झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में फर्जी जाति, ईडब्ल्यूएस और निवास प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिले की जांच CID करेगी। रिम्स ने 2027 सत्र से ऑनलाइन वेरिफिकेशन और जिलास्तरीय जांच की नई व्यवस्था लागू करने का फैसला लिया है।
Jharkhand MBBS Admission Scam रांची: झारखंड के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस तथा पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में फर्जी जाति, स्थायी निवासी और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) प्रमाणपत्रों के आधार पर नामांकन लेने के मामलों की जांच अब तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर गठित उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग ने मामले की जांच सीआईडी को सौंप दी है। इसके बाद सीआईडी की टीम ने रिम्स पहुंचकर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।
Jharkhand MBBS Admission Scam: जांच में फर्जी प्रमाणपत्र का मामला आया सामने
स्वास्थ्य विभाग और झारखंड संयुक्त प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षा परिषद को मिली शिकायतों के बाद 20 जिलों के उपायुक्तों से रिपोर्ट मंगाई गई थी। जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में तीन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया फर्जी पाए जाने की पुष्टि की है। वहीं तीन अन्य अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही पाए गए, जबकि छह अभ्यर्थियों के नामांकन नहीं लेने के कारण उनके प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने से सत्यापन नहीं हो सका। समिति ने सभी संबंधित अभ्यर्थियों के साथ-साथ इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की अनुशंसा की है।
Key Highlights
एमबीबीएस और पीजी मेडिकल पाठ्यक्रमों में फर्जी प्रमाणपत्र से दाखिले की CID जांच शुरू।
उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट में तीन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र प्रथम दृष्टया फर्जी मिले।
रिम्स ने 2027 सत्र से ऑनलाइन वेरिफिकेशन और जिलास्तरीय जांच की नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया।
फर्जी प्रमाणपत्र के कारण एमबीबीएस और बीडीएस के दो विद्यार्थियों का नामांकन पहले ही रद्द हो चुका है।
जांच समिति ने ऑनलाइन ऑटो वेरिफिकेशन और API आधारित प्रमाणपत्र सत्यापन की अनुशंसा की।
Jharkhand MBBS Admission Scam: ऑनलाइन सत्यापन और API सिस्टम लागू करने की सिफारिश
जांच समिति ने भविष्य में फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए प्रमाणपत्रों के ऑनलाइन ऑटो वेरिफिकेशन, एनआईसी के सहयोग से डिजिटल सत्यापन और API आधारित डेटा साझा करने की व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया है। समिति में झारखंड मेडिकल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉरपोरेशन, राजस्व विभाग और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
इसके अलावा फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने के मामले में गोड्डा के तत्कालीन अंचल अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा की गई है।
Jharkhand MBBS Admission Scam: रिम्स में 2027 से लागू होगी नई व्यवस्था
रिम्स के प्रभारी निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा ने बताया कि वर्ष 2027 के नामांकन सत्र से आरक्षण श्रेणी के सभी अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का पहले ऑनलाइन सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद संबंधित जिलों के उपायुक्तों से दोबारा जांच कराई जाएगी। यदि किसी भी स्तर पर प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो संबंधित विद्यार्थी का नामांकन तत्काल रद्द कर दिया जाएगा।
वर्ष 2025 बैच में फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर दाखिला लेने वाले एमबीबीएस की छात्रा काजल कुमारी और बीडीएस की छात्रा ओली विश्वकर्मा का नामांकन पहले ही रद्द किया जा चुका है। वहीं एमबीबीएस छात्र आशीष कुमार के जाति प्रमाणपत्र की भी जांच जारी है। एक दिव्यांगता प्रमाणपत्र की शिकायत की जांच में अभ्यर्थी में 45 प्रतिशत दिव्यांगता की पुष्टि होने के बाद उसे सही पाया गया।
Jharkhand MBBS Admission Scam: मेधावी छात्रों का प्रभावित हो रहा है अधिकार
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए सीटें हासिल करने से वास्तविक मेधावी विद्यार्थियों का अधिकार प्रभावित हो रहा है। रिम्स में एमबीबीएस की दो सीटें इसी कारण रिक्त चली गईं। यदि प्रवेश से पहले प्रभावी सत्यापन व्यवस्था होती तो प्रतीक्षा सूची के योग्य अभ्यर्थियों को इन सीटों पर प्रवेश मिल सकता था।
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