Jharkhand Health Alert: कफ सिरप बिक्री पर सख्ती, बिना डॉक्टर की Prescription दवा देने पर होगी कार्रवाई

झारखंड में कफ सिरप की बिक्री पर सख्त निगरानी शुरू। 24 हजार दवा दुकानों की जांच होगी, बिना डॉक्टर की पर्ची दवा बेचने पर कार्रवाई तय।


Jharkhand Health Alert : झारखंड में कफ सिरप की बिक्री को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य औषधि निदेशालय ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों (ड्रग इंस्पेक्टर) को कफ सिरप की बिक्री पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश जारी किया है। यह कदम केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में उठाया गया है।

निर्देश के अनुसार, ड्रग इंस्पेक्टर एक सप्ताह तक राज्यभर की दवा दुकानों का औचक निरीक्षण करेंगे। इसके बाद भी नियमित अभियान चलाकर दवा दुकानों की जांच की जाएगी।

Jharkhand Health Alert: डॉक्टर की पर्ची के बिना बिक्री पर होगी कार्रवाई

निरीक्षण के दौरान यह जांच की जाएगी कि कफ सिरप बेचते समय दवा दुकानदारों ने डॉक्टर की वैध पर्ची ली है या नहीं। यदि कोई दवा दुकान बिना चिकित्सकीय पर्ची के कफ सिरप बेचती पाई जाती है, तो उसके खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।

सरकार का उद्देश्य कफ सिरप के दुरुपयोग और अवैध बिक्री पर रोक लगाना है। हाल के वर्षों में कुछ कफ सिरप के गलत इस्तेमाल और नशे के रूप में उपयोग के मामलों को देखते हुए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


Key Highlights:

  • कफ सिरप की बिक्री को लेकर राज्यभर में विशेष निगरानी अभियान।

  • सभी दवा दुकानों का औचक निरीक्षण करेंगे ड्रग इंस्पेक्टर।

  • बिना डॉक्टर की पर्ची कफ सिरप बेचने पर होगी कानूनी कार्रवाई।

  • झारखंड की 24 हजार दवा दुकानें नियम के दायरे में।

  • दवा विक्रेताओं ने मरीजों पर बढ़ने वाले अतिरिक्त खर्च पर जताई चिंता।


Jharkhand Health Alert: 24 हजार दवा दुकानें आएंगी निगरानी के दायरे में

राज्य में संचालित लगभग 24 हजार दवा दुकानों को इस आदेश का पालन करना होगा। इनमें करीब 18 हजार खुदरा दवा दुकानें शामिल हैं, जहां सीधे काउंटर से दवाओं की बिक्री की जाती है।

राजधानी रांची में ही लगभग 2 हजार दवा दुकानें इस अभियान के दायरे में आएंगी। औषधि विभाग ने सभी दवा विक्रेताओं को नियमों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

Jharkhand Health Alert: दवा विक्रेताओं ने जताई चिंता

झारखंड ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष उमेश कुमार श्रीवास्तव ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि सामान्य तौर पर 100 से 150 रुपये में मिलने वाले कफ सिरप के लिए मरीजों को पहले डॉक्टर से परामर्श लेना होगा, जिसके लिए 500 से 700 रुपये तक अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि नियम का उद्देश्य भले ही दवा के दुरुपयोग को रोकना हो, लेकिन इससे आम मरीजों पर आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी है।

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