रांची: झारखण्ड में जलस्रोत में अतिक्रमण के मामले में जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अदालत गरीब के साथ है, लेकिन उनके पुनर्वास का उपाय सरकार के पास नहीं है। अदालत रांची को बचाना चाहती है, लेकिन कोर्ट निर्मम नहीं हो सकती है। अतिक्रमण हटाने से पहले पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। न्याय सबके लिए समान होना चाहिए। प्रशासन को अतिक्रमण की मौबत ही नही आने देनी चाहिए।
गरीबों को नोटिस के बाद थोड़ा ज्यादा समय देना चाहिए ताकि वो अपनी व्यवस्था कर सकें। अदालत ने मानसून तक अतिक्रमण हटाने पर रोक लगा दी है और इसकी मियाद 31 अक्टूबर तक होगी। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने जलाशयों के चारो ओर ग्रीन हेज बाउन्ड्री बनाने का आदेश दिया है ।
अदालत ने कहा कि कोर्ट राज्य और अपने शहर को बचना चाहती है। इसलिए अतिक्रमण को हर हाल में हटाना होगा। लेकिन अमीर गरीब के खिलाफ समान रूप से कार्यवाही करनी होगी। सिर्फ गरीब को हटाना सही नहीं है। इस दौरान नगर विकास सचिव ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए पीएम आवास योजना के तहत मकान दिए जाने की योजना है।
कोर्ट ने अरगोड़ा के प्लाट नंबर 430 और खाता नंबर 205 के सभी राजस्व दस्तावेज मांगा। लेकिन डीसी इस सुनवाई में देर से शामिल हुए जिस पर कोर्ट ने नाराज़गी जताई और कहा की गलत जानकारी देने पर अवमानना का मामला चलाएंगे।







