रांचीः हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर हिंदी की उपभाषा मगही-भोजपुरी बोलने वालो को बलात्कारी बताए जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे हिंदी भाषियों का अपमान बताया है. रधुवर दास ने कहा है कि झारखंड की पचास फीसदी आबादी हिंदी बोलती है, जबकि मात्र चार फीसदी आबादी ही उर्दू बोलती है. यदि भोजपुरी से झारखंड का बिहारीकरण हो रहा है तो क्या उर्दू से झारखंड का इस्लामीकरण होगा?
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जबकि भारतीय जनता पार्टी के विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि पंथ-मजहब के आधार पर भाषा को बांटना उचित नहीं है। मगही-भोजपुरी भाषा से नफरत और पाकिस्तानी भाषा उर्दू से प्यार कैसा है? यह मुख्यमंत्री जी स्पष्ट करें। हेमन्त सोरेन धर्म से धर्म और भाषा को भाषा से लड़ाना चाहते है। भाजपा इसकी घोर निंदा करती है। भाषा के आधार पर किसी को बलात्कारी, दुष्कर्मी बताना असंवैधानिक है। नियोजन नीति में मैथली, अंगिका, भोजपुरी व मगही को तुष्टिकरण के तहत हटा कर मुख्यमंत्री ने हिंदी भाषा को अपमानित करने का काम किया है.
हिंदी की उपभाषा मगही-भोजपुरी बोलने वालों को बलात्कारी बताना हिंदी भाषियों का अपमान- भाजपा
विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि हेमन्त सोरेन ने झारखंड के जनजातीय, आदिवासी- मूलवासी, हिंदीवासियों की भावनाओं को आहत किया है। मुख्यमंत्री को बताना चाहिए कि मगही-भोजपुरी भाषा का प्रयोग करने वाले विधायक मिथलेश ठाकुर, सुदिव्य कुमार, उमाशंकर अकेला, अम्बा प्रसाद, कुमार जयमंगल, बन्ना गुप्ता, पूर्णिमा नीरज सिंह, बदल पत्रलेख, दीपिका पांडेय जी के बारे उनका क्या ख्याल है? यह सरकार 1993 में नरसिम्हा सरकार में झारखंड आंदोलन बेचने वालो की सरकार है, हेमन्त सोरेन वैसे दलों के साथ सरकार चला रहे हैं, जिन्होने झारखंड आंदोलन का विरोध किया था। हेमन्त सोरेन हिन्दू का विरोध करते-करते हिंदी के विरोध में उतर आए हैं. हेमन्त सोरेन प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.
भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करने का विरोध
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