Jharkhand Liquor Audit: CAG ऑडिट में 20 हजार करोड़ के राजस्व नुकसान की आशंका, उत्पाद विभाग पर गंभीर सवाल

झारखंड के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की परफॉर्मेंस ऑडिट में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में शराब नीति और राजस्व वसूली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।


Jharkhand Liquor Audit रांची: झारखंड के उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की वर्ष 2021 से 2025 तक की परफॉर्मेंस ऑडिट में नीतिगत गड़बड़ियों और बड़े राजस्व नुकसान की आशंका सामने आई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की स्वीकृति के बाद प्रधान महालेखाकार (पीएजी) द्वारा तैयार की गई गोपनीय रिपोर्ट में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के संभावित राजस्व नुकसान और शराब की अवैध खरीद-बिक्री की आशंका जताई गई है।

रिपोर्ट इसी वर्ष अप्रैल में उत्पाद सचिव को भेजी गई थी, जिसमें विभाग से विभिन्न बिंदुओं पर स्पष्टीकरण और मंतव्य मांगा गया था। हालांकि तीन महीने बीतने के बाद भी विभाग की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया है। यह रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

Jharkhand Liquor Audit:होलोग्राम, जीपीएस ट्रैकिंग और वैट वसूली पर उठे सवाल

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले सुरक्षा होलोग्राम का काम सरकारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस, नासिक के बजाय एक निजी वेंडर को दिए जाने पर वित्तीय नियमों के उल्लंघन की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे नकली होलोग्राम के जरिए अवैध शराब की बिक्री और राजस्व चोरी की संभावना बढ़ी।

इसके अलावा डिस्टलरी से गोदाम और दुकानों तक शराब ढोने वाले वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। ऑडिट के अनुसार इससे शराब की आवाजाही पर निगरानी कमजोर हुई और बीच रास्ते में संभावित हेराफेरी की आशंका बनी रही।

रिपोर्ट में वैट वसूली की प्रक्रिया में भी बड़ी चूक का उल्लेख है। ऑडिट के मुताबिक आपूर्ति के प्रत्येक चरण पर कर वसूली के बजाय केवल शुरुआती स्तर पर ही वैट वसूला गया, जिससे उत्पाद शुल्क और वैट के अंतर का फायदा उठाकर राजस्व नुकसान होने की आशंका बनी।


Key Highlights

• सीएजी की मंजूरी के बाद पीएजी ऑडिट में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व नुकसान की आशंका।

• शराब नीति, होलोग्राम व्यवस्था और वैट वसूली में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख।

• तीन महीने बाद भी उत्पाद विभाग ने गोपनीय ऑडिट रिपोर्ट पर अपना पक्ष नहीं दिया।

• ऑडिट टीम ने रिकॉर्ड नहीं मिलने के बावजूद छह जिलों में जांच कर साक्ष्य जुटाए।

• उत्पाद मंत्री ने कहा कि जानकारी लेकर उचित कार्रवाई की जाएगी।


Jharkhand Liquor Audit:शराब नीति और टेंडर प्रक्रिया पर भी सवाल

ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वर्षों में शराब नीति और उसके क्रियान्वयन में कई ऐसे बदलाव किए गए, जिनसे कुछ चुनिंदा कंपनियों और व्यक्तियों को लाभ पहुंचने के आरोप लगे। टेंडर प्रक्रिया और ठेकों के आवंटन में पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि इन्हीं मामलों से जुड़े प्रकरणों में पहले कई अधिकारी जेल जा चुके हैं, जबकि मामले की जांच अभी भी एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है।

Jharkhand Liquor Audit:ऑडिट टीम को नहीं मिले पूरे दस्तावेज, फिर भी जारी रखी जांच

ऑडिट के दौरान टीम ने वर्ष 2014 से 2022 तक के रिकॉर्ड मांगे, लेकिन विभाग ने बताया कि संबंधित दस्तावेज एसीबी के पास हैं। बाद में एसीबी ने इन्हें महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए बिना अनुमति दस्तावेज उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद पीएजी की टीम ने धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो, देवघर, रांची और दुमका में जमीनी जांच कर आवश्यक साक्ष्य जुटाए।

Jharkhand Liquor Audit:उत्पाद मंत्री ने क्या कहा

उत्पाद मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि विभागीय सचिव से जानकारी लेने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। निजी वेंडर को होलोग्राम का काम दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकारी सिक्योरिटी प्रिंटिंग प्रेस, नासिक से ही होलोग्राम लिए जा रहे हैं और उनके मंत्री बनने से पहले लिए गए निर्णयों पर वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।

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