झारखंड में 2026 के मॉनसून सीजन में सामान्य से 2% कम बारिश हुई। आठ जिले रेड जोन में हैं, जबकि पश्चिमी सिंहभूम और रांची में सामान्य से अधिक बारिश हुई।
Jharkhand Monsoon 2026 रांची: झारखंड में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आधिकारिक सीजन एक जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस वर्ष राज्य में मॉनसून 12 जून को पहुंचा और कुल 111 दिनों तक इसका प्रभाव रहा। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार मॉनसून अवधि में झारखंड में सामान्य से करीब 2% कम बारिश हुई है। इसे राज्य स्तर पर सामान्य स्थिति के करीब माना जा रहा है, लेकिन आठ जिलों में बारिश की कमी चिंता का विषय बनी हुई है।
Jharkhand Monsoon 2026:आठ जिले Red Zone में, पाकुड़ में सबसे कम बारिश
मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक आनंद के अनुसार राज्य के आठ जिले कम बारिश वाले रेड जोन में हैं। इनमें पाकुड़, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा और गुमला शामिल हैं।
इनमें पाकुड़ की स्थिति सबसे खराब रही। जिले में सामान्य से 52% कम बारिश दर्ज की गयी। मॉनसून अवधि में पाकुड़ में सामान्य बारिश 1224.5 मिमी मानी जाती है, जबकि इस वर्ष अब तक 584.6 मिमी बारिश हुई है। चतरा में सामान्य से 36%, देवघर में 29%, गुमला में 26%, गढ़वा में 24%, कोडरमा और पलामू में 20% तथा हजारीबाग में 20% कम बारिश दर्ज की गयी।
इसके विपरीत पश्चिमी सिंहभूम में सामान्य से 47% और राजधानी रांची में 18% अधिक बारिश हुई है। 14 जिलों में बारिश सामान्य के आसपास रही।
Jharkhand Monsoon 2026:जून में सूखा, अगस्त और सितंबर में अधिक बारिश
इस वर्ष मॉनसून के दौरान बारिश का वितरण असमान रहा। जून में झारखंड में सामान्य से 58% कम बारिश हुई। इसके बाद अगस्त में सामान्य से 26% और सितंबर में 15% अधिक बारिश दर्ज की गयी। बारिश के इसी असमान वितरण का असर राज्य के अलग-अलग जिलों में देखने को मिला।
मौसम विज्ञान केंद्र के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में झारखंड में सामान्य से 17% अधिक बारिश हुई थी। वहीं वर्ष 2023 में सामान्य से करीब 26% कम बारिश दर्ज की गयी थी। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में मॉनसून के ट्रेंड में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। 2018, 2022 और 2023 में सूखे जैसे हालात रहे थे।
Jharkhand Monsoon 2026:पिछले 10 वर्षों में आठ बार सामान्य से कम बारिश
झारखंड में पिछले 10 वर्षों के मॉनसून रिकॉर्ड में आठ वर्षों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गयी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में सामान्य से 9% कम, 2018 में 28% कम, 2019 में 19% कम, 2020 में 15% कम, 2022 में 20% कम, 2023 में 26% कम, 2024 में 1% कम और 2026 में करीब 2% कम बारिश हुई।
वहीं 2021 में सामान्य से 2% अधिक और 2025 में 17% अधिक बारिश हुई। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में मॉनसून के दौरान बारिश का पैटर्न लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है। इसका सीधा असर जल उपलब्धता और कृषि पर पड़ता है।
Key Highlights
- झारखंड में 2026 के मॉनसून सीजन में सामान्य से करीब 2% कम बारिश हुई।
- पाकुड़, देवघर, कोडरमा, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा और गुमला रेड जोन में हैं।
- पाकुड़ में सामान्य से 52% कम, जबकि पश्चिमी सिंहभूम में 47% अधिक बारिश हुई।
- रांची में मॉनसून अवधि के दौरान सामान्य से 18% अधिक बारिश दर्ज की गयी।
- छह प्रमुख जलाशयों में कुल क्षमता का 61.33% पानी उपलब्ध है और खरीफ फसल का 80.93% लक्ष्य पूरा हुआ है।
Jharkhand Monsoon 2026:जलाशयों में 61.33% पानी, खरीफ फसल का 80.93% लक्ष्य पूरा
केंद्रीय जल आयोग की निगरानी वाले झारखंड के छह प्रमुख जलाशयों में वर्तमान में कुल क्षमता का 61.33% पानी उपलब्ध है। यह पिछले 10 वर्षों के सामान्य औसत की तुलना में 23.59% कम है। इन जलाशयों की लाइव भंडारण क्षमता 2.012 बिलियन क्यूबिक मीटर है, जिसमें फिलहाल 1.234 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी मौजूद है।
मॉनसून की बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई और रोपाई पर भी पड़ा है। खरीफ 2026-27 में विभिन्न फसलों के लिए कुल 2,853.955 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले 2,309.6 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई और रोपाई पूरी हो चुकी है। इस तरह निर्धारित लक्ष्य का 80.93% हासिल किया गया है।

















