Bihar Mati Kala Board: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रजापति समाज और माटी कला से जुड़े कारीगरों के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अगले तीन माह में माटी कला बोर्ड का गठन किया जाएगा। बोर्ड के माध्यम से कुम्हार यानी प्रजापति समाज के पारंपरिक हुनर को संरक्षण देने के साथ कारीगरों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह घोषणा श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में बिहार कुम्हार (प्रजापति) समन्वय समिति की ओर से आयोजित अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के शहादत दिवस और नवनिर्वाचित विधान पार्षदों के अभिनंदन समारोह में की।
अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी को मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर की। इसके बाद उन्होंने अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि महज 13 वर्ष की आयु में रामचंद्र विद्यार्थी ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने कहा कि अमर शहीद रामचंद्र विद्यार्थी का जीवन और बलिदान सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को याद करना और उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर पंडित राजकुमार शुक्ल और अमर शहीद रामफल मंडल को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रजापति समाज के विकास पर सरकार का जोर
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि प्रजापति समाज ने अपनी कला, मेहनत और पारंपरिक हुनर के माध्यम से बिहार की संस्कृति और परंपरा को समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि यह समाज साधारण मिट्टी को भी आकार देकर उपयोगी और सुंदर वस्तुओं का निर्माण करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रजापति समाज के विकास और उसे आगे बढ़ाने को लेकर सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने समाज से जुड़े जनप्रतिनिधियों से भी लोगों के बीच जाकर उनके विकास और न्याय से जुड़े मुद्दों पर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार प्रजापति समाज को आगे बढ़ाने और न्याय दिलाने के लिए साथ खड़ी रहेगी।
तीन महीने में बनेगा माटी कला बोर्ड
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार की माटी कला राज्य की समृद्ध लोक एवं पारंपरिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कला को संरक्षित और प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अगले तीन माह में माटी कला बोर्ड का गठन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड के माध्यम से कुम्हार समाज और माटी कला से जुड़े कारीगरों के हित में योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा। कारीगरों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के साथ उनके उत्पादों के लिए बेहतर विपणन और बाजार की व्यवस्था की दिशा में भी पहल की जाएगी। इस पहल से पारंपरिक माटी कला को आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ने और कारीगरों के लिए नए अवसर तैयार करने पर जोर रहेगा।

रोजगार और सरकारी योजनाओं का भी किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के विकास, सम्मान और सशक्तीकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार के सभी लोगों को 125 यूनिट बिजली दी जा रही है, जबकि वृद्धा पेंशन की राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये की गई है। उन्होंने कहा कि सहयोग शिविर के माध्यम से प्राप्त आवेदनों का समाधान 30 दिनों के अंदर करने का प्रावधान है। निर्धारित समय में आवेदन पर आदेश नहीं देने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई का भी प्रावधान है। मुख्यमंत्री ने युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत 1 करोड़ 81 लाख बहनों के खातों में 10 हजार रुपये की राशि अंतरित की गई है, ताकि वे अपना रोजगार शुरू कर सकें।
माटी कला को आधुनिक बाजार से जोड़ने की तैयारी
माटी कला बोर्ड के गठन की घोषणा को पारंपरिक कारीगरों के लिए महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है। बोर्ड के माध्यम से प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और बाजार से जुड़ाव पर जोर दिया जाएगा। इससे माटी कला से जुड़े कारीगरों को अपने पारंपरिक उत्पादों को नए तरीके से विकसित करने और व्यापक बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है। कार्यक्रम में खान एवं भूतत्व सह कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार, राज्यसभा सांसद डॉ. भीम सिंह, विधायक आलोक सिंह, विधायक वशिष्ठ सिंह, विधान पार्षद शीला पंडित, विधान पार्षद शिवरानी प्रजापति समेत बिहार कुम्हार (प्रजापति) समन्वय समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



















