Ramgarh Industrial Pollution Case: झारखंड उच्च न्यायालय ने रामगढ़ जिले में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिका का निपटारा करते हुए प्रदूषण की नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले में सुनवाई के बाद झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को कई अहम निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने पर्यावरणीय निगरानी को प्रभावी बनाए रखने पर जोर दिया है।
बिहार फाउंड्री और दयाल स्टील की नियमित जांच
अदालत ने कहा कि बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड और दयाल स्टील लिमिटेड के खिलाफ फिलहाल पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है। हालांकि, न्यायालय ने प्रदूषण की निगरानी व्यवस्था में कुछ कमियां होने की बात कही। इसी को ध्यान में रखते हुए खंडपीठ ने जेएसपीसीबी के हजारीबाग क्षेत्रीय पदाधिकारी को दोनों औद्योगिक इकाइयों का साल में कम से कम दो बार निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। इनमें कम से कम एक जांच बिना पूर्व सूचना के करनी होगी।
चिमनी के धुएं से लेकर प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों तक जांच
न्यायालय के निर्देश के अनुसार निरीक्षण के दौरान फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलने वाले धुएं और अन्य उत्सर्जन की स्थिति की जांच की जाएगी। इसके साथ ही औद्योगिक अपशिष्ट और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े उपकरणों की स्थिति तथा उनकी कार्यक्षमता भी देखी जाएगी। हर निरीक्षण के बाद हजारीबाग के क्षेत्रीय अधिकारी को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट जेएसपीसीबी के सदस्य सचिव को सौंपनी होगी। इससे निरीक्षण की प्रक्रिया को रिकॉर्ड में रखने और आगे की कार्रवाई की निगरानी में मदद मिलेगी।
48 घंटे तक मानक से अधिक प्रदूषण पर नोटिस
हाईकोर्ट ने दोनों औद्योगिक इकाइयों के सतत उत्सर्जन निगरानी सिस्टम को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के केंद्रीय सर्वर से लगातार जोड़े रखने का निर्देश दिया है। यदि किसी भी स्थिति में 48 घंटे से अधिक समय तक प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से ऊपर दर्ज होता है, तो संबंधित औद्योगिक इकाई को सात दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा। अदालत ने कहा कि पर्यावरण को होने वाला नुकसान किसी एक जिले या क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता। प्रदूषण का प्रभाव दूर-दराज के इलाकों और वहां रहने वाले लोगों तक भी पहुंच सकता है। इसलिए लगातार निगरानी और समय पर कार्रवाई जरूरी है।
पानी और दामोदर नदी के नमूनों की होगी दोबारा जांच
अदालत ने विवा इंटरनेशनल स्कूल के आसपास के पानी में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा निर्धारित मानकों से कुछ अधिक पाए जाने के मामले में भी निर्देश दिया है। तीन महीने के भीतर किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूनों की दोबारा जांच कराई जाएगी। इसके अलावा दामोदर नदी के पानी की भी जांच होगी। इसके लिए औद्योगिक क्षेत्र के ऊपरी और निचले हिस्से से पानी के नमूने लिए जाएंगे। यदि जांच में यह साबित होता है कि नदी में प्रदूषण का कारण औद्योगिक इकाइयां हैं, तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की कार्रवाई की जाएगी।
चार महीने में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अदालत के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करते हुए चार महीने के भीतर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के साथ न्यायालय ने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। अब निगरानी व्यवस्था, औद्योगिक इकाइयों के निरीक्षण और पानी के नमूनों की दोबारा जांच के जरिए पर्यावरणीय स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
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