
रांची: 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की सरकार ने जबरदस्त वापसी की है, और इसके कई प्रमुख कारण रहे हैं। प्रदेश में सत्ता के लिए की जा रही लड़ाई में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और इंडिया गठबंधन ने प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसकी सहयोगी आजसू को हार का सामना करना पड़ा। आइए जानते हैं इसके पीछे की प्रमुख वजहों को:

मैया सम्मान योजना:
हेमंत सोरेन सरकार का सबसे प्रभावी चुनावी वादा मैया सम्मान योजना था, जो खासतौर पर महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लाई गई थी। इस योजना के तहत, 18 से 49 वर्ष तक की महिलाओं को प्रतिमाह नकद राशि दी जाती रही, जिससे यह योजना महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो गई। चुनाव के दौरान सरकार ने इसे ₹1000 से बढ़ाकर ₹2500 करने का वादा भी किया। इससे महिलाओं के बीच एक सकारात्मक माहौल बना, और चुनावों में उनके वोटिंग प्रतिशत में इजाफा हुआ। बीजेपी ने इस योजना का विरोध किया और हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की, लेकिन इसका फायदा झामुमो को मिला।
बिजली बिल माफी और मुफ्त बिजली:
हेमंत सरकार ने मध्यम वर्ग के बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बिजली बिल माफी का ऐलान किया, जिससे किसानों और आम लोगों को तात्कालिक राहत मिली। इसके अलावा, 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना ने चुनावी माहौल को और मदद की। ये फैसले विशेषकर गरीब और मध्यवर्गीय वर्ग में पसंद किए गए।
कृषि लोन माफी:
हेमंत सोरेन सरकार ने किसानों के लिए ₹2 लाख तक के कृषि लोन माफ करने का ऐलान किया। झारखंड के 70% लोग कृषि पर निर्भर हैं, और खासकर आदिवासी समुदाय में इसका प्रभाव गहरा पड़ा। किसानों के बीच यह निर्णय काफी लोकप्रिय हुआ, जिसने सरकार को एक बड़ा समर्थन दिलाया।
आदिवासी समुदाय और भावनात्मक जुड़ाव:
बीजेपी द्वारा हेमंत सोरेन को जेल भेजे जाने की घटना ने आदिवासी समुदाय में एक गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा की। यह कदम बीजेपी के लिए उल्टा साबित हुआ, क्योंकि आदिवासियों में हेमंत सोरेन के प्रति समर्थन और मजबूत हुआ। सोरेन का जेल से बाहर आना और फिर मुख्यमंत्री के रूप में वापस लौटना आदिवासी समुदाय के लिए एक बड़ा संदेश था, जिससे उन्हें और अधिक समर्थन मिला।
विपक्ष की कमजोरी:
बीजेपी और एनडीए के भीतर आपसी सामंजस्य की कमी और सहयोगी दलों का कमजोर प्रदर्शन भी उनकी हार की एक वजह थी। खासतौर पर आजसू, जो बीजेपी का सहयोगी था, ने इस चुनाव में अपेक्षित सीटें नहीं जीतीं। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता जैसे अमर बावरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, और अन्य भी हार गए, जिससे पार्टी की स्थिति कमजोर हुई।
वृद्धावस्था पेंशन और अन्य सामाजिक योजनाएं:
हेमंत सरकार ने वृद्धावस्था पेंशन योजना और अन्य सामाजिक योजनाओं का विस्तार किया, जो निम्न आय वर्ग और वृद्ध जनसंख्या के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इन योजनाओं का प्रभाव चुनाव परिणामों पर साफ दिखा।
हेमंत सोरेन की सरकार की वापसी के पीछे उनकी नीतियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिसमें महिलाओं और आदिवासियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, बिजली और कृषि क्षेत्र में किए गए फैसले, और सामाजिक योजनाओं का प्रभाव था। विपक्ष की खामियों और बीजेपी की गलतियों ने भी उन्हें फायदा पहुंचाया। अंततः यह चुनाव हेमंत सोरेन और इंडिया गठबंधन की मजबूती को दर्शाता है, जबकि बीजेपी को आत्ममंथन की आवश्यकता है।
इस चुनाव ने यह स्पष्ट कर दिया कि चुनावी मुद्दों पर जनता की समझ और उनकी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का कितना बड़ा असर पड़ता है, जैसा कि मैया सम्मान योजना और आदिवासियों के बीच भावनात्मक जुड़ाव से देखा गया।




