रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा 21 और 22 सितंबर को हुई थी। इसके बाद परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों के चलते छात्रों का विरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। अभ्यर्थी परीक्षा को रद्द करने और पेपर लीक के आरोप लगा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि पिछले साल की परीक्षा से 72 प्रश्न दोबारा पूछे गए हैं, जिससे परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
इन मुद्दों को लेकर रांची के मुरा बादी स्थित बापू वाटिका के पास 14 अक्टूबर को एक महा धरना आयोजित किया जाएगा, जिसमें राज्य भर के छात्र शामिल होंगे। उनकी मांग है कि परीक्षा को रद्द कर पुनः कराई जाए।
संवाददाता अजय लाल ने बताया कि सीजीएल परीक्षा पिछले आठ वर्षों से हो रही है, लेकिन अब तक इस परीक्षा का सफल संपन्न होना संदेहास्पद बन गया है। छात्रों के विरोध और गड़बड़ियों के कारण नई सरकार को इस मामले में निर्णय लेना होगा, जो दिसंबर में बनेगी। चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले आयोग की ओर से परीक्षा का परिणाम जारी होने की संभावना कम है।
छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा रद्द की गई, तो यह चुनावी मुद्दा बन जाएगा, जिससे मामला लटक सकता है। जाँच समितियों की रिपोर्ट और आयोग की चुप्पी ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है।
अब देखना यह है कि नए चुनावी माहौल में नई सरकार इस मामले में क्या निर्णय लेगी और छात्रों के अधिकारों की रक्षा कैसे की जाएगी।



















