनेक्शन
  • पूर्णिया में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र वाले सात छात्र फरार बताए गए

NEET UG Admission Scam:ऐसे काम करता था कथित सिंडिकेट

जांच में सामने आए कथित नेटवर्क का तरीका कई चरणों में काम करने वाला बताया जा रहा है।

  • कम अंक वाले अभ्यर्थियों की पहचान की जाती थी।
  • उन्हें आरक्षित वर्ग का लाभ दिलाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए जाते थे।
  • दिव्यांग अभ्यर्थी के नाम पर NEET UG में स्क्राइब की अनुमति ली जाती थी।
  • मेधावी मेडिकल छात्रों को कथित तौर पर सॉल्वर बनाकर परीक्षा में बैठाया जाता था।
  • फर्जी जाति और दिव्यांग प्रमाण पत्रों के जरिए काउंसलिंग में आरक्षित सीट हासिल करने की कोशिश होती थी।
  • दाखिले के बाद प्रमाण पत्रों के सत्यापन में भी कथित तौर पर कमियां रहने का फायदा उठाया जाता था।

इस पूरे मामले में अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी प्रमाण पत्र कहां तैयार होते थे, मेडिकल कॉलेजों में इनका सत्यापन कैसे हुआ और इस नेटवर्क में मेडिकल छात्रों के अलावा और कौन-कौन लोग शामिल थे।

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