JPSC-JSSC Exam Scam: 2500+ अभ्यर्थियों के भविष्य पर हाईकोर्ट सख्त, CID जांच की रफ्तार पर उठाए सवाल

JPSC-JSSC Exam Scam, रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) से जुड़ी परीक्षा धांधली और भर्ती प्रक्रिया के मामले में राज्य सरकार ने मंगलवार को सीआईडी जांच की स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अदालत के समक्ष रखा गया। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद उसे दोबारा सील कर रिकॉर्ड पर रख लिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच से संबंधित इस रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच की गति को लेकर गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि मामला 2500 से अधिक अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में जांच केवल शुरू करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे लगातार प्रभावी गति से आगे बढ़ाना जरूरी है।

सरकार ने मांगा चार सप्ताह का समय

राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहितश्य रॉय और वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत के समक्ष दलील दी कि मामले में आपराधिक जांच अभी जारी है। इसलिए सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कम से कम चार सप्ताह का समय दिया जाए। सरकार की ओर से कहा गया कि जांच के पूरी तरह आगे बढ़ने से पहले विस्तृत जवाब दाखिल करना मुश्किल होगा। हालांकि, कोर्ट ने जांच की गति को लेकर अपनी चिंता स्पष्ट कर दी। अदालत ने सीलबंद रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए कहा कि शुरुआती दौर में जांच की रफ्तार काफी तेज थी, लेकिन बाद में इसमें कमी दिखाई दे रही है। कोर्ट ने गंभीर मामलों में जांच एजेंसियों से लगातार प्रभावी तरीके से काम करने की अपेक्षा जताई।

सभी नियुक्त अभ्यर्थियों को दोषी नहीं माना जा सकता

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की। अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता के आरोप और उसकी जांच अपनी जगह है, लेकिन केवल इन आरोपों के आधार पर नियुक्ति पाने वाले सभी अभ्यर्थियों को दोषी नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने संकेत दिया कि कई अभ्यर्थी पूरी तरह योग्य और वास्तविक हो सकते हैं, जबकि कुछ उम्मीदवार कथित अनियमितताओं से प्रभावित हुए होंगे। इसलिए प्रत्येक पहलू की जांच जरूरी है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उसका मुख्य फोकस उस सरकारी अधिसूचना की कानूनी वैधता पर है, जिसके जरिए भर्ती विज्ञापन रद्द होने के बाद नियुक्तियों पर असर पड़ा है। यानी कोर्ट इस चरण में मुख्य रूप से यह देख रहा है कि संबंधित अधिसूचना कानून के अनुरूप है या नहीं।

18 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की है। इस दिन W.P.(S) No. 6512/2026 सहित इससे जुड़े अन्य मामलों पर भी एक साथ सुनवाई होगी। अदालत ने कहा कि यदि अगली सुनवाई तक सरकार से आवश्यक निर्देश प्राप्त नहीं होते हैं, तो महाधिवक्ता कानून से जुड़े बिंदुओं पर अदालत की सहायता करेंगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंततः उसे उसी अधिसूचना की वैधता पर निर्णय करना है, जिसका असर 2500 से अधिक अभ्यर्थियों के करियर पर पड़ा है। वहीं, मामले में पहले से दी गई अंतरिम राहत अगले आदेश तक जारी रहेगी। अब सभी की नजर 18 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई और अदालत के रुख पर रहेगी।

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