झारखंड मंत्रालय में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन से नीति आयोग के सदस्य डॉ वीके पॉल और सीनियर एडवाइजर नीरज सिन्हा ने मुलाकात की.
बैठक में कोयला, ऊर्जा, रेलवे राजस्व, जल संसाधन, खनिज, ग्रामीण विकास, सिविल एविएशन, जनजातीय मामले, सड़क परिवहन और राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े विषयों सहित राज्य के विकास से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरोन ने झारखंड की समस्याओं और जरूरतों के अनुरुप नीति और कार्य योजना तैयार करने पर बल दिया और कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास को गति और नई दिशा मिलेगी. साथ ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की बेहतरी के लिए अलग से पॉलिसी बनाने और राज्य में खनिज से संबंधित प्रोजेक्ट्स को स्थापित करने पर जोर दिया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड एक ऐसा राज्य है जो खनिजों के मामले में काफी धनी है, विभिन्न प्रकार के खनिज बहुतायत में है. यहां से यह खनिज दूसरे राज्यों और विदेशों में भेजा जाता है, जहां उसकी प्रोसेसिंग की जाती है. यदि खनिज झारखंड में है तो उससे आधारित प्रोजेक्ट भी झारखंड में ही होना चाहिए. इससे राज्य के विकास के साथ राज्य की जनता का सर्वांगीण विकास होगा.
खनिज झारखंड का तो उस पर आधारित प्रोजेक्ट भी झारखंड में ही हो
मुख्यमंत्री ने खनन क्षेत्रों का सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक सर्वेक्षण किए जाने की मांग की और कहा कि खनन क्षेत्रों में कई तरह की समस्याएं है. यहां रहने वाले लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रसित है, खनन क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है. खनन क्षेत्रों का समय-समय पर सामाजिक-आर्थिक-शैक्षणिक सर्वे किया जाना चाहिए. इस सर्वे से पता चल सकेगा कि यहां रहने वाले लोगों के जीवन में क्या बदलाव आ रहा है. खनन क्षेत्र में रहने वालों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं, इसमें किसी प्रकार की दिक्कतें आ रही है, ताकि उसका निदान हो सके.
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति बाहुल्य राज्य है. लेकिन, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के शिकार है. नीतिय़ों का निर्माण इस प्रकार किया जाए कि अनुसूचित जाति और जनजातियों को आगे बढ़ने का मौका मिले.
इसके लिए जरुरी है कि अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जातियों के लिए अलग से पॉलिसी बनाई जाए, ताकि उनके विकास से जुड़ी योजनाओं का बेहतर तरीके से क्रियान्वित हो सके. खनिजों और उद्योगों के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण से सबसे ज्यादा किसान दुष्प्रभावित हो रहे है, हालात यह है कि खनिज क्षेत्र के किसान अब खेतिहर मजदूर बन गए. खनन से प्रभावित किसानों को सपोर्ट देने की दिशा में ठोस पहल होनी चाहिए.
राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में गुणवत्ता की कमी
मुख्यमंत्री ने पलामू पाइपलाइन इरिगेशन प्रोग्राम को लेकर भी सुझाव दिया. वहीं, राज्य में एनएचएआई द्वारा बनाए जा रहे राष्ट्रीय राजमार्गों में गुणवत्ता की कमी होने पर नाराजगी जताई और कहा कि सड़कों के बनाने में क्वालिटी का पूरा ख्याल रखा जाए. साथ ही, मनरेगा मजदूरी दर में भी बढ़ोतरी किए जाने की मांग की.
नीति आयोग ने कोरोना काल में राज्य सरकार के कार्यों की तारीफ की
नीति आयोग ने कोरोना काल में राज्य सरकार के किए गए कार्यों की तारीफ की. इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य डॉक्टर वीके पाल ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर संबंध और समन्वय बनाने की दिशा में नीति आयोग एक कड़ी का काम कर रहा है. झारखंड सरकार के साथ आज की बैठक काफी अहम रही.
जिसमें विकास से संबंधित मसलों पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ. इससे केंद्र और राज्य के बीच अगर कोई गतिरोध है तो उसके समाधान में सहूलियत होगी. उन्होंने कहा कि नीति आयोग जो भी पॉलिसी बनाती है, उसमें मंत्रालय के साथ विस्तार से विचार-विमर्श होता है. वहीं, सरकार की नीतियों और योजनाओं की मॉनिटरिंग तथा वैल्यूएशन के लिए भी कई इंस्टिट्यूट हैं, नीति आयोग का मुख्य उद्देश्य राज्यों को मजबूत बनाने के साथ नया भारत बनाना है.
नीति आयोग की बैठक में राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव, नीति आयोग के सदस्य डॉ वी के पाल, राज्य के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, विकास आयुक्त अरुण कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजीव अरुण एक्का, मुख्यमंत्री के सचिव विनय कुमार चौबे के अलावा नीति आयोग के सीनियर एडवाइजर नीरज सिन्हा, मिशन डायरेक्टर राकेश रंजन, जॉइंट सेक्रेटरी डेवलपमेंट एंड मॉनिटरिंग एंड इवैल्यूएशन ऑफिसर शैलेंद्र कुमार द्विवेदी, डिप्टी एडवाइजर डॉ त्यागराजू बी एम, प्रोफेशनल सिद्धे जी शिंदे, सीनियर एसोसिएट नमन अग्रवाल और विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव /प्रधान सचिव/ सचिव उपस्थित थे.
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