केंद्र ने बताया पद पर बने रहना असंवैधानिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन
रांची: झारखंड सरकार और केंद्र सरकार के बीच डीजीपी अनुराग गुप्ता को लेकर टकराव बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने तीसरी बार पत्र भेजकर झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि अनुराग गुप्ता को पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पद से तत्काल हटाया जाए। केंद्र ने गुप्ता को दिए गए सेवा विस्तार को अस्वीकार करते हुए इसे असंवैधानिक बताया है और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करार दिया है।
केंद्र सरकार के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि अनुराग गुप्ता 30 अप्रैल को ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं और उनके सेवा विस्तार का कोई वैधानिक आधार नहीं है। ज्ञात हो कि राज्य सरकार ने 8 जनवरी को डीजीपी नियुक्ति के लिए नया नियम बनाया था, जिसके आधार पर 2 फरवरी से अनुराग गुप्ता को दो वर्षों का सेवा विस्तार दिया गया था।
विधि व्यवस्था की समीक्षा बैठक स्थगित
इस विवाद के बीच मंगलवार को राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर प्रस्तावित समीक्षा बैठक को स्थगित कर दिया गया। यह बैठक दोपहर 2 बजे प्रोजेक्ट भवन में होनी थी। इसमें अपराध, साइबर क्राइम, हथियारों की तस्करी, घुसपैठ, महिलाओं और दलितों पर अत्याचार, भूमि विवाद, मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक तनाव और अवैध खनन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी।
बैठक में मुख्य सचिव अलका तिवारी, गृह सचिव वंदना डाडेल, डीजीपी अनुराग गुप्ता सहित तमाम वरिष्ठ अधिकारी और सभी जिलों के डीसी, एसपी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल होने वाले थे। लेकिन केंद्र के पत्र आने के बाद पूरे दिन मुख्य सचिव और गृह सचिव कार्यालय में मंथन चलता रहा।
पत्र की आधिकारिक पुष्टि को लेकर वरिष्ठ अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। जब गृह सचिव वंदना डाडेल से इस विषय पर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगी। आप मुख्य सचिव से बात करें।” वहीं, मुख्य सचिव अलका तिवारी से कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ।
अब यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार केंद्र के निर्देशों पर क्या रुख अपनाती है और डीजीपी पद को लेकर उत्पन्न संवैधानिक संकट का समाधान किस दिशा में जाता है।


















