Jharkhand High Court Order: संरक्षित वन से 1 किमी दायरे में खनन पर रोक, क्रशर को नहीं मिलेगी नई अनुमति

झारखंड हाईकोर्ट ने संरक्षित वन क्षेत्र के एक किलोमीटर दायरे में खनन और स्टोन क्रशर की नई अनुमति पर रोक लगाई। अगली सुनवाई 17 मार्च को।


Jharkhand High Court Order रांची: झारखंड हाईकोर्ट में सोमवार को वन संरक्षित क्षेत्रों के आसपास खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संरक्षित वन की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में पत्थर खदानों और स्टोन क्रशर के लिए किसी भी प्रकार की नई अनुमति नहीं दी जाए।

Jharkhand High Court Order:  पहले दी गई अनुमतियों की सूची तलब

अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि संरक्षित वन क्षेत्र के एक किलोमीटर के भीतर पहले से किसी खदान या क्रशर को अनुमति दी गई है, तो राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उसकी पूरी सूची अदालत में पेश करनी होगी। कोर्ट ने कहा कि इस सूची के आधार पर आगे के आदेश पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही बोर्ड को तत्काल सर्वे कराने का निर्देश भी दिया गया है, ताकि यह पता चल सके कि बफर जोन में कोई अवैध खनन या क्रशर संचालन तो नहीं हो रहा है।


Key Highlights

संरक्षित वन से 1 किमी के भीतर खनन और क्रशर पर रोक

हाईकोर्ट ने प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को नई अनुमति न देने का आदेश

पहले दी गई अनुमतियों की सूची कोर्ट में पेश करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के गोदावर्मन फैसले से टकराव पर जताई नाराजगी

मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को


Jharkhand High Court Order:  सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टकराव पर जताई नाराजगी

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि दिसंबर 2015 में जारी अधिसूचना के तहत संरक्षित वन के आसपास पत्थर खदान और क्रशर लगाने की न्यूनतम दूरी 500 मीटर से घटाकर 250 मीटर कर दी गई थी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने दलील दी कि 18 अक्टूबर 2017 की अधिसूचना में भी संरक्षित या आरक्षित वन से न्यूनतम दूरी 250 मीटर ही तय है। हालांकि कोर्ट ने पाया कि यह नियम सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले टीएन गोदावर्मन थिरुमुलपद बनाम भारत सरकार से सीधे तौर पर टकराता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने एक किलोमीटर के दायरे में एनओसी जारी करने पर रोक लगा दी।

Jharkhand High Court Order: पूर्व वन अधिकारी की याचिका पर सुनवाई

यह जनहित याचिका पूर्व वन अधिकारी आनंद कुमार द्वारा दाखिल की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि संरक्षित वन क्षेत्रों के पास खनन और क्रशर संचालन से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। अदालत ने इस चिंता को गंभीर मानते हुए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को एक किलोमीटर के बफर जोन में लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च को निर्धारित की गई है।


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