NALANDA: पराली जलाने के कारण नालंदा के
129 किसानों को योजनाओं के लाभ से वंचित कर दिया गया.
फिर भी किसान पराली जलाना नहीं छोड़ रहे हैं.

बता दें कि रविवार को ही डीएम शशांक शुभंकर ने
पराली जलाने बाले 129 किसानों को कृषि सम्बंधित लाभ से वंचित कर दिया.
पराली जलाने के दुष्परिणाम को रोकने के लिए हुई कार्रवाई
फसल अवशेष को जलाने से होने वाले दुष्परिणामों को
रोकने के उद्देश्य से ऐसा कार्य करने वाले किसानों को
विभाग की किसी भी तरह की योजना के लाभ से वंचित किया जाता है.
इस कार्रवाई में फसल अवशेष जलाने वाले किसानों का निबंधन ब्लॉक किया जाता है, जिसके बाद उन्हें 3 वर्षों तक विभिन्न प्रकार की विभागीय योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ता है. इसकी रोकथाम के लिए जिले में लगातार ऐसे किसानों को चिह्नित किया जा रहा है.
वर्तमान खरीफ मौसम में जिला में फसल अवशेष जलाने वाले अब तक 129 किसानों का निबंधन ब्लॉक किया गया है. जिसके कारण ये सभी किसान आगामी 3 वर्षों तक विभागीय योजनाओं के लाभ से वंचित रहेंगे. इनमें से वेन प्रखंड के 4, चंडी के 33, हरनौत के 6, हिलसा के 2, इसलामपुर के 23, कराय परशुराय के 23, नगरनौसा के 7, नूरसराय के 5, परवलपुर के 18, रहुई के 2, सिलाव के एक तथा थरथरी प्रखंड के 5 किसान शामिल है.
नालंदा में एक्यूआई करीब 300 बनी हुई है
ईधर नालंदा जिले सिलाव प्रखंड में भी किसान धड़ल्ले से खेतों में पराली जलाने के काम कर रहे हैं. जिससे वायुमंडल में प्रदूषण काफी तेजी से फैल रहा है. हालांकि नालंदा में एक्यूआई करीब 300 के आसपास बनी हुई है. ऐसे में किसान अगर धड़ल्ले से अपने खेतों में पराली जलाने की काम करते रहेंगे, तो किसानों के साथ- साथ आमलोगों को भी कठिनाई होगी. हालांकि जिला प्रशासन लगातार कार्रवाई करते हुए किसानों से अपील कर रही है कि वह पराली ना जलाएं. फसल अवशेष जलाने के दुष्परिणाम से मिट्टी की उर्वरा शक्ति तथा पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर किसानों को लगातार विभिन्न माध्यमों से जागरूक किया जाता रहा है.
रिपोर्टः रजनीश

















