सीयूजे में “व्यापार-प्रतिस्पर्धा व रणनीतिक मूल्य: ट्रम्प का सीमा शुल्क संबंधी निर्णय का भारत-अमेरिका संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव” पर विशेष व्याख्यान

रांची. झारखंड केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) के अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग द्वारा आयोजित विशेष व्याख्यान की श्रृंखला में भू-राजनीति एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की विश्लेषक डॉ श्वेता कुमारी ने “व्यापार-प्रतिस्पर्धा व रणनीतिक मूल्य: ट्रम्प का सीमा शुल्क संबंधी निर्णय का भारत-अमेरिका संबंधों पर महत्वपूर्ण प्रभाव” विषय पर अपनी बात रखी। इंटरनेशनल रिलेशन रिसर्च क्लब के विशेष आग्रह पर मुख्य वक्ता के तौर पर शामिल हुई डॉ गुप्ता ने ट्रम्प प्रशासन के सीमा-शुल्क संबंधी हालिया फैसलों के विभिन्न आयामों को सामने रखते हुए, इसका भारत-अमेरिका के रणनीतिक साझेदारी समेत विश्व-व्यवस्था पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभावों का उल्लेख किया।

उन्होंने ट्रम्प के पहले कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि “जिस आर्थिक राष्ट्रवाद की झलक उनके पहले कार्यकाल में दिखा था उसी का वृहद स्वरूप सीमा-शुल्क, प्रवासियों के प्रति असंतोष एवं अन्य अतिशयोक्तिपूर्ण फैसलों के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि कारण चाहे अमेरिका में घरेलू राजनीति में दक्षिणपंथियों का समर्थन हासिल करना हो, उद्योगों का नए सिरे से अमेरिका में विस्तार कर नई नौकरियाँ पैदा करना हो या फिर अमेरिका को संभावित नई विश्व-व्यवस्था के लिए तैयार करना हो, इन नई नीतियों का विश्व अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ना तय है।”

विभागाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार गुप्ता ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया। व्याख्यान के दौरान अंतर्राष्ट्रीय संबंध विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ बिभूति भूषण बिस्वास, डॉ अपर्णा, डॉ सुभाष कुमार बैठा, डॉ अशोक निमेष, राजनीति विज्ञान के सहायक प्राध्यापक संजय कुमार अग्रवाल, दोनों विभागों के संयुक्त विभागाध्यक्ष डॉ आलोक कुमार गुप्ता समेत सभी छात्रों और शोधार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की संचालक बिन्नी कुमारी ने अंत में विभाग की ओर से डॉ अपर्णा को अतिथि वक्ता का धन्यवाद ज्ञापन करने के लिए आमंत्रित किया जिसके उपरांत कार्यक्रम की औपचारिक समाप्ति की घोषणा हुई।

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