GST Council के फैसलों से कारोबारियों को राहत मिलने का दावा। टैक्स चोरी के आपराधिक मामलों की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ और रिटर्न की देरी पर न्यूनतम पेनाल्टी 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव।
GST Reform नई दिल्ली: वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों को राहत देने के उद्देश्य से कई बड़े बदलावों की जानकारी सामने आई है। इनमें टैक्स चोरी से जुड़े आपराधिक मामलों की सीमा बढ़ाने, रिटर्न देर से दाखिल करने पर न्यूनतम पेनाल्टी घटाने और जीएसटी खाते में जमा अतिरिक्त राशि की वापसी को आसान बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, टैक्स चोरी के आपराधिक मामलों की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने और 10 हजार रुपये तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं देने का प्रावधान प्रस्तावित है। हालांकि, गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य किए जाने सहित इन बदलावों की कानूनी स्थिति और लागू होने की तारीख की आधिकारिक अधिसूचना से पुष्टि जरूरी है।
GST Reform:टैक्स चोरी के मामलों में कारोबारियों को राहत देने की तैयारी
जीएसटी व्यवस्था के तहत टैक्स चोरी से जुड़े मामलों में कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई के नियमों में बदलाव की बात कही गई है। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, जीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत निर्धारित परिस्थितियों में गिरफ्तारी की शक्ति अधिकृत अधिकारियों को प्राप्त है।
प्रस्तुत जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तारी की प्रक्रिया में अदालत की मंजूरी को जरूरी बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, 10 हजार रुपये तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं देने की बात कही गई है, जबकि पहले यह सीमा एक हजार रुपये बताई गई थी।
टैक्स चोरी से जुड़े आपराधिक मामलों की सीमा भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की जानकारी दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य कम राशि वाले मामलों में आपराधिक कार्रवाई का दायरा सीमित करना बताया जा रहा है। हालांकि, पांच करोड़ रुपये तक की हर टैक्स चोरी को स्वतः अपराध-मुक्त मानने से पहले संबंधित कानूनी प्रावधानों की पुष्टि आवश्यक है।
GST Reform:रिटर्न में देरी पर न्यूनतम पेनाल्टी घटाने का प्रावधान
जीएसटी रिटर्न देर से दाखिल करने वाले कारोबारियों के लिए न्यूनतम पेनाल्टी में कमी की जानकारी दी गई है। इसके तहत पेनाल्टी 25 हजार रुपये से घटाकर 10 हजार रुपये करने का प्रस्ताव बताया गया है।
यदि यह प्रावधान अधिसूचित रूप में लागू होता है, तो संबंधित कारोबारियों पर देरी से रिटर्न दाखिल करने के मामलों में आर्थिक बोझ कम हो सकता है। हालांकि, पेनाल्टी की वास्तविक दर और लागू होने की शर्तें संबंधित अधिसूचना के अनुसार ही तय होंगी।
Key Highlights
- टैक्स चोरी से जुड़े आपराधिक मामलों की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने की जानकारी।
- 10 हजार रुपये तक की टैक्स चोरी पर नोटिस नहीं देने का प्रस्ताव बताया गया है।
- जीएसटी रिटर्न में देरी पर न्यूनतम पेनाल्टी 25 हजार से घटाकर 10 हजार रुपये करने की बात।
- ई-कॉमर्स, माल परिवहन और कर्मचारियों के ग्रुप इंश्योरेंस से जुड़े नियमों में राहत के प्रावधान बताए गए हैं।
- जीएसटी खाते में जमा अतिरिक्त राशि की वापसी को आसान और तेज बनाने की योजना की जानकारी।
GST Reform:ई-कॉमर्स और माल परिवहन से जुड़े नियमों में बदलाव
प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, अपंजीकृत व्यक्तियों के ई-कॉमर्स कारोबार से जुड़े कुछ मामलों में जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत करने की बात कही गई है। इस प्रावधान का वास्तविक लाभ संबंधित वस्तुओं, सेवाओं और लेनदेन की पात्रता पर निर्भर करेगा।
माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए भी जांच प्रक्रिया को आसान बनाने का प्रस्ताव बताया गया है। इसके तहत माल की जांच उन राज्यों में किए जाने की बात है, जहां से माल भेजा जा रहा है और जहां उसकी डिलीवरी होनी है। इसका उद्देश्य रास्ते में बार-बार होने वाली जांच से जुड़ी परेशानियों को कम करना बताया गया है।
GST Reform:कर्मचारियों के बीमा और अतिरिक्त जीएसटी राशि की वापसी में राहत
कर्मचारियों को ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत बीमा सुरक्षा देने वाली कंपनियों को टैक्स क्रेडिट का लाभ मिलने की जानकारी भी दी गई है। हालांकि, इस लाभ की पात्रता और शर्तों की पुष्टि आधिकारिक नियमों से करना जरूरी है।
इसके अलावा, जीएसटी खाते में जमा अतिरिक्त राशि की वापसी की प्रक्रिया को स्वचालित बनाने की बात कही गई है। इससे पात्र कारोबारियों का अतिरिक्त जमा पैसा वापस मिलने में लगने वाला समय कम हो सकता है और कार्यशील पूंजी लंबे समय तक खाते में फंसी नहीं रहेगी।


















