छठी JPSC परीक्षा की मेरिट लिस्ट में फिर बदलाव की संभावना है। रिजर्व अभ्यर्थियों के माइग्रेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट में 11 अगस्त को सुनवाई होगी।
6th JPSC Merit List रांची: छठी जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा की मेरिट लिस्ट में एक बार फिर संशोधन की संभावना बढ़ गई है। रिजर्व कोटि से मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में चयनित अधिकारियों ने कैडर आवंटन से जुड़े माइग्रेशन के मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले पर 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। याचिकाकर्ताओं ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
6th JPSC Merit List: क्या है रिजर्व कोटि के अभ्यर्थियों का विवाद
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जिन अभ्यर्थियों का चयन उनकी मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में हुआ, उन्हें अनारक्षित श्रेणी में जाने के कारण बेहतर कैडर नहीं मिल सका। उनका तर्क है कि यदि उन्हें उनकी मूल आरक्षित श्रेणी में रहने का विकल्प मिलता, तो अधिक अंकों के आधार पर उन्हें बेहतर कैडर आवंटित हो सकता था।
अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनसे कम अंक हासिल करने वाले कुछ अभ्यर्थियों को प्रशासनिक और पुलिस सेवा का कैडर मिला है। ऐसे में उनका दावा है कि मेरिट के आधार पर अनारक्षित श्रेणी में चयनित होने के बावजूद उन्हें आरक्षित श्रेणी में माइग्रेट होकर सेवा आवंटन का अवसर मिलना चाहिए था।
Key Highlights
छठी जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की मेरिट लिस्ट में फिर संशोधन की संभावना बढ़ी।
रिजर्व कोटि से अनारक्षित श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
11 अगस्त को माइग्रेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होगी।
याचिकाकर्ताओं ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
अभ्यर्थियों ने यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रमेश राम मामले में संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया है।
6th JPSC Merit List:यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रमेश राम फैसले का दिया हवाला
माइग्रेशन के पक्ष में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रमेश राम मामले में दिए गए संविधान पीठ के फैसले का हवाला दिया है। 7 मई 2010 को पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा था कि आरक्षित श्रेणी के ऐसे अभ्यर्थी, जो अपनी मेरिट के आधार पर सामान्य श्रेणी में चयनित हुए हैं, सेवा आवंटन के लिए अपनी आरक्षित श्रेणी में जा सकते हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इसी सिद्धांत के आधार पर छठी जेपीएससी में भी उन्हें अपनी आरक्षित श्रेणी के तहत कैडर आवंटन का अवसर मिलना चाहिए था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से यह तय हो सकता है कि इस मामले में मेरिट लिस्ट और सेवा आवंटन की प्रक्रिया में दोबारा बदलाव की जरूरत पड़ेगी या नहीं।
6th JPSC Merit List:पहले भी विवादों में रही है छठी JPSC परीक्षा
छठी जेपीएससी परीक्षा शुरू से ही विवादों में रही है। परीक्षा के अंतिम परिणाम के बाद तैयार की गई 326 सफल अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट को झारखंड हाईकोर्ट की एकल पीठ ने रद्द कर दिया था। इसके खिलाफ अपील दायर की गई, लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भी एकल पीठ के फैसले को बरकरार रखा।
अब रिजर्व कोटि से अनारक्षित श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों के माइग्रेशन के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। यदि सुप्रीम कोर्ट याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देता है, तो छठी जेपीएससी की मेरिट लिस्ट और कैडर आवंटन में फिर से बदलाव की स्थिति बन सकती है।
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