Jharkhand Sand Mining: NGT की रोक हटने के बाद भी सस्ता नहीं होगा बालू, 290 घाटों में 266 पर अटका पेंच

झारखंड में बालू खनन पर NGT की रोक हटने में नौ दिन बाकी हैं, लेकिन 290 नीलाम घाटों में 266 पर प्रक्रिया अधूरी होने से बालू सस्ता होने की उम्मीद कम है।


Jharkhand Sand Mining रांची: झारखंड में बालू खनन पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी NGT की रोक हटने में अब सिर्फ नौ दिन शेष हैं। रोक हटने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमत कम होगी, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा होता नहीं दिख रहा है। राज्य के 444 बालू घाटों में से 290 घाटों की नीलामी करीब एक साल पहले हो चुकी है, लेकिन इनमें से अधिकांश घाटों पर खनन शुरू करने के लिए जरूरी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है।

Jharkhand Sand Mining: 290 में सिर्फ 24 घाटों की प्रक्रिया आगे बढ़ी

नीलामी के बावजूद 266 बालू घाटों पर पर्यावरण स्वीकृति, कंसेंट टू एस्टैब्लिश और कंसेंट टू ऑपरेट जैसी जरूरी मंजूरियां नहीं मिल सकी हैं। कई घाटों में अंचल अधिकारियों की रिपोर्ट, वन विभाग की अनुमति और ग्राम सभा की स्वीकृति भी लंबित है।

एनजीटी की रोक लगने से पहले 24 घाटों के लिए खनन की जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि, इनमें भी केवल 14 घाट ऐसे हैं, जहां से रोक हटने के बाद वास्तव में बालू का उठाव शुरू होने की स्थिति बन सकती है। ऐसे में बाजार में बालू की उपलब्धता सीमित रहने की संभावना है।

स्थानीय बालू कारोबारियों के अनुसार फिलहाल 80 सीएफटी क्षमता वाला एक टर्बो बालू करीब 4,500 रुपये में बिक रहा है। रोक हटने के बाद भी कीमत में बड़ी गिरावट की उम्मीद नहीं है।

Jharkhand Sand Mining: विभागीय समन्वय और ठेकेदारों की लापरवाही बनी बड़ी वजह

बालू घाटों की नीलामी पूरी होने के बाद खनन विभाग की जिम्मेदारी थी कि पर्यावरण से जुड़े विभागों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर जरूरी प्रक्रिया समय पर पूरी कराई जाए। लेकिन करीब चार महीने के दौरान भी अधिकांश घाटों की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

इसके लिए ठेकेदारों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। ईसी, सीटीई और सीटीओ समेत जरूरी दस्तावेज हासिल करने और खनन शुरू कराने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी ठेकेदारों की भी थी। समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण नीलाम हो चुके कई घाट अब भी बंद हैं।


Key Highlights

  • झारखंड में NGT की बालू खनन रोक हटने में नौ दिन बाकी हैं।
  • राज्य के 444 बालू घाटों में से 290 की नीलामी हो चुकी है।
  • 290 में से 266 घाटों पर जरूरी पर्यावरणीय और प्रशासनिक प्रक्रिया अधूरी है।
  • रोक हटने के बाद फिलहाल करीब 14 घाटों से ही बालू उठाव शुरू होने की संभावना है।
  • 80 सीएफटी बालू का एक टर्बो करीब 4,500 रुपये में मिल रहा है और कीमत घटने की उम्मीद कम है।

Jharkhand Sand Mining: इन घाटों से शुरू हो सकता है बालू का उठाव

जिन घाटों पर जरूरी प्रक्रिया आगे बढ़ी है, उनमें छोटाकामती, कटानाई, हरिपुर, सांढ़, सोनपुरा, लांगटू, सिकरी, सिरमा, श्यामनगर, जसमाता, झिलुवा, सुवर्णरखा, कोरेयामोहनपाल, सिरका, तोकीसुद-1 और पैंकी समेत अन्य घाट शामिल हैं।

इनमें अलग-अलग घाटों का क्षेत्रफल 0.62 हेक्टेयर से लेकर 46.30 हेक्टेयर तक है। हालांकि, सभी घाटों से एक साथ खनन शुरू हो पाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

Jharkhand Sand Mining: ईसी मिलने के बाद भी 10 घाटों पर फंसा पेंच

दुमका सहित अन्य जिलों के कुछ घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद वहां से बालू उठाव शुरू नहीं हो पाएगा। इन घाटों में हरिपुर, सिमरा, कंदतारी, बैरिसाल, गोसाईं बलिया, हरली, चोबदार बलिया, चोकेसेरेंग, सुंडिल, सनातन और बनकटा जैसे घाट शामिल हैं।

इन घाटों की पर्यावरण स्वीकृति समेत अन्य प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कुछ प्रशासनिक और तकनीकी पेंच बाकी हैं। इसलिए एनजीटी की रोक हटने के बाद भी इनसे तत्काल बालू उठाव शुरू होना मुश्किल है।

 

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