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बेलाऊर में जुटने लगे चैती छठव्रती, बड़ी संख्या में मुसलमान भी करते हैं छठ

आरा : भोजपुर के विश्व प्रसिद्ध बेलाऊर छठ मंदिर पर भगवान भास्कर को अर्घ्य देने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचने लगे हैं। बेलाऊर पहुंचकर सबसे पहले लोकगीत के साथ भगवान भास्कर को याद करते हुए उनकी परिक्रमा की जाती है। इसके बाद श्रद्धालु छठ अनुष्ठान परंपरागत रूप से शुरू करते हैं। आज खरना प्रसाद खाकर शाम को चंद्रास्त के समय से श्रद्धालु अगले 36 घंटे का निर्जला व्रत धारण करेंगे एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ उनका यह अनुष्ठान समाप्त हो जाएगा।

‘बेलाऊर में देश के अलग-अलग हिस्सों से वैसे श्रद्धालु आते हैं जिनकी कोई मन्नत यहां से पूरी होती है’

बेलाऊर में देश के अलग-अलग हिस्सों से वैसे श्रद्धालु आते हैं जिनकी कोई मन्नत यहां से पूरी होती है जिसे उतारने के लिए वे यहां पर आते हैं। मनोकामना मांगने की भी एक अनूठी परंपरा है जिसके बारे में यहां के पुजारी ने बताया कि अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य पड़ने के समय यहां पर मन्नत का सिक्का श्रद्धालुओं को दिया जाता है और श्रद्धालु उसे अपनी मन्नत पूरी होने तक अपने पास श्रद्धा के साथ रखते हैं। जैसे ही उनके मनोकामना पूरी होती है वह वापस इस सिक्के को भगवान को वापस कर देते हैं।

‘यदि पूरी श्रद्धा से मन्नत मांगी जाए तो वह जरूर पूरी होती है’

लोगों की ऐसी मान्यता है कि यहां पर यदि पूरी श्रद्धा से मन्नत मांगी जाए तो वह जरूर पूरी होती है। कई श्रद्धालुओं का कहना था कि उनकी मन्नत एक से डेढ़ साल के ही भीतर पूरी हो गई और तब से यहां छठ कर रहे हैं। एक श्रद्धालु ने बताया कि वह मन्नत आज से 15 साल पहले मांग कर गए थे मन्नत पूरी हो गई। मगर किसी कारण नहीं हो आ सके थे लेकिन आज पूरे परिवार के साथ आए हैं। ताकि यहां छठ व्रत का अनुष्ठान कर सकें और मन्नत का सिक्का भगवान भास्कर को लौटा सके।

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‘किसी की शादी तो किसी की नौकरी और किसी को बेटे की कामना होती है’

किसी की शादी तो किसी की नौकरी और किसी को बेटे की कामना होती है। लेकिन जिनकी भी कामना होती है उसे यहां आशीर्वाद भी मिलता है, ऐसी यहां के विषय में मान्यता है। मनोकामना पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां एक बार जरूर आते हैं। यहां ऐसे लोग भी आते हैं जिनकी भगवान भास्कर में अटूट श्रद्धा है चाहे नई उम्र के हो या फिर वृद्ध या फिर चाहे वह किसी धर्म और जाति के हो सभी की मनोकामना यहां पूरी होती है। मंदिर के पुजारी बताते हैं कि यहां हर संप्रदाय के लोग एक साथ छठ व्रत करते हैं और भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते हैं। भोजपुर का बेलाऊर मंदिर लोक आस्था के साथ ही गंगा जमुना तहजीब के लिए एक मिशाल पेश करता है और यह बात यहां पहुंचने के बाद साबित भी होती है।

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नेहा गुप्ता की रिपोर्ट

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