Deoghar के देवघर कॉलेज में जैक फंड से डेढ़ लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता का मामला तीन साल बाद भी लंबित है। राज्यपाल ने कुलपति से जवाब तलब किया है।
Google पर 22Scope चुनेंदेवघर कॉलेज के जैक फंड में करीब डेढ़ लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता के मामले में तीन साल बाद भी कार्रवाई लंबित है। राज्यपाल ने सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय की कुलपति से जवाब मांगा है।
Deoghar College Scam रांची: झारखंड के Deoghar सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय, दुमका के अंतर्गत देवघर कॉलेज में जैक फंड से जुड़ी वित्तीय अनियमितता का मामला एक बार फिर चर्चा में है। करीब तीन साल बीत जाने के बाद भी इस मामले में विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं होने पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने नाराजगी जतायी है। आरोप है कि जैक कर्मी के नाम पर ढाई साल तक मानदेय के रूप में करीब डेढ़ लाख रुपये की निकासी की गयी थी। राज्यपाल के पूर्व निर्देशों के बावजूद दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई लंबित रहने पर अब लोकभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब मांगा है।
Deoghar College Scam:तीन साल बाद भी कार्रवाई अधूरी, कुलपति से मांगा जवाब
लोकभवन ने सिदो-कान्हू मुर्मू College की कुलपति और विश्वविद्यालय प्रशासन से इस मामले में जवाब-तलब किया है। साथ ही तत्कालीन प्राचार्य डॉ बसंत कुमार गुप्ता समेत संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।
लोकभवन के अवर सचिव संजय कुमार ने कुलपति को भेजे पत्र में कहा है कि इस मामले में विभागीय कार्रवाई संचालित करने का निर्देश 20 अप्रैल 2023 को ही दिया गया था। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने अब तक न तो विभागीय कार्रवाई का अंतिम निष्पादन किया है और न ही दंड से संबंधित कोई सूचना लोकभवन को उपलब्ध करायी है।
लोकभवन ने विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि पूर्व में दिये गये निर्देशों के बावजूद कार्रवाई पूरी करने में इतनी देरी क्यों हुई।
College Scam:सिंडिकेट के फैसले दो बार बदले, राज्यपाल ने पूछा आधार
इस मामले में विश्वविद्यालय सिंडिकेट की बैठकों में लिये गये फैसलों को लेकर भी लोकभवन ने सवाल उठाये हैं। 28 जून 2025 और 26 सितंबर 2025 को हुई सिंडिकेट की बैठकों के निर्णयों में बदलाव किये जाने का कारण पूछा गया है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 26 जून 2025 की सिंडिकेट बैठक में तत्कालीन प्राचार्य और अन्य संबंधित लोगों को निलंबित करने के साथ प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 26 सितंबर 2025 की बैठक में पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करने का फैसला किया गया।
लोकभवन ने कुलपति से पूछा है कि किन परिस्थितियों में पहले लिये गये फैसलों में बदलाव किया गया और इसके पीछे क्या आधार था। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया गया है।
College Scam:विश्वविद्यालय का दावा, प्राचार्य ने लौटा दी पूरी राशि
वित्तीय अनियमितता के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि आरोपी तत्कालीन प्राचार्य ने पूरी राशि वापस कर दी है। इसके अलावा उनका स्थानांतरण भी किया जा चुका है।
हालांकि, मामला उस समय और विवादित हो गया, जब संबंधित प्राचार्य को वर्तमान में विश्वविद्यालय सिंडिकेट का सदस्य मनोनीत कर दिया गया। इससे विभागीय कार्रवाई और विश्वविद्यालय प्रशासन के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
College Scam:अभाविप ने किया था आंदोलन, जांच और निलंबन की उठायी थी मांग
देवघर कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का मामला फरवरी 2023 में उस समय चर्चा में आया था, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने कॉलेज परिसर में धरना-प्रदर्शन किया था।
संगठन ने मामले की जांच कराने और दोषी अधिकारियों को निलंबित करने की मांग की थी। इसके बाद मामला तूल पकड़ने लगा और विभागीय कार्रवाई के निर्देश जारी किये गये थे। बावजूद इसके अब तक कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी है।
Deoghar के देवघर कॉलेज में वित्तीय अनियमितता का मामला क्या है?
जैक फंड से ढाई साल तक करीब डेढ़ लाख रुपये का अनुचित निकासी किया गया था। यह राशि एक कर्मी के नाम पर मानदेय के रूप में निकाली गई थी।
राज्यपाल ने किस बात पर नाराजगी व्यक्त की है?
राज्यपाल ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि तीन साल बाद भी इस मामले में विभागीय कार्रवाई पूरी नहीं हुई है। उन्होंने पहले ही 20 अप्रैल 2023 को निर्देश दिये थे।
सिंडिकेट के फैसलों में क्या विवाद है?
जून 2025 की सिंडिकेट बैठक में प्राचार्य को निलंबित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन सितंबर 2025 की बैठक में इस फैसले में बदलाव किया गया। राज्यपाल इस बदलाव के कारण जानना चाहते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले के बारे में क्या कहा है?
प्रशासन का दावा है कि आरोपी प्राचार्य ने पूरी राशि वापस कर दी है और उनका स्थानांतरण हो चुका है। हालांकि, उसी प्राचार्य को अब विश्वविद्यालय सिंडिकेट का सदस्य नियुक्त किया गया है।
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