GST Scam News धनबाद में राज्यकर विभाग की जांच में ई वे बिल घोटाले का खुलासा हुआ। 10 फर्जी कंपनियों ने 330.54 करोड़ का अवैध कारोबार कर 61.89 करोड़ का जीएसटी हड़पा।
GST Scam News : झारखंड में बड़े स्तर पर जीएसटी चोरी का मामला सामने आया है। फर्जी कंपनियों के नाम पर ई वे बिल यानी परमिट जनरेट कर 330.54 करोड़ रुपये की अवैध बिक्री की गई। इस कारोबार में चोरी का कोयला, लोहा और सीमेंट शामिल है। यह खुलासा राज्यकर विभाग की जांच में हुआ है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा खेल पिछले सात माह से लगातार चल रहा था।
GST Scam News:कागजों पर खरीद बिक्री, आईटीसी से टैक्स हड़पने का खेल
जांच में सामने आया है कि फर्जी कंपनियों ने कागजों पर कोयला, लोहा और सीमेंट की खरीद बिक्री दिखाकर आईटीसी यानी इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया। नियमों के अनुसार बिक्री के बाद जीएसटीआर 3बी रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है, लेकिन जब इन कंपनियों ने रिटर्न दाखिल नहीं किया तो राज्यकर विभाग को संदेह हुआ। इसके बाद शुरू हुई जांच में परत दर परत फर्जीवाड़ा उजागर होता गया। बिक्री पर देय टैक्स को आईटीसी से एडजस्ट दिखाकर करीब 61.89 करोड़ रुपये का जीएसटी हड़प लिया गया।
ई वे बिल के जरिए 330.54 करोड़ का अवैध कारोबार उजागर
फर्जी कंपनियों ने 61.89 करोड़ रुपये का जीएसटी हड़पा
सात माह में 10 शेल कंपनियों की भूमिका सामने आई
रजिस्ट्रेशन पते पर कार्यालय की जगह खाली जमीन मिली
धनबाद और झरिया क्षेत्र से जुड़ा है पूरा नेटवर्क
GST Scam News:सात माह में 10 शेल कंपनियों से 330 करोड़ का अवैध कारोबार
राज्यकर विभाग की जांच में पता चला कि बीते सात माह में 10 फर्जी शेल कंपनियों ने बड़े पैमाने पर ई वे बिल जनरेट किए। इन्हीं परमिटों के सहारे 330.54 करोड़ रुपये का अवैध कारोबार किया गया। जब विभागीय टीम ने इन कंपनियों के रजिस्ट्रेशन पते की जांच की, तो वहां कार्यालय की जगह खाली जमीन मिली। इन 10 कंपनियों में से छह का पता धनबाद और चार का पता झरिया क्षेत्र का दर्शाया गया था। इनमें से दो कंपनियां सेंट्रल जीएसटी से भी रजिस्टर्ड पाई गईं।
GST Scam News:ऐसे होता है ई वे बिल के जरिए घोटाला
जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी रेंट एग्रीमेंट और पैन नंबर के सहारे ऑनलाइन जीएसटी रजिस्ट्रेशन कर शेल कंपनियां बनाई जाती हैं। खदानों से निकलने वाले दो नंबर के कोयले को एक नंबर दिखाने के लिए फर्जी कंपनियों के नाम से ऑनलाइन ई वे बिल जनरेट किया जाता है। इस परमिट के सहारे कोयला या तो राज्य के बाहर भेज दिया जाता है या फिर स्थानीय ईंट भट्ठों और उद्योगों में खपा दिया जाता है। लोहा और सीमेंट का कारोबार केवल कागजों पर दिखाया जाता है।
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