रांची: चुनाव के मौसम में हर एक नारा सियासी हलचल का कारण बन जाता है, और इस बार ‘बटे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे’ का नारा झारखंड में गर्मी ले आया है। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में पहले से गूंज रहे इस नारे ने अब झारखंड में भी कदम रख लिया है, और इसके साथ ही यहां की सियासत का पारा चढ़ गया है। रांची विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी सीपी सिंह के घर पर इस नारे वाली होर्डिंग लगने के बाद विवाद खड़ा हो गया है।

इस होर्डिंग पर लिखा है, “बटे तो कटेंगे, एक रहेंगे तो नेक रहेंगे,” और इसे लेकर भाजपा नेता सीपी सिंह ने अपने बयान में कहा कि यह नारा देश को बचाने के लिए है। उनका कहना था कि विभाजन के समय अगर लोग एक रहते तो पाकिस्तान कभी नहीं बनता। साथ ही, उन्होंने झारखंड की एक घटना का हवाला देते हुए कहा कि जब लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाते हैं, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीपी सिंह ने तुष्टीकरण की राजनीति पर हमला करते हुए कहा कि कुछ दल हिंदू वोट नहीं चाहते और समाज में दरार डालने की कोशिश कर रहे हैं।

लेकिन जब इस नारे पर झामुमो, कांग्रेस और राजत ने विरोध जताया तो मामला तूल पकड़ गया। झामुमो की महुआ मांजी ने इसे भाजपा का धर्म के नाम पर समाज को बांटने का एजेंडा करार दिया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जो हुआ, वह किसी से छुपा नहीं है, और अब भाजपा झारखंड में भी वही खेल खेल रही है। वहीं, राजत नेता कैलाश यादव ने इसे संविधान के खिलाफ बताते हुए कहा कि हमारे देश का धर्म निरपेक्ष संविधान हमें सबको मिलजुलकर रहने का अधिकार देता है, न कि किसी को विभाजन की बातें करने का।

यह नारा चुनाव के परिणामों पर क्या असर डालेगा, यह तो 23 नवंबर को परिणाम आने के बाद ही पता चलेगा। लेकिन इस नारे ने झारखंड चुनाव को एक नया मोड़ दिया है और राज्य की सियासत में तड़का जरूर लगा दिया है।
अब देखना यह है कि ‘बटे तो कटेंगे’ का यह नारा झारखंड के वोटरों पर कितना असर डालता है या फिर यह महज एक और राजनीतिक ड्रामा साबित होता है।


















