CK Anil Bihar Education Department, पटना: बिहार के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सीके अनिल एक बार फिर चर्चा में हैं। करीब 21 साल पहले सीवान में पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ की गई कार्रवाई से राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए सीके अनिल को अब राज्य के शिक्षा विभाग की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद उन्होंने अपनी पहली समीक्षा बैठक के लिए सीवान जिले को चुना। यही वह जिला है, जहां उनके प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान एक बड़ी कार्रवाई ने पूरे बिहार का ध्यान खींचा था। अब सीके अनिल के सामने कानून-व्यवस्था से अलग शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने की चुनौती है। स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने और शिक्षण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने जैसे मुद्दे उनकी प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सीवान में हुई पहली समीक्षा बैठक को उनकी नई जिम्मेदारी की शुरुआती दिशा के तौर पर देखा जा रहा है।
2005 में शहाबुद्दीन के ठिकानों पर छापेमारी से मिली थी पहचान
सीवान के जिलाधिकारी रहते हुए सीके अनिल ने 24 अप्रैल 2005 को पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की थी। जिला प्रशासन और स्पेशल टास्क फोर्स की संयुक्त टीम ने शहाबुद्दीन के पैतृक गांव प्रतापपुर में छापेमारी की थी। इस अभियान में तत्कालीन पुलिस अधीक्षक रत्न संजय भी शामिल थे। प्रशासनिक टीम ने शहाबुद्दीन के आवास समेत करीब 11 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान हथियार, कारतूस, नाइट विजन उपकरण, वायरलेस सेट और बुलेटप्रूफ जैकेट सहित कई सामान बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इस कार्रवाई के बाद बिहार की राजनीति और प्रशासनिक महकमे में काफी हलचल हुई थी। सीके अनिल की इस कार्रवाई की चर्चा राज्य के बाहर भी हुई थी।
शहाबुद्दीन के सीवान में प्रवेश पर लगाया था छह महीने का प्रतिबंध
जिलाधिकारी के रूप में सीके अनिल ने शहाबुद्दीन के सीवान जिले में प्रवेश पर छह महीने का प्रतिबंध लगाने का आदेश भी जारी किया था। हालांकि, बाद में सारण प्रमंडल के आयुक्त ने इस आदेश को निरस्त कर दिया था। प्रतापपुर में छापेमारी और प्रवेश प्रतिबंध से जुड़े फैसलों ने उस समय सीके अनिल को चर्चा में ला दिया था। उनके प्रशासनिक कार्यकाल का यह अध्याय आज भी उनके करियर के प्रमुख घटनाक्रमों में गिना जाता है।
कौन हैं सीके अनिल, 1991 बैच के आईएएस अधिकारी
सीके अनिल का पूरा नाम चंद्रकांत कुमार अनिल है। वह बिहार कैडर के 1991 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनकी शुरुआती प्रशासनिक तैनाती रोहतास में अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में हुई थी। इसके बाद उन्होंने बोकारो में एसडीओ और देवघर में उप विकास आयुक्त के पद पर काम किया। अपने लंबे प्रशासनिक करियर में वह चतरा और सीवान के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य, कल्याण, कृषि और सहकारिता जैसे विभागों में भी उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। तीन दशक से अधिक के अनुभव के साथ उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर राज्य स्तर के विभागों तक काम किया है।
कृषि और सहकारिता के बाद अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी
सीके अनिल कृषि विभाग में सचिव और सहकारिता विभाग में निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। शिक्षा विभाग की नई जिम्मेदारी मिलने से पहले वह बिहार राज्य योजना पर्षद में परामर्शी के पद पर कार्यरत थे। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के तहत उन्हें शिक्षा विभाग का अपर मुख्य सचिव नियुक्त किया गया। इस नियुक्ति के बाद राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अब स्कूलों की स्थिति, शिक्षकों की जवाबदेही और विद्यार्थियों को मिलने वाली शैक्षणिक सुविधाओं पर उनके फैसलों का असर देखने को मिलेगा।
सीवान में पहली समीक्षा बैठक, शिक्षा में AI के इस्तेमाल पर चर्चा
नई जिम्मेदारी संभालने के बाद सीके अनिल ने अपनी पहली समीक्षा बैठक सीवान में आयोजित की। बैठक में सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं और पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। शिक्षा व्यवस्था में तकनीक के उपयोग और नए प्रयोगों को बढ़ावा देने के प्रस्ताव भी सामने आए। बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल और सेवानिवृत्त अधिकारियों की शैक्षणिक सेवाएं लेने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया गया। इन प्रस्तावों का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने और स्कूलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाना बताया जा रहा है।
शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई से शिक्षा सुधार तक का सफर
करीब दो दशक पहले सीवान में शहाबुद्दीन के खिलाफ कार्रवाई के कारण चर्चा में आए सीके अनिल अब शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके सामने इस बार चुनौती राज्य के सरकारी स्कूलों में सुविधाओं का विस्तार करने और विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की है। शिक्षकों की जवाबदेही, स्कूलों में आधारभूत ढांचे का विकास, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और तकनीक का इस्तेमाल उनकी नई जिम्मेदारी के अहम विषय होंगे। सीवान से शुरू हुई उनकी पहली समीक्षा बैठक के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन प्राथमिकताओं को जमीन पर लागू करने के लिए शिक्षा विभाग किस तरह की कार्ययोजना तैयार करता है।
Highlights



















