झरिया की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता: मास्टर प्लान 2025 पर समिति की बैठक में उठी ठोस मांगें

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झरिया की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता: मास्टर प्लान 2025 पर समिति की बैठक में उठी ठोस मांगें
झरिया की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता: मास्टर प्लान 2025 पर समिति की बैठक में उठी ठोस मांगें
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धनबाद: झरिया कोलफील्ड बचाव समिति की एक अहम बैठक शुक्रवार को देशबंधु सभागार में आयोजित की गई, जिसमें झरिया मास्टर प्लान 2025 के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष राजीव शर्मा ने की, जबकि संचालन रविशंकर केशरी एवं धन्यवाद ज्ञापन गोपाल अग्रवाल ने किया। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित बिंदुओं पर पुनर्विचार करने की मांग की गई और झरिया कोयलांचल की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप नए प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए।

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राजीव शर्मा ने कहा, “झरिया की आवाज़ को दबाया नहीं जा सकता। यह सिर्फ कोयले की खदान नहीं, यहाँ लोगों के सपने जल रहे हैं। अब यह आंदोलन सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि भविष्य की लड़ाई है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मास्टर प्लान के निर्माण में स्थानीय निवासियों की राय को सर्वोपरि रखा जाए और सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएं।

प्रमुख मांगें और प्रस्ताव:

बैठक में वक्ताओं ने झरिया की उपेक्षा और पुनर्वास प्रक्रिया की धीमी गति पर भी चिंता जताई। वक्ताओं का कहना था कि झरिया केवल कोयला उत्पादक क्षेत्र नहीं, बल्कि लाखों लोगों का घर, सपना और भविष्य है। पुनर्वास नीति मानवीय आधार पर बनाई जानी चाहिए, न कि केवल भू-गर्भीय तकनीकी दृष्टिकोण से।


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