Booty Land Case: रांची हाईकोर्ट ने 67 साल पुराने जमीन सौदे को ठहराया अवैध, मुंजाल परिवार को बड़ा झटका

रांची हाईकोर्ट ने बूटी की 2.90 एकड़ आदिवासी जमीन से जुड़े 67 साल पुराने सौदे को अवैध करार दिया। कोर्ट ने मुंजाल परिवार की याचिकाएं खारिज कीं।


Booty Land Case रांची: Jharkhand High Court ने बूटी स्थित 2.90 एकड़ जमीन विवाद मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 67 साल पुराने जमीन सौदे की बुनियाद को अवैध ठहरा दिया है। न्यायमूर्ति Justice Deepak Roshan की अदालत ने मुंजाल परिवार की दो रिट याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम यानी सीएनटी एक्ट का मूल उद्देश्य आदिवासी जमीन की सुरक्षा करना है और इसके विपरीत दिया गया कोई भी आदेश कानूनन मान्य नहीं माना जा सकता।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी दावे की नींव ही अवैध हो, तो उस पर खड़ी पूरी संरचना स्वतः गिर जाती है। इसी आधार पर कोर्ट ने 1959 में हुई जमीन बिक्री की अनुमति को शुरू से ही शून्य और अधिकार क्षेत्र से बाहर करार दिया।

Booty Land Case:1959 के आवेदन को अदालत ने माना कानून के खिलाफ

सुनवाई के दौरान अदालत ने वर्ष 1959 में तत्कालीन उपायुक्त के समक्ष दायर उस आवेदन की विस्तार से जांच की, जिसके आधार पर जमीन बिक्री की अनुमति दी गई थी। आवेदन में कहा गया था कि कुछ धान की जमीन गिरवी पड़ी हुई है, जिसे छुड़ाने और बैल खरीदने के लिए जमीन बेचने की आवश्यकता है।

कोर्ट ने कहा कि सीएनटी एक्ट की धारा 49 के तहत आदिवासी जमीन के हस्तांतरण की अनुमति केवल विशेष और वैध उद्देश्यों के लिए ही दी जा सकती है। बैल खरीदना या गिरवी छुड़ाना ऐसा उद्देश्य नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर आदिवासी जमीन बेची जाए।

अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन उपायुक्त द्वारा दिया गया आदेश कानून की भावना और सीएनटी एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था। इसलिए उस आदेश के आधार पर आगे तैयार किया गया पूरा दावा भी कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं रह जाता।


Key Highlights

  • रांची हाईकोर्ट ने 67 साल पुराने जमीन सौदे को अवैध ठहराया

  • बूटी की 2.90 एकड़ जमीन विवाद में मुंजाल परिवार की याचिकाएं खारिज

  • कोर्ट ने कहा, सीएनटी एक्ट का उद्देश्य आदिवासी जमीन की सुरक्षा

  • बैल खरीदने और गिरवी छुड़ाने को जमीन बिक्री का वैध आधार नहीं माना

  • पाहन परिवार के कब्जे और राजस्व रिकॉर्ड को अदालत ने महत्वपूर्ण माना


Booty Land Case:बूटी की 2.90 एकड़ जमीन को लेकर चल रहा था विवाद

यह पूरा मामला रांची के बूटी क्षेत्र स्थित खाता संख्या 79 के प्लॉट संख्या 1947, 1948 और 1949 की कुल 2.90 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है। मुंजाल परिवार का दावा था कि उनके पूर्वजों ने यह जमीन 2 दिसंबर 1959 को विधिवत तरीके से खरीदी थी।

परिवार की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि पूर्व में कई न्यायिक और राजस्व संबंधी आदेश उनके पक्ष में रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार और पाहन परिवार ने अदालत को बताया कि जमीन मूल रूप से आदिवासी रैयत बिप्ता पाहन के नाम दर्ज थी।

सरकार की ओर से पेश राजस्व अभिलेखों और स्थानीय जांच रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जमीन पर आज भी पाहन परिवार का कब्जा बना हुआ है।

Booty Land Case:सीएनटी एक्ट की भावना पर हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम आदिवासी जमीन की सुरक्षा के लिए बनाया गया विशेष कानून है। इस कानून का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की जमीन को गैरकानूनी हस्तांतरण से बचाना है।

कोर्ट ने कहा कि यदि किसी आदेश की मूल अनुमति ही अवैध हो, तो उसके आधार पर बने बाद के सभी दावे स्वतः समाप्त हो जाते हैं। अदालत की इस टिप्पणी को झारखंड में आदिवासी जमीन संरक्षण से जुड़े मामलों में बेहद अहम माना जा रहा है।

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