Again In Power : चौथी बार आंध्र प्रदेश के सीएम बने चंद्रबाबू नायडू, पीएम मोदी भी रहे मौजूद

डिजीटल डेस्क : Again In Powerचौथी बार आंध्र प्रदेश के सीएम बने चंद्रबाबू नायडू और  पीएम मोदी भी शपथ ग्रहण समारोह में रहे मौजूद। आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। उनका यह चौथा कार्यकाल है। उनके साथ पवन कल्याण और टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा और नितिन गडकरी सहित अन्य शामिल हुए।

Again In Power : शपथ लेने के बाद पीएम मोदी से गले मिले चंद्रबाबू नायडू

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नायडू ने मंच पर पीएम मोदी के साथ गले मिले। इस अवसर पर चंद्रबाबू नायडू के बेटे और टीडीपी महासचिव नारा लोकेश, केंद्रीय मंत्री राममोहन नायडू, अभिनेता चिरंजीवी, रजनीकांत, नंदमुरी बालकृष्ण भी मौजूद थे। यह चौथी बार है जब चंद्रबाबू नायडू आंध्र के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल रहे हैं। 2014 में आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद दूसरी बार वो सीएम बने। आंध्र प्रदेश के विभाजन से पहले नायडू, साल 1995 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और उन्होंने लगातार नौ वर्षों तक 2004 तक राज्य का नेतृत्व किया। इसके बाद वो दूसरी बार साल 2014 में सीएम बने। Again In Power : Again In Power : Again In Power :

Again In Power : भाजपा से अकेले सत्य कुमार यादव नई आंध्र प्रदेश सरकार में बने मंत्री

आंध्र प्रदेश की 175 सदस्यीय विधानसभा में टीडीपी के पास 135 विधायक हैं, जबकि उसके सहयोगी जनसेना पार्टी के पास 21 और बीजेपी के पास आठ विधायक हैं। विपक्षी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के पास 11 विधायक हैं।

मंत्रिमंडल में टीडीपी के 21, जनसेना पार्टी के तीन और भाजपा के एक विधायक शामिल हैं। शपथ लेने वाले टीडीपी विधायकों में नारा लोकेश, किंजरापु अच्चेन्नायडू, निम्माला रामानायडू, एनएमडी फारूक, अनम रामनारायण रेड्डी , पय्यावुला केसव, कोल्लू रवींद्र, पोंगुरु नारायण, वंगालापुडी अनीता, अनगानी सत्य प्रसाद, कोलुसु पार्थसारधी, कोला बलवीरंजनेया स्वामी, गोट्टीपति रवि, गुम्माडी संध्यारानी, बीसी जनार्दन रेड्डी, टीजी भारत, एस सविता, वासमसेट्टी सुभाष, कोंडापल्ली श्रीनिवास और मंडीपल्ली रामप्रसाद रेड्डी शामिल हैं।

जनसेना पार्टी की ओर से कोनिडेला पवन कल्याण, नादेंदला मनोहर और कंडुला दुर्गेश मंत्री पद की शपथ ली जबकि भाजपा की ओर से सत्य कुमार यादव नायडू मंत्री पद की शपथ लेने वाले एकमात्र विधायक हैं।

Again In Power : पीएम मोदी ने थपथपाई पवन कल्याण की पीठ

इस शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी के अलावा कई फिल्मी सितारे भी समारोह में शामिल हुए। विजयवाड़ा में सीएम नाडयू के शपथ ग्रहण समारोह में साउथ सुपरस्टार रजनीकांत, पवन कल्याण के भाई चिरंजीवी भी पहुंचे। सीएम नायूड और पवन कल्याण ने पीएम मोदी को रामलला की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। पवन कल्याण ने शानदार प्रदर्शन किया है। Again In Power : Again In Power : Again In Power :

उन्होंने पीथापुरम सीट से चुनाव जीता है। उनकी इस ऐतिहासिक जीत की पीएम मोदी तारीफ कर चुके हैं। पीएम मोदी ने पवन कल्याण की तारीफ करते हुए कहा था, ‘ये पवन, पवन नहीं आंधी हैं’। आज शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी ने पवन कल्याण से मुलाकात के दौरान उनकी पीठ थपथपाई।

शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी ने पवन कल्याण से मुलाकात के दौरान उनकी पीठ थपथपाई।
Again In Power : पवन कल्याण का पीठ थपथपाते पीएम मोदी। साथ खड़े हैं सीएम चंद्रबाबू नायडू

