नए साल, नई शुरुआत व आध्यात्मिक शांति की तलाश, भागलपुर का कुप्पाघाट बना आस्था का केंद्र

भागलपुर : नए साल के आगमन को लेकर लोगों में खासा उत्साह है। कोई पहाड़ों की ओर रुख कर रहा है तो कोई समुद्र किनारे सुकून तलाश रहा है। लेकिन शोर-शराबे और भीड़-भाड़ से दूर, जो लोग मन की शांति और आत्मिक सुकून की तलाश में हैं। उनके लिए भागलपुर का कुप्पाघाट आश्रम नए साल में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।

भागलपुर स्थित यह पावन स्थल महर्षि में ही परमहंस जी महाराज की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है

भागलपुर स्थित यह पावन स्थल महर्षि में ही परमहंस जी महाराज की तपोभूमि के रूप में जाना जाता है। हर साल की तरह इस बार भी नए साल पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। बिहार ही नहीं, बल्कि झारखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत कई अन्य राज्यों से लोग कुप्पाघाट पहुंचकर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।

कुप्पाघाट की पहचान उसकी ऐतिहासिक साधना गुफा से है

कुप्पाघाट की पहचान उसकी ऐतिहासिक साधना गुफा से है। जहां महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज ने वर्ष 1933 से 1934 के बीच लगभग 18 महीने तक कठोर साधना की थी। आज यह गुफा श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रतीक है। इसी परिसर में उनका समाधि स्थल भी स्थित है, जहां लोग ध्यान और साधना में लीन नजर आते हैं। आश्रम परिसर में बनी सुंदर बगिया भी श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है। यहां भगवान रामचंद्र और शबरी माता के उस मार्मिक दृश्य को दर्शाया गया है। जिसमें प्रभु राम शबरी माता के प्रेम से अर्पित झूठे बेर स्वीकार करते हैं। यह दृश्य भक्ति और समर्पण की भावना को जीवंत कर देता है।

Bhagalpur New Year 1 22Scope News

RSS प्रमुख मोहन भागवत भी एक ही वर्ष में 2 बार यहां दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं

इसके अलावा कुप्पाघाट में वह निवास स्थान भी मौजूद है, जहां महर्षि मेंही परमहंस जी महाराज रहा करते थे। इस पूरे क्षेत्र को तप, साधना और अध्यात्म की दृष्टि से अत्यंत पौराणिक और महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है। कुप्पाघाट की आध्यात्मिक महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी एक ही वर्ष में दो बार यहां दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं।

नए साल पर जब लोग बाहरी चमक-दमक से दूर सुकून की तलाश में निकलते हैं

नए साल पर जब लोग बाहरी चमक-दमक से दूर सुकून की तलाश में निकलते हैं, तब कुप्पाघाट उन्हें शांति, साधना और अध्यात्म का अनूठा संगम प्रदान करता है, यही वजह है कि नए साल के आगमन के साथ ही कुप्पाघाट एक बार फिर श्रद्धा और विश्वास के रंग में रंगने को तैयार है।

नए साल, नई शुरुआत व आध्यात्मिक शांति की तलाश, भागलपुर का कुप्पाघाट बना आस्था का केंद्र
नए साल, नई शुरुआत व आध्यात्मिक शांति की तलाश, भागलपुर का कुप्पाघाट बना आस्था का केंद्र

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राजीव रंजन की रिपोर्ट

Saffrn

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