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 Bihar Cooperative Policy:बिहार में सहकारिता से बदलेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था, नई Policy से रोजगार के खुलेंगे रास्ते

 बिहार में सहकारिता नीति 2026 से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स, तरकारी बूथ और रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।


 Bihar Cooperative Policy पटना: बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सहकारिता विभाग कई स्तरों पर काम कर रहा है। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को पटना के सूचना भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी।

मंत्री ने कहा कि सरकार के सात निश्चय 3 के तहत समृद्ध उद्योग सशक्त बिहार की परिकल्पना को जमीन पर उतारने के लिए बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। मधुबनी के सकरी में बंद चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल और दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा।

 Bihar Cooperative Policy:रैयाम में बनेगा आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स

दरभंगा के रैयाम में बनने वाले आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स में चीनी मिल के साथ पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए जाएंगे। इन परियोजनाओं को इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से स्थापित और संचालित किया जाएगा।

सहकारिता मंत्री ने बताया कि गन्ना उत्पादक किसानों को शामिल कर सहकारी चीनी मिल समिति का गठन किया जा रहा है। पारदर्शी व्यवस्था के लिए पोर्टल तैयार कर किसानों से आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। अब तक 10 हजार से 15 हजार किसानों के आवेदन मिलने की जानकारी दी गई है।

उन्होंने कहा कि बिहार राज्य सहकारिता नीति 2026 लागू की गई है। इसके तहत सहकारिता आंदोलन को आधुनिक, सुदृढ़ और नवाचार आधारित बनाने पर जोर दिया गया है। पारंपरिक सहकारी संस्थाओं को डिजिटल तकनीक, पारदर्शी प्रशासन और बेहतर प्रबंधन प्रणाली से मजबूत किया जाएगा। साथ ही गैर पारंपरिक क्षेत्रों में नई सहकारी समितियों के गठन और विस्तार को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।


Key Highlights

  1. दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स स्थापित किया जाएगा।

  2. मधुबनी के सकरी में बंद चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल बनेगी।

  3. सुधा की तर्ज पर वेजफेड के माध्यम से तरकारी बूथ खोले जाएंगे।

  4. 7452 सहकारी गोदामों के निर्माण से 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता बनी।

  5. 100 पंचायतों में 100 एफपीओ गठित किए गए हैं, जिनमें 50 ने कारोबार शुरू कर दिया है।


 Bihar Cooperative Policy:सुधा की तर्ज पर खुलेंगे तरकारी बूथ

सहकारिता नीति के जरिए युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और वंचित समुदायों को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने की योजना है। सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भरता, उद्यमिता और सामूहिक आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।

सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण केंद्र और 50 प्रखंडों में जरूरी आधारभूत संरचना विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि बिहार की सब्जियां अधिक से अधिक लोगों की थाली तक पहुंचें, इसके लिए किसानों को बड़े स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इसी क्रम में सुधा डेयरी के बूथ की तर्ज पर वेजफेड के माध्यम से अलग अलग स्थानों पर तरकारी बूथ खोले जाएंगे। इससे स्थानीय सब्जी उत्पादक किसानों को बाजार मिलेगा और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

 Bihar Cooperative Policy:धान खरीद से लेकर बैंकिंग और एफपीओ तक बढ़ा सहकारिता का दायरा

वित्तीय वर्ष 2026 से 27 के रबी मौसम से बिहार में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत किसानों को कृषि लागत के अनुरूप क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की व्यवस्था होगी। किसानों को कम प्रीमियम देना होगा, जबकि प्रीमियम में केंद्र और राज्य सरकार भी अपना हिस्सा देंगी।

खरीफ विपणन मौसम 2025 से 26 में 36.85 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 6902 समितियों के माध्यम से 5.40 लाख किसानों से 36.79 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की गई। खरीदे गए धान के विरुद्ध राज्य खाद्य निगम को 24.57 लाख मीट्रिक टन यानी 98.47 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है।

राज्य में सहकारी समितियों के माध्यम से 7452 गोदामों का निर्माण पूरा हो चुका है। इससे 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता तैयार हुई है।

सहकारिता में सहकार योजना के तहत 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में विकसित किया गया है। माइक्रो एटीएम के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है।

पैक्सों में व्यावसायिक विविधीकरण के तहत करीब 6425 पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें 5807 केंद्र सक्रिय हैं और अब तक पैक्स के माध्यम से 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।

जन औषधि केंद्र योजना के तहत चयनित 461 पैक्स में से 373 में केंद्र स्थापना की स्वीकृति दी गई है। 37 पैक्स को औषधि अनुज्ञप्ति और 36 को स्टोर कोड मिल चुका है। वहीं 36 पैक्स में संचालन शुरू हो गया है।

विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत 36 समितियों में 1000, 2000 और 2500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदामों का निर्माण कराया जा रहा है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों की 100 चयनित पंचायतों में 100 किसान उत्पादक संगठनों यानी एफपीओ का गठन किया गया है। इनका उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़ना, उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है। वर्तमान में 50 एफपीओ व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर चुके हैं।

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