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Jharkhand Liquor Case: शराब प्रकरण में ACB की जांच तेज, छत्तीसगढ़ मॉडल पर अफसरों से पूछताछ; चार को समन के बाद भी नहीं पहुंचे

 झारखंड शराब प्रकरण में ACB ने तत्कालीन उत्पाद अधिकारियों से पूछताछ की। छत्तीसगढ़ मॉडल की भूमिका और डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन जारी है।


Jharkhand Liquor Case रांची: झारखंड शराब प्रकरण की जांच कर रहे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अब तक दर्ज बयानों की जांच तेज कर दी है। सोमवार को ACB के समन पर तत्कालीन उत्पाद आयुक्त मुख्यालय राकेश कुमार और तत्कालीन सहायक उत्पाद आयुक्त मुख्यालय मनोज कुमार रांची स्थित ACB कार्यालय पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने मामले में अपना विस्तृत बयान दर्ज कराया।

पूछताछ के दौरान छत्तीसगढ़ मॉडल को झारखंड में लागू करने की प्रक्रिया और इसमें संबंधित अधिकारियों व अन्य लोगों की भूमिका से जुड़े कई बिंदुओं पर जानकारी ली गयी। अब ACB दोनों अधिकारियों के बयानों का मिलान उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य गवाहों के बयानों से कर रही है।

Jharkhand Liquor Case: चार निदेशकों को समन, कोई नहीं पहुंचा

ACB ने फ्लोरेंस हेल्थ केयर एंड रिसर्च सेंटर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक जतीन सहाय तथा एटूजेड इंफ्रा सर्विसेज लिमिटेड के निदेशकों अरुण गौर, मनोज तिवारी और विकास अग्रवाल को 10 अगस्त को बयान दर्ज कराने के लिए समन किया था। हालांकि, चारों में से कोई भी ACB कार्यालय नहीं पहुंचा।

जांच एजेंसी अब मामले से जुड़े दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन कर रही है। इसी क्रम में तत्कालीन सहायक प्रशाखा पदाधिकारी उत्पाद विभाग मनोज कुमार वर्णवाल, मंगल प्रसाद सहाय और तत्कालीन उत्पाद निरीक्षक मिनाश्री प्रसाद को 11 अगस्त को पूछताछ और बयान दर्ज कराने के लिए समन किया गया है।


Key Highlights

  • झारखंड शराब प्रकरण में ACB ने तत्कालीन उत्पाद अधिकारियों के बयान दर्ज किये।

  • छत्तीसगढ़ मॉडल को झारखंड में लागू करने की प्रक्रिया पर पूछताछ हुई।

  • चार निजी कंपनी निदेशकों को समन के बावजूद ACB कार्यालय नहीं पहुंचे।

  • 11 अगस्त को तीन तत्कालीन उत्पाद अधिकारियों से पूछताछ होगी।

  • ACB ने संपत्ति और चुनावी हलफनामे से जुड़े मामले में शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार का बयान भी दर्ज किया।


Jharkhand Liquor Case: सांसद और विधायक की संपत्ति से जुड़ी शिकायत में भी बयान

इधर, ACB ने सोमवार को शिकायतकर्ता हिमांशु कुमार को भी तलब कर उनका बयान दर्ज किया। यह मामला आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी और भाजपा विधायक नवीन जायसवाल की संपत्ति तथा चुनावी हलफनामे से जुड़ा है। हिमांशु कुमार ने दोनों जनप्रतिनिधियों के खिलाफ ACB कार्यालय में लिखित शिकायत की थी।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दोनों जनप्रतिनिधियों ने निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल चुनावी हलफनामे में संपत्ति से संबंधित गलत जानकारी दी है। उनका दावा है कि चंद्रप्रकाश चौधरी ने बड़गाईं स्थित अपने आवास की जमीन और मकान का मूल्य वास्तविक कीमत से काफी कम दर्शाया है। इसी तरह का आरोप उन्होंने विधायक नवीन जायसवाल पर भी लगाया है।

शिकायत में नवीन जायसवाल के हरमू स्थित आवास के आवंटन पर भी सवाल उठाये गये हैं। हिमांशु कुमार का आरोप है कि गलत जानकारी देकर हरमू हाउसिंग बोर्ड से मकान आवंटित कराया गया। उनका कहना है कि नियम के अनुसार जिन आवेदकों का अपना मकान हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनी से सात किलोमीटर के दायरे में पहले से मौजूद है, उन्हें बोर्ड की ओर से जमीन या मकान आवंटित नहीं किया जा सकता। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि नवीन जायसवाल का अपना मकान इस दायरे में है और पूरे मामले की जांच की मांग की है।

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