धनबाद : धनबाद जिले में चमकी बुखार नहीं है. कुछ लोग इसे चमकी बुखार नाम देकर अफवाह फैला रहे हैं. विभागीय जांच में बच्चों में बुखार वायरल संक्रमण के कारण के कारण फैल रहा है. इसे मस्तिष्क ज्वर कहा जाता है. स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में सितंबर और अक्टूबर महीने में 113 बच्चों की जांच की है. इसमें 11 बच्चे मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित पाए गए. समय पर इलाज नहीं होने के कारण इसमें धनबाद के तीन और गिरिडीह के एक बच्चे की मौत हो गई. फिलहाल बच्चों की निगरानी की जा रही है. सभी बातें सिविल सर्जन डा. श्याम किशोर कांत ने बुधवार को प्रेस वार्ता के दौरान कही.

जिले में फैल रहे बच्चों में बुखार के मामलों पर उन्होंने कहा कि एसएनएमएमसीएच प्रबंधन सहयोग नहीं कर रहा है. प्रबंधन को कई बार पत्राचार किया गया और निर्देश भी दिए गए कि यहां बुखार से पीड़ित आने वाले बच्चों की जांच की जाए, ताकि यह पता चल पाए कि मस्तिष्क ज्वर किस कारण से हो रहा है. लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक इन बच्चों के लिए मलेरिया, डेंगू अथवा चिकनगुनिया की जांच शुरू नहीं की गई है. हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने एक-दो दिन में जांच शुरू करने का आश्वासन दिया है. प्रेस कान्फ्रेंस में जिला महामारी रोग नियंत्रण विभाग के पदाधिकारी डा. राजकुमार सिंह, डा. सुधा सिंह मौजूद थे.

चमकी बुखार बिहार के मुजफ्फरपुर में देखा गया था. चमकी बुखार असल में एक बच्चे से दूसरे बच्चे में तेजी से फैलता है. जिसे चिकित्सकीय भाषा में कन्वर्शन कहते हैं. लेकिन धनबाद में जो बच्चे बुखार से पीड़ित पाए गए. उन्हें कन्वर्शन नहीं देखा गया है. तमाम लक्ष्मण के बाद यह मस्तिष्क ज्वर माना गया है. हालांकि यह मस्तिष्क ज्वर किस कारण से हो रही है, जांच के बाद इसकी जानकारी दी जाएगी. कुछ बच्चों में जैपनीज एन्सेफेलाइटिस के लक्षण दिख रहे हैं. इसके लिए मुख्यालय से भी किट की मांग की गई हैं. यहां आने वाले बच्चों की कोरोना जांच की गई, जिसमें सभी निगेटिव मिले. फिलहाल अस्पताल में चार बच्चे भर्ती हैं.
रिपोर्ट : राजकुमार जायसवाल
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