रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र को शुरू हुए डेढ़ महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक कई छात्रों को पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल पाई हैं। इससे न केवल बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि कुछ स्कूलों में तो शिक्षण कार्य पूरी तरह से ठप पड़ा है। ऐसे में 22 मई से शुरू होने वाली गर्मी की छुट्टियों से पहले सिलेबस पूरा करना लगभग असंभव दिख रहा है।
राज्य के अधिकांश सरकारी स्कूलों में सरकार की ओर से मिलने वाली नई किताबों की आपूर्ति नहीं हो सकी है। कई स्कूलों ने पुरानी किताबों को इकट्ठा कर ‘बुक बैंक’ की व्यवस्था जरूर की है, लेकिन इससे भी केवल कुछ बच्चों की जरूरतें पूरी हो पा रही हैं। कई छात्र-छात्राएं अब भी आधे-अधूरे किताबों के सहारे या बिना किताब के ही स्कूल आ-जा रहे हैं।
कुछ स्कूलों में शिक्षक और प्रधानाध्यापक मिलकर वैकल्पिक व्यवस्था कर रहे हैं, जैसे कि पिछले वर्षों की किताबों का पुन: वितरण, लेकिन यह केवल एक अस्थायी समाधान है। आठवीं कक्षा के छात्रों से बातचीत में यह सामने आया कि कुछ को सभी विषयों की किताबें मिल गई हैं, जबकि अन्य को केवल आंशिक या पुरानी किताबें दी गई हैं।
मुख्य सवाल यह है कि जब बच्चों का नामांकन और क्लास की शुरुआत समय पर हो चुकी है, तो फिर किताबों का वितरण समय पर क्यों नहीं हो पा रहा? यह स्थिति न केवल सरकारी शिक्षा व्यवस्था की खामियों को उजागर करती है, बल्कि छात्रों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
सरकार को चाहिए कि किताबों की छपाई, वितरण और निगरानी की प्रक्रिया को समयबद्ध और पारदर्शी बनाया जाए, ताकि अगले सत्र में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।


