झारखंड में 15 अक्टूबर की आधी रात से NGT की रोक खत्म होगी। 16 अक्टूबर से 14 बालू घाटों से वैध उठाव शुरू हो सकेगा। कीमतों में 5000 रुपये तक गिरावट की उम्मीद है।
Jharkhand Sand Price रांची: झारखंड में बालू की किल्लत और ऊंची कीमतों से परेशान लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य के बालू घाटों से बालू उठाव पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रोक 15 अक्टूबर की आधी रात से समाप्त हो जाएगी। इसके बाद 16 अक्टूबर से राज्य के 14 बालू घाटों से वैध तरीके से बालू का उठाव शुरू हो सकेगा। जानकारों के मुताबिक, वैध आपूर्ति बढ़ने से बालू की कीमतों में 5000 रुपये तक की गिरावट आ सकती है।
हालांकि, फिलहाल रांची समेत राज्य के कई इलाकों में बालू की कालाबाजारी जारी है। आरोप है कि बिहार के चालान और स्टॉकिस्ट के नाम पर बालू की बिक्री की जा रही है। इससे आम लोगों को निर्माण कार्य के लिए महंगी कीमत चुकानी पड़ रही है। वहीं, बालू घाटों की नीलामी के बावजूद लीज की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से राज्य में वैध आपूर्ति सीमित बनी हुई है।
Jharkhand Sand Price:NGT Ban End: 16 अक्टूबर से 14 घाटों से होगा बालू का वैध उठाव
NGT की रोक समाप्त होने के बाद झारखंड में फिलहाल उन्हीं 14 बालू घाटों से उठाव शुरू हो सकेगा, जिनकी लीज डीड की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। राज्य सरकार की ओर से अधिक से अधिक घाटों को पर्यावरणीय मंजूरी, संचालन की सहमति और लीज डीड दिलाने की तैयारी की गई थी, लेकिन तय समय तक सभी घाटों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
जानकारी के अनुसार, राज्य में कुल 40 बालू घाटों को संचालन की सहमति यानी सीटीओ मिल चुकी है। इनमें से केवल 14 घाटों की लीज डीड पूरी हुई है। शेष 26 घाटों की लीज प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। ऐसे में NGT की रोक हटने के बावजूद तत्काल बड़े पैमाने पर बालू की आपूर्ति बढ़ने की संभावना सीमित है।
खान विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों और जिला खनन पदाधिकारियों को निर्देश दिया था कि अधिक से अधिक बालू घाटों की आवश्यक मंजूरी और लीज की प्रक्रिया पूरी की जाए। इसके बावजूद कई घाटों पर प्रक्रिया अटकी हुई है।
Jharkhand Sand Price:Ranchi Sand Price 40 हजार रुपये तक बिक रहा एक हाइवा बालू
रांची में फिलहाल बालू की कीमतें काफी ऊंची बनी हुई हैं। बाजार में 700 सीएफटी बालू वाले एक हाइवा की कीमत 35 हजार से 40 हजार रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, छोटे वाहनों से बालू खरीदने वालों को भी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
मौजूदा बाजार दर के अनुसार, 180 सीएफटी बालू वाले टर्बो ट्रक की कीमत करीब 9000 रुपये तक है। वहीं, 80 से 90 सीएफटी बालू वाले टर्बो ट्रक के लिए लगभग 5000 रुपये देने पड़ रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि 16 अक्टूबर से वैध घाटों से उठाव शुरू होने और बाजार में आपूर्ति बढ़ने पर कीमतों में कमी आ सकती है। हालांकि, कीमतों में वास्तविक गिरावट इस बात पर निर्भर करेगी कि घाटों से कितना बालू निकलता है और बाजार तक उसकी आपूर्ति कितनी तेजी से पहुंचती है।
Jharkhand Sand Price:Ranchi Sand Ghat0जिले में फिलहाल एक घाट से ही निकलेगा बालू
रांची जिले में कुल 19 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है, लेकिन इनमें से केवल एक घाट की लीज डीड पूरी हुई है। दूसरे घाट की प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है। इसका मतलब है कि जिले में तत्काल वैध बालू आपूर्ति बढ़ाने के लिए सीमित विकल्प ही उपलब्ध हैं।
दूसरी ओर, दुमका के तीन, जमशेदपुर के दो, गोड्डा के तीन, रामगढ़ के तीन और हजारीबाग के दो बालू घाटों की प्रक्रियाएं पूरी होने की जानकारी दी गई है। ये वे घाट हैं, जो 10 जून को NGT की रोक लगने से पहले चालू हो चुके थे। इसके बाद कोई नया घाट इस सूची में शामिल नहीं हो सका।
बालू घाटों का टेंडर हासिल करने वाली कंपनी समर्थ एड प्रोटेक्स प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रतिनिधि के अनुसार, लीज की प्रक्रिया अटकने से घाटों का संचालन प्रभावित हुआ है। लीज डीड होने के बाद कुल राशि का 50 प्रतिशत तत्काल जमा करना पड़ता है, जो कई मामलों में करोड़ों रुपये होता है। NGT की रोक के दौरान बालू का उठाव संभव नहीं होने के कारण संचालकों के सामने आर्थिक जोखिम भी था।
Key Highlights
- झारखंड में बालू उठाव पर NGT की रोक 15 अक्टूबर की आधी रात से समाप्त होगी।
- 16 अक्टूबर से 14 बालू घाटों से वैध तरीके से उठाव शुरू हो सकेगा।
- रांची में 700 सीएफटी बालू वाले एक हाइवा की कीमत 35 से 40 हजार रुपये तक है।
- बालू की कीमतों में 5000 रुपये तक गिरावट आने की संभावना जताई गई है, लेकिन यह आपूर्ति पर निर्भर करेगी।
- राज्य के 444 बालू घाटों में से 290 की नीलामी हो चुकी है। सभी 290 घाटों की लीज डीड पूरी होने पर सरकार को करीब 473.31 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
Jharkhand Sand Price:Sand Mining in Jharkhand 290 घाटों की नीलामी, सरकार को मिल सकते हैं 473 करोड़ रुपये
झारखंड में कुल 444 बालू घाटों में से 290 की नीलामी हो चुकी है। इनमें 40 घाट ऐसे हैं, जिनकी ग्रामसभा और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं लगभग पूरी हो चुकी थीं तथा उन्हें पर्यावरणीय स्वीकृति भी मिल चुकी थी। इन 40 घाटों में से 14 की लीज डीड पूरी होने के बाद अब उनसे बालू उठाव शुरू हो सकेगा।
जानकारी के अनुसार, राज्य के सभी 290 नीलाम घाटों की लीज डीड पूरी हो जाने पर सरकार को एकमुश्त करीब 473.31 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते थे। रांची, खूंटी, गिरिडीह, जामताड़ा, रामगढ़, हजारीबाग, कोडरमा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और धनबाद समेत कई जिलों में नीलामी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती नीलामी के बाद लीज डीड और संचालन संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करना है। इन प्रक्रियाओं में तेजी आने पर ही वैध बालू आपूर्ति बढ़ने और आम लोगों को ऊंची कीमतों से राहत मिलने की उम्मीद है।


















