अपने उद्धार की बाट जोह रही है JAMALPUR में एशिया की सबसे पुरानी रेल इंजन फैक्ट्री

JAMALPUR

बिहार में रोजगार के लिए बड़ा हब बन सकता है JAMALPUR कारखाना। लोकसभा चुनाव में जमालपुर कारखाना बन सकता है मुंगेर ही नहीं बिहार के लिए बड़ा मुद्दा। दिवंगत सांसद डीपी यादव ब्रह्मानंद मंडल के बाद कोई सांसद इस कारखाने को लेकर नहीं हुए हैं मुखर। बिहार के कई रेल मंत्री ने भी देश के पहले रेल इंजन कारखाना जमालपुर के बदहाल स्थिति को नहीं बनाया बेहतर। कारखाने पर टिका है जमालपुर शहर का भविष्य।

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मुंगेर: एशिया का पहला रेल इंजन कारखाना आज सरकारी उपेक्षा का शिकार है। इसका विकास तो दूर अस्तित्व बचाने के लिए यहां की आम आवाम और रेलकर्मी संघर्ष करते हुए दिखाई दे रहे हैं जबकि यह रोजगार का एक बड़ा हब बन सकता है। हम बात कर रहे हैं JAMALPUR रेल इंजन कारखाना की, जिसकी स्थापना वर्ष 1862 में की गई थी। आज यह कारखाना सरकारी उपेक्षा का शिकार हो चुकी है और दिन प्रतिदिन यहां की स्थिति बदतर होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो एक दिन यह ऐतिहासिक कारखाना बंद हो जाएगी।

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ऐसे तो बिहार ने देश को कई बड़े नेता और कई रेल मंत्री भी दिए लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और इस कारखाना का अस्तित्व दिनों दिन खतरे की ओर बढ़ता ही जा रहा है। मुंगेर के पूर्व सांसद दिवंगत डीपी यादव ने इस कारखाना के विकास के लिए संसद में अपनी आवाज बुलंद जरूर की थी और जहां तक संभव हुआ उन्होंने इसका विकास भी किया लेकिन उसके बाद से यह लगातार उपेक्षित ही रह गया।

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स्थानीय लोग बताते हैं कि इस कारखाना पर ही JAMALPUR शहर का भविष्य टिका हुआ है। अगर अभी भी इस कारखाना का विकास किया जाये तो यहां रोजगार के लिए असीम संभावनाएं होंगी और देश का पहला रेल इंजन कारखाना एक बार फिर से गुलजार हो जाएगी। स्थानीय लोगों को अभी भी इंतजार है उस नेता और उस दल का जो इस कारखाना का विकास कर देश की विरासत को संभाल सके

JAMALPUR से केएम राज की रिपोर्ट

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