रांची में डीजल संकट के कारण ट्रकों की आवाजाही घटी, माल ढुलाई और FMCG सप्लाई प्रभावित। मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ा सीधा असर।
Ranchi Diesel Crisis रांची:रांची में डीजल की कमी का असर अब सीधे ट्रांसपोर्ट, लॉजिस्टिक और बाजार व्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। डीजल संकट के कारण ट्रकों के पहिये थमने लगे हैं, जिससे माल ढुलाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। खासकर हाइवे पर स्थित अधिकांश पेट्रोल पंपों पर राशनिंग लागू होने से ट्रांसपोर्टरों की परेशानी और बढ़ गई है।
मध्य-पूर्व में जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर अब झारखंड की राजधानी रांची तक पहुंच गया है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि पहले वे निश्चित स्थानों पर पहुंचकर डीजल भराते थे, लेकिन अब अलग-अलग जगहों पर रुककर डीजल लेना पड़ रहा है। कई बार यह भी पता नहीं होता कि कहां डीजल मिलेगा।
Key Highlights:
रांची में डीजल की कमी से ट्रकों की आवाजाही में भारी गिरावट
पहले 1700 ट्रक रोज पहुंचते थे, अब केवल 1000 ट्रक ही आ रहे
FMCG, दवा, कपड़ा, टाइल्स, मार्बल समेत कई जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित
लगभग 3800 मजदूरों का रोजगार प्रभावित, आधे मजदूर हुए कम
रांची से दिल्ली तक माल पहुंचने में अब 6 से 7 दिन लग रहे हैं
Ranchi Diesel Crisis:ट्रकों की आवक घटी, बाजारों में सामान पहुंचना हुआ मुश्किल
पंडरा और रांची के आसपास के बाजारों में पहले प्रतिदिन लगभग 1700 ट्रकों से माल पहुंचता था, लेकिन वर्तमान में यह संख्या घटकर करीब 1000 ट्रक रह गई है। डीजल की कमी और सामानों के दाम में लगातार उतार-चढ़ाव के कारण ट्रकों की आवक कम हो गई है।
बाहर के राज्यों से चावल, दाल, आलू, प्याज, लहसुन, दवा, कपड़ा, वायर एंड केबल, टाइल्स, मार्बल, प्लास्टिक आइटम समेत कई जरूरी सामान रांची पहुंचते हैं। लेकिन अब समय पर आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ट्रांसपोर्टरों को यह भी डर सता रहा है कि वापसी में माल मिलेगा या नहीं।
Ranchi Diesel Crisis:एफएमसीजी और स्थानीय सप्लाई पर भी पड़ा असर
झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के अनुसार डीजल की कमी के कारण लगभग 30 से 40 प्रतिशत आपूर्ति बाधित हो गई है। कंपनी से सीएनएफ गोदाम तक माल पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे स्थानीय बाजारों में भी सप्लाई प्रभावित हो रही है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय अखौरी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ऑटो में पहले डीजल भराने के बाद ही बाजार में माल भेजा जा रहा है। डीजल उपलब्ध नहीं होने पर ऑटो को बाजार नहीं भेजा जा रहा है। इसका सबसे अधिक असर FMCG सामानों की सप्लाई पर पड़ रहा है।
Ranchi Diesel Crisis:मजदूरों के रोजगार पर भी पड़ा सीधा असर
ट्रकों की संख्या कम होने से मजदूरों की रोजी-रोटी भी प्रभावित हो रही है। अकेले पंडरा में 5680 मजदूर माल उतारने के काम में लगे हुए हैं, जबकि रांची और आसपास के बाजारों में लगभग 2400 मजदूर कार्यरत हैं। कुल मिलाकर 8400 मजदूर इस काम से जुड़े हैं।
लेकिन ट्रकों की आवक कम होने के कारण लगभग 3800 मजदूरों का काम प्रभावित हुआ है। झारखंड जनशक्ति मजदूर यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष ललित ओझा ने मीडिया को मामले में कहा कि डीजल की कमी और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण माल कम पहुंच रहा है, जिससे लगभग आधे मजदूरों का रोजगार प्रभावित हुआ है।
Ranchi Diesel Crisis:दूसरे राज्यों तक माल पहुंचने में बढ़ी देरी
रांची से उत्तर प्रदेश, नई दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा सहित कई राज्यों में माल भेजा जाता है। बजरंग ट्रांसपोर्ट के प्रोपराइटर पवन शर्मा ने बताया कि पहले रांची से नई दिल्ली तक माल चौथे दिन पहुंच जाता था, लेकिन अब औसतन 6 से 7 दिन लग रहे हैं।
यहां से वायर रोप, सरिया, लोहे का वायर रॉड, कोयला जैसे औद्योगिक सामान भेजे जाते हैं। वहीं जैन ट्रांसपोर्ट के अभिषेक जैन ने कहा कि माल पहुंचने के बाद वापसी में भी परेशानी हो रही है। डीजल की कमी और वापसी में माल नहीं मिलने के कारण ट्रक एक-एक सप्ताह तक खड़े रह जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीजल संकट जल्द नहीं सुलझा, तो इसका असर महंगाई, बाजार आपूर्ति और श्रमिकों की आजीविका पर और गंभीर रूप से दिखाई देगा।
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