Bihar Women Athletes: बिहार की बेटियां खेल के मैदान में मेहनत, लगन और संघर्ष के दम पर अपनी पहचान बना रही हैं। तीरंदाजी में अंजलि कुमारी और फुटबॉल में श्यामा रानी की कहानी बताती है कि परिवार का सहयोग और दृढ़ इच्छाशक्ति खिलाड़ियों को आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। एक ओर अंजलि कुमारी ने तीरंदाजी की अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल किए हैं, वहीं मुंगेर की श्यामा रानी भारतीय फुटबॉल टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। नवरात्रि के अवसर पर इन दोनों खिलाड़ियों की उपलब्धियां महिला प्रतिभा और खेलों में उनकी बढ़ती भागीदारी को सामने लाती हैं।
अंजलि कुमारी: कम संसाधनों के बावजूद तीरंदाजी में बनाई पहचान
अंजलि कुमारी ने तीरंदाजी का शुरुआती प्रशिक्षण झारखंड में प्राप्त किया। उनके पिता टाटा स्टील में नौकरी करते थे और उनके बड़े भाई भी तीरंदाजी करते थे। भाई को देखकर ही अंजलि के मन में इस खेल को अपनाने की इच्छा पैदा हुई। अंजलि के अनुसार, उनके परिवार ने शुरुआत से ही उनका साथ दिया। अभ्यास के दौरान भी उन्हें परिवार का सहयोग मिलता रहा। उनके बड़े भाई ने उन्हें प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंजलि अब तक पांच अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उन्होंने वर्ल्ड यूनिवर्सिटी प्रतियोगिता में कांस्य पदक और एशियन ग्रां प्री में रजत पदक जीता है। अंजलि का मानना है कि खिलाड़ी की सफलता में परिवार का योगदान बेहद महत्वपूर्ण होता है। उनके अनुभव में, जब हर समय कोच का साथ उपलब्ध नहीं होता, तब परिवार का प्रोत्साहन और मार्गदर्शन खिलाड़ी का हौसला बनाए रखने में मदद करता है।

श्यामा रानी: सामाजिक चुनौतियों के बीच फुटबॉल में सफलता
मुंगेर की रहने वाली श्यामा रानी ने फुटबॉल में अपनी पहचान बनाई है। उनकी बहन भी फुटबॉल खेलती थीं और उन्हें देखकर परिवार ने श्यामा को भी इस खेल के लिए प्रोत्साहित किया। श्यामा के मुताबिक, उनके गांव में लड़कियों के फुटबॉल खेलने और मैदान में हाफ पैंट पहनकर जाने को लेकर कुछ लोगों की आपत्ति थी। ऐसे माहौल में खेल जारी रखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। हालांकि, उनके माता-पिता ने उनका साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया। श्यामा भारतीय फुटबॉल टीम की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उनकी कहानी दिखाती है कि परिवार का समर्थन लड़कियों को सामाजिक चुनौतियों के बीच अपनी रुचि और प्रतिभा को आगे बढ़ाने का अवसर दे सकता है।
‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना से खिलाड़ियों को प्रोत्साहन
बिहार सरकार की ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना का उद्देश्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के अनुरूप सरकारी सेवा में अवसर देना है। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में इस योजना के तहत 181 खिलाड़ियों को विभिन्न स्तरों पर सरकारी नौकरियां दी गई हैं। इनमें 86 महिला और 95 पुरुष खिलाड़ी शामिल हैं। यह आंकड़ा खेलों में उपलब्धि हासिल करने वाली महिलाओं की भागीदारी को भी दर्शाता है। योजना के तहत निर्धारित नियमों के अनुसार डीएसपी, दरोगा, पंचायती राज पदाधिकारी और अन्य उपयुक्त पदों पर सीधी नियुक्ति के अवसर दिए जाते हैं। इससे खिलाड़ियों को खेल उपलब्धियों के साथ रोजगार और आर्थिक स्थिरता हासिल करने में मदद मिल सकती है।
प्रशिक्षण और आर्थिक सहायता से आगे बढ़ेंगी महिला खिलाड़ी
खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए बिहार में ‘प्रेरणा’, ‘सक्षम’ और ‘उत्कर्ष’ जैसी योजनाओं के माध्यम से आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने की पहल भी की जा रही है। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण सुविधाओं, परिवार के सहयोग, उचित संसाधनों और रोजगार के अवसरों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अंजलि कुमारी और श्यामा रानी की कहानियां इस बात को रेखांकित करती हैं कि अनुकूल माहौल मिलने पर बेटियां खेलों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकती हैं। नवरात्रि के अवसर पर इन खिलाड़ियों की उपलब्धियां महिला सशक्तीकरण के उस पहलू को सामने लाती हैं, जिसमें बेटियां सामाजिक चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लिए नई संभावनाएं तैयार कर रही हैं।


















