नालंदा : बिहारशरीफ के एक मोहल्ले से से शुरू हुआ एक सपना आज एक आंदोलन बन गया है। आशुतोष कश्यप एक साधारण से परिवार से आने वाले युवा ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और समर्पण के बल पर एक ऐसी संस्था की स्थापना की है, जो समाज के हर वर्ग को सशक्त बना रही है। शहर के मोगल कुआं के रहने वाले आशुतोष कश्यप ने जब इसकी शुरुआत की थी। तब वह अकेले थे फिलहाल उनकी टीम में 30 सदस्य हैं जिनमें छह सदस्य ऐसे हैं जो पूरी तरह से एक्टिव हैं।
हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन की स्थापना आशुतोष ने वर्ष 2021 में की थी। कोविड-19 महामारी के दौरान जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए शुरू की गई यह पहल आज शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फाउंडेशन के माध्यम से आशुतोष और उनकी टीम ने कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख हैं।फाउंडेशन ने कई स्कूलों में छात्रों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की है। इसके साथ ही, वे गरीब परिवारों के बच्चों को भी शिक्षा के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं। शहर के महादलित बस्तियों में जाकर फाउंडेशन के सदस्य बच्चों को रविवार को ट्यूशन पढ़ाते हैं। इसके अलावा अलग-अलग इवेंट भी बच्चों के बीच कराया जाता है। बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों का बोध भी कराया जा रहा है।
फाउंडेशन ने पर्यावरण संरक्षण के लिए कई अभियान चलाए हैं। इनमें वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त अभियान और जल संरक्षण शामिल हैं। गर्मियों के मौसम में पशु पक्षियों के लिए दाना पानी की व्यवस्था फाउंडेशन के सदस्यों के द्वारा कराई गई है।फाउंडेशन ने स्लम वस्तियों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए हैं, जहां लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य जांच और दवाएं उपलब्ध कराई गई हैं। फाउंडेशन ने सामाजिक उत्थान के लिए कई कार्यक्रम चलाए हैं। इनमें महिला सशक्तीकरण, दिव्यांग सहायता और गरीबों के लिए रोजगार सृजन शामिल हैं। आशुतोष के नेतृत्व में हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन की टीम ने कई चुनौतियों का सामना किया है। लेकिन उनकी दृढ़ता और समर्पण ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। आज, फाउंडेशन के कार्य जिले भर में सराहना प्राप्त कर रहे हैं।
फाउंडेशन के संस्थापक आशुतोष कश्यप ने बताया कि बचपन से ही सामाजिक कार्यों में रुचि रही है। कोरोना के समय जो स्थिति देखी उसके बाद शहर के स्लम बस्तियों में गया। जहां बच्चों की स्थिति काफी दयनीय थी। पहले सभी बस्तियों में जाकर बच्चों और उनके अभिभावकों से मिला इसके बाद एक टीम खड़ी की , वर्तमान समय में बिहार शरीफ के पांच स्थलों पर रविवार के दिन बच्चों को कल्चरल एक्टिविटी के साथ-साथ उन्हें पढ़ाया लिखाया जा रहा है। त्योहार के समय भी इन्हीं बस्तियों के बच्चों के साथ टीम के सदस्य पर्व को मनाते हैं। बच्चों के बीच कंपटीशन कराया जाता है। जो बच्चे अव्वल आते हैं। उन्हें पुरस्कृत भी किया जाता है। स्टडी मैटेरियल भी बच्चों को प्राप्त कराया जाता है। यह सारी व्यवस्थाएं फाउंडेशन के सदस्यों के द्वारा पॉकेट खर्च के बचाएं पैसों से किया जाता है। आगे हमारी योजना है कि जो लोग फुटपाथ पर अपनी जिंदगी गुजर-बसर रहे हैं। उन्हें मुफ्त में भोजन उपलब्ध कराया जाए।
फाउंडेशन से जुड़ी सदस्या उपासना भारतीय ने बताया कि सोशल मीडिया पर हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन के कार्य को देखकर वह प्रेरित हुई और इस फाउंडेशन से जुड़ गई। पिछले दो महीने से हर रविवार को स्लम बस्तियों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम करती है। वह खुद भी पीजी की पढ़ाई कर रही है। बिजली विभाग में कार्यरत सह हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन के सदस्य ने बताया कि जब भी समय मिलता है जरूरतमंद बच्चों को मदद करने के लिए पहुंच जाते हैं। ऐसे कार्य में सभी लोगों को रुचि लेना चाहिए जिससे ऐसे बच्चों का भविष्य उज्जवल हो सके।
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हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन से वर्तमान समय में 200 से अधिक बच्चे जुड़े हुए हैं। शहर के नईसराय, बैंक कॉलोनी, गौरक्षणी, बड़ी पहाड़ी राज ट्रांसपोर्ट के पास बच्चों को पढाने लिखाने का कार्य किया जा रहा है। हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन में आशुतोष कश्यप, विवेक चौरसिया, अभिषेक कुमार, अमन राज, जया शाह, भारती कुमारी, उपासना कुमारी, नीति राजपूत, सुबोध कुमार, यशस्वी, कीर्ति कुमारी, अमित सिंह, अमर प्रियदर्शी, सौरभ कुमार, अमित कुमार, बृजेश कुमार, सोनी कौशिक, धर्मवीर, मनीष और विवेक आदि लोग शामिल है।
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राजा कुमार की रिपोर्ट