5 साल बाद किसान परिवार के चंद्रबाबू नायडू की हुई सत्ता में वापसी

पांच साल बाद राज्य की सत्ता में वापसी करते हुए चंद्रबाबू नायडू एक बार फिर मुख्यमंत्री बन गए हैं। यह चुनाव उन्होंने एनडीए के साथ मिलकर लड़ा था जिसमें उन्हें जबरदस्त सफलता मिली है। वर्ष 2019 में राज्य की सत्ता से बाहर होने के बाद उनके सियासी सफर में कई उतार-चढ़ाव आए। खासकर 2023 में उन्हें कौशल विकास मामले में जेल जाना पड़ा। विधानभा चुनाव में प्रचंड जीत के साथ वह एक बार फिर सत्ता में आ गए हैं। इसके अलावा उनकी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में भी अच्छा प्रदर्शन किया है और केंद्र की एनडीए सरकार का अहम हिस्सा बनी है।

नारा चंद्रबाबू नायडू का जन्म 20 अप्रैल 1950 को वर्तमान आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के नरवरिपल्ले में एक किसान परिवार में हुआ था। नायडू ने पांचवीं कक्षा तक शेषपुरम के प्राथमिक विद्यालय और 10वीं कक्षा तक चंद्रगिरी सरकारी हाई स्कूल में शिक्षा हासिल की। उन्होंने 1972 में श्री वेंकटेश्वर आर्ट्स कॉलेज, तिरुपति से बीए की डिग्री पूरी की। नायडू ने श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री प्राप्त की। 1974 में पीएचडी पर काम करना शुरू किया, लेकिन अपनी पीएचडी पूरी नहीं की। Again In Power : Again In Power : Again In Power :

Again In Power : कांग्रेस से शुरू हुआ था चंद्रबाबू नायडू का सियासी सफर

चंद्रबाबू नायडू का सियासी सफर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस के साथ शुरू हुआ था। वर्ष 1978 में 28 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला चुनाव लड़ा। वह चंद्रगिरी विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक चुने गए। उन्हें कांग्रेस का टिकट पार्टी में युवाओं के लिए 20% कोटे वाले नियम के तहत मिला था। इसके बाद उन्हें टी. अंजैया की सरकार में सिनेमेटोग्राफी मंत्री बनाया गया। वह उस समय आंध्र प्रदेश में 28 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के विधायक और 30 साल की उम्र में सबसे कम उम्र के मंत्री बने। Again In Power : Again In Power : Again In Power :

सिनेमेटोग्राफी मंत्री के रूप में नायडू उस समय तेलुगु सिनेमा के स्टार एनटी रामा राव (एनटीआर) के संपर्क में आए। कम उम्र में नायडू की उपलब्धियों से प्रभावित होकर एनटीआर ने अपने परिवार के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। 1981 में चंद्रबाबू नायडू ने एनटीआर की दूसरी बेटी भुवनेश्वरी से शादी की।

Again In Power : टीडीपी में ससुर एनटीआर के सबसे विश्वासपात्र रहे चंद्रबाबू

1982 में एनटी रामाराव ने तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) का गठन किया और 1983 में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में भारी जीत हासिल की। हालांकि, कांग्रेस से चुनाव लड़े उनके दामाद चंद्रबाबू नायडू चंद्रगिरी विधानसभा सीट से चुनाव में टीडीपी उम्मीदवार से हार गए। इसके बाद परिवार के दबाव के चलते वह तेलुगु देशम पार्टी में शामिल हो गए।

1984 के अगस्त में नादेंदला भास्कर राव के तख्तापलट से शुरू हुए संकट के दौरान उनकी सक्रिय भूमिका के बाद वे मुख्यमंत्री एनटीआर के करीबी विश्वासपात्र बन गए। यही कारण है कि एनटीआर ने उन्हें 1986 में टीडीपी का महासचिव नियुक्त किया। वर्ष 1989 के विधानसभा चुनावों में नायडू ने अपना निर्वाचन क्षेत्र चंद्रगिरी से बदलकर कुप्पम कर लिया और टीडीपी उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की।

नायडू ने 1994 के विधानसभा चुनावों में कुप्पम निर्वाचन क्षेत्र से अपनी दूसरी जीत हासिल की। इन चुनावों में एनटी रामा राव के नेतृत्व में टीडीपी ने भारी जीत हासिल की। अब पार्टी में नंबर दो माने जाने वाले नायडू एनटी रामा राव के मंत्रालय में वित्त और राजस्व मंत्री बने।

ससुर एनटीआर के खिलाफ विद्रोह के बाद चंद्रबाबू बने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री

साल 1995 में 45 वर्ष की आयु में नायडू ने एनटी रामाराव के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 1999 के विधानसभा चुनावों में सत्तारूढ़ तेदेपा नेता नायडू ने विधानसभा में 294 में से 180 सीटें हासिल करके अपनी पार्टी को जीत दिलाई। इसके अलावा, तेदेपा ने लोकसभा चुनावों में 42 में से 29 सीटें जीतीं। इसके साथ ही वह भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) गठबंधन सरकार में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।

