Munger- बाघ का कब्र- जहां एक ओर बगहा में आदमखोर बाघ ने 9 लोगों की जान ले ली, महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद उसके ढेर लगाया जा सका. इस आदमखोर की मौत पर जहां ग्रामीणों में हर्ष और चेहरे पर खुशी देखी गयी, वहीं पर्यावरण प्रेमियों ने अपने गममीन आंखों से यह सवाल भी पूछ लिया कि एक जानवर की मौत पर इंसानों में जश्न, हमें किस दिशा की ओर ले जा रहा है.
बाघ का कब्र, जहां प्रभात रंजन सरकार करते थें अपना साधना
लेकिन इसके साथ ही हम आज एक ऐसे बाघ की कहानी आप को सुना रहे हैं, जिसके कब्र को आज 156 साल के करीब हो गयें. यह कब्र है मुंगेर के जमालपुर गोल्फ मैदान के बीचों बीच बना है. यह कहानी उस बाघ की है जिसकी मौत एक अंग्रेज के हाथों हुई थी. यह बात जूदा है कि उस अंग्रेज की मौत भी उस बाघ के पंजे से हो गयी थी, उसका कब्र भी उसी के बगल में बना है. दरअसल इस कहानी की शुरुआत होती है 1862 से, जब यहां एशिया का सबसे पहला रेलवे कारखाने की स्थापना हुई थी. और इसके लिए पूरे देश से जमालपुर को चुना गया था.
मार्निंग वॉक करते समय हुआ था हमला
जमालपुर भौगोलिक स्थिति अंग्रेजों के लिए बिल्कुल उपयुक्त था. चारों तरफ पहाड़, जंगल और बगल से बहती कलकल गंगा. इसी के बगल में अंग्रेज थॉमस रॉबर्ट अपनी पत्नी एलिजा के साथ रहता था.
एक दिन बेहद खुशनुमा माहौल में दोनों पत्नी पत्नि गोल्फ ग्राउंड में मार्निंग वॉक कर रहे थें. यह बात 13 जून 1864 की है, अचानक से सामने पहाड़ से एक बाघ नीचे उतरा. बाघ ने अंग्रेज दंपति पर हमला कर दिया. थॉमस रॉबर्ट ने बंदुक तानने की कोशिश की, लेकिन बाघ के हमले में बंदुक हाथ से छिटक चुका था. इस बीच बाघ ने थॉमस रॉबर्ट की पत्नी एलिजा पर हमला कर दिया, एलिजा पर हमला होता देख थॉमस रॉबर्ट बाघ से दो दो हाथ करने भीड़ गया, दोनों के बीच काफी देर तक हाथापाई होती रही. इधर पत्नी एलिजा लोगों से मदद के लिए चिल्ला रही थी.
बाघ के हमले से हाथ से छिटक गया बंदुक
इसी बीच मौका देख कर थॉमस रॉबर्ट ने अपनी बंदुक उठा उस पर चला दी
और उस बाघ का अंत हो गया. लेकिन,बाघ के हमले से बुरी तरह लहू लुहान थॉमस रॉबर्ट ने भी आखिरकार दम तोड़ दिया.
बाद में अंग्रेज अफसरों ने जमालपुर काली पहाड़ी के नीचे गोल्फ ग्राउंड
में बाघ और थॉमस रॉबर्ट की कब्र बनवा दी,
दोनों की कब्र बिल्कुल आसपास ही बनी है. यह कब्र आज भी है.
देश का इकलौत बाघ का कब्र
कहा जाता है कि आनंदमार्ग के संस्थापक प्रभात रंजन सरकार उर्फ
आनंदमूर्ति यहां बाघ की कब्र पर साधना किया करते थें.
थॉमस रॉबर्ट की परपोती फ्रेया अपने परदादा की कब्र पर आकर श्रद्धांजलि अर्पित करती रही हैं.
थॉमस की कब्र पर लिखा है कि
उनकी मौत बाघ के हमले में 13 जून के दिन 1864 को हुई थी.
बाघों पर शोध करने वाले डॉ. समीर कुमार सिन्हा का कहना है कि
बाघ की कहीं कोई कब्र देश भर में नहीं है.
उनकी बात से जाहिर है कि यह कब्र दुर्लभ है.
अमृतेश सिन्हा

