1 अक्तूबर 2003 को तिरुपति में अलीपीरी टोलगेट के पास हुए बारूदी सुरंग विस्फोट में नायडू बाल-बाल बच गए। सात पहाड़ियों के ऊपर भगवान वेंकटेश्वर के ब्रह्मोत्सव के वार्षिक अनुष्ठान में भाग लेने के लिए तिरुमाला जाते समय मुख्यमंत्री के काफिले पर हमला किया गया था। कुल 17 क्लेमोर माइन लगाए गए थे, जिनमें से नौ में विस्फोट हो गया। विस्फोट में नायडू को मामूली चोटों आईं और वह बच निकले।

राष्ट्रीय राजनीति में भी चंद्रबाबू ने बढ़ाया अपना कद, बने किंगमेकर

चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रीय राजनीति में भी अहम भूमिका निभाई। 1990 के दशक के मध्य में गैर-कांग्रेसी गठबंधन राजनीति में उन्हें किंग-मेकर माना जाता था। वे 13 राजनीतिक दलों के गठबंधन यूनाइटेड फ्रंट के संयोजक थे, जिसने 1996 के लोकसभा चुनावों के बाद केंद्र में सरकार बनाई। 1999 के लोकसभा चुनावों के बाद नायडू की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण हो गई। राज्य में टीडीपी और भाजपा के बीच चुनाव-पूर्व समझौता हुआ और इसने जबरदस्त सफलता हासिल की।

राज्य में टीडीपी-भाजपा के सांसदों की संख्या 16 से बढ़कर 42 में से 36 हो गई। भाजपा लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत नहीं था। टीडीपी प्रमुख ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक मोर्चा सरकार को अपने 29 सांसदों का समर्थन दिया। हालांकि, उनकी पार्टी सरकार में शामिल नहीं हुई और केवल ‘मुद्दों के आधार पर समर्थन’ दिया।

आंध्र के विभाजन के बाद चंद्रबाबू नायडू फिर बने मुख्यमंत्री, वर्ष 2018 में छोड़ा एनडीए

आंध्र प्रदेश के विभाजन के बाद 2014 में नए बने राज्यों में चुनाव हुए। नायडू ने भारतीय जनता पार्टी और जन सेना पार्टी के साथ फिर से गठबंधन किया और विभाजित आंध्र प्रदेश राज्य में 175 सीटों में से 102 सीटें जीतकर सत्ता में लौटे। नायडू ने आंध्र प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उनकी पार्टी केंद्र में एनडीए सरकार में शामिल हो गई और केंद्रीय मंत्रिमंडल में दो विभागों को संभाला। मार्च 2018 में आंध्र प्रदेश को विशेष श्रेणी का दर्जा (एसपीएस) दिए जाने के मुद्दे पर टीडीपी ने पीएम नरेंद्र मोदी की सरकार से अपने दो मंत्रियों को वापस बुला लिया था।

एससीएस का वादा पिछली कांग्रेस सरकार ने एपी पुनर्गठन विधेयक पारित करने के दौरान संसद में किया था। इसके बाद नायडू ने एसपीएस न दिए जाने के कारण आंध्र प्रदेश के साथ कथित ह्लअन्यायह्व के कारण टीडीपी के एनडीए से अलग होने की घोषणा की।

साल भर पहले जेल जाना पड़ा और अब की सत्ता में वापसी

चंद्रबाबू नायडू ने सत्ता में आने के बाद से रेड्डी सरकार पर टीडीपी और नायडू के खिलाफ प्रतिशोध की राजनीति में शामिल होने का आरोप लगाया। वर्ष 2023 में उन्हें कौशल विकास मामले में जेल भी जाना पड़ा लेकिन उन्हें अदालत से जमानत मिल गई। नायडू ने 2024 में हुए चुनावों में शानदार वापसी की। उनके नेतृत्व में विधानसभा चुनाव में टीडीपी ने अकेले 135 सीटें जीतीं।

इसके अलावा गठबंधन सहयोगियों पवन कल्याण की जनसेना पार्टी ने 11 और भाजपा ने आठ सीटें हासिल कीं। वहीं जगन मोहन की वाईएसआर कांग्रेस 11 सीटों पर आ गई। इसके अलावा लोकसभा चुनाव में भी टीडीपी को 16, भाजपा को तीन और जनसेना पार्टी को दो सीटें आईं। वाईएसआर कांग्रेस महज चार सीटों पर ही सिमट गई।

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