महाकुंभ 2025 में दीक्षा लेकर लौट गईं कमला बनी लॉरेन पॉवेल

डिजिटल डेस्क : महाकुंभ 2025 में दीक्षा लेकर लौट गईं कमला बनी लॉरेन पॉवेल।  महाकुंभ 2025 में सनातनी गेरुआ चोला, नाम और गोत्र अपनाकर सुर्खियों में आईं कमला बनी लॉरेन पॉवेल लौट गई हैं। इस समय भूटान में आराम कर रही हैं। मिली जानकारी के मुताबिक,  एप्पल कंपनील के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल महाकुंभ से अचानक लौट गई हैं।

कमला बनी लॉरेन पॉवेल 10 दिनों के प्रवास लिए यहां आईं थी, लेकिन 3 दिन रहकर ही में ही वापस चली गईं। जाने से पहले कमला बनी लॉरेन पॉवेल ने अपने गुरू स्वामी कैलाशानंद गिरी से विधिवत दीक्षा ली।

कमला बनीं लॉ़रेन पॉवेल को गुरुमंत्र के रूप में मां काली का बीज मंत्र

प्राप्त जानकारी के मुताबिक,  महाकुंभ 2025 में आकर कमला बनीं एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स ने सनातनी परंपरा के तहत गुरू दीक्षा ले ली है। संगम तट पर रवानगी से पहले की रात निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी ने कमला को गुरू मंत्र दिया। वहीं दीक्षा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कमला ने भी अपने समर्थ्य के मुताबिक गुरू को दक्षिणा दी।

कमला को गुरुमंत्र के रूप में मां काली का बीज मंत्र मिला है। अब वह वतन वापसी के बाद नियमित इस मंत्र का जाप करेंगी। दीक्षा समारोह के दौरान शिविर में गुरू कैलाशानंद गिरी के अलावा कमला बनी लॉरेन पावेल के निजी सचिव अवंतिकानंद और  सचिव पीटर भी मौजूद रहे।

एलर्जी की दिक्कत से परेशान कमला बनीं लॉरेन पॉवेल अभी कुछ दिन भूटान में रहेंगी…

बताया जा रहा है कि कमला बनीं एप्पल के फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल को एलर्जी की दिक्कत हो गई थी। कमला प्रयागराज के महाकुंभ से लौटकर कुछ दिन भूटान में ही प्रवास करेंगी। महाकुंभ 2025 में प्रवास के दौरान कमला बनी लॉरेन पॉवेल संगम की रेती पर स्थित अपने गुरू के ही कैंप में ठहरीं थीं।

कमला बनीं लॉरेन पॉवेल की महाकुंभ 2025 में खींची गई तस्वीर।
कमला बनीं लॉरेन पॉवेल की महाकुंभ 2025 में खींची गई तस्वीर।

इस बीच उनकी तबीयत खराब हो गई. इसकी वजह से वह मकर संक्रांति के अवसर पर अमृत स्नान भी नहीं कर पायीं थीं। उन्हें विदा करने के बाद उनके गुरू कैलाशानंद गिरी ने बताया कि – ‘ कमला की बहुत इच्छा थी कि वह अमृत स्नान में शामिल हो, लेकिन सोमवार को हुई भीड़ की वजह से उनके स्वास्थ्य में थोड़ी दिक्कत हो गई।

…इसकी वजह से मंगलवार से वह शिविर से बाहर नहीं निकली‍ं और अब वह यहां से वापस लौट गई हैं।  कमला बहुत सहज और सरल हैं और सनातन धर्म को जानना चाहती हैं। वह अपने गुरू के बारे में जानना चाहती हैं। उनके पास ढेरों सवाल हैं और हमारा कर्तव्य हैं कि हम उनकी जिज्ञासा को शांत करें’।

मकर संक्रांति पर महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।
मकर संक्रांति पर महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।

महाकुंभ से लौटीं कमला बनी लॉरेन पॉवेल और उनके पति स्टीव के महाकुंभ से लगाव के बारे में जानें…

बताया जा रहा है कि वर्ष 1974 में एपल के फाउंडर स्टीव जॉब्स ने एक लेटर लिखा था जिसमें उन्होंने भारत आने की इच्छा जताई थी। जॉब्स कुंभ मेला जाना चाहते थे, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। माना जा रहा है कि अब उनकी पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स की इच्छा पूरी करने के लिए भारत आई थीं। वहीं स्टीव जॉब्स का लिखा ये लेटर 4.32 करोड़ रुपये में बिका है।

मकर संक्रांति पर महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।
मकर संक्रांति पर महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।

महाकुंभ 2025 में शरीक होकर लौट चुकीं कमला बनीं लॉरेन पॉवेल के बारे में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि ने बताया कि – ‘कमला के सभी प्रश्न सनातन धर्म के इर्द-गिर्द घूमते हैं और उन्हें उत्तरों में बहुत खुशी और संतुष्टि मिलती हैं। कमला बनीं लॉरेन की आध्यात्मिकता की खोज उन्हें महाकुंभ में ले आई।

…यहां उनको नया नाम कमला दिया गया है। वह बहुत ही सरल, सौम्य हैं और यहां हैं। आध्यात्मिकता की उनकी खोज उन्हें यहां ले आई। जिस तरह से उन्होंने अखाड़े में खुद को संचालित किया है उससे यह स्पष्ट होता है कि दुनिया के सबसे अमीर और सबसे प्रसिद्ध लोगों में से एक होने के बावजूद, वह अहंकार रहित हैं और दिखावा नहीं करती हैं। यहां वह सादे कपड़ों में रहीं और आचरण कीं।

महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।
महाकुंभ में कमला बनीं लॉरेन पॉवेल।

…वह लो प्रोफाइल रहती हैं। वह यहां हमारी शाश्वत और कालजयी सनातनी संस्कृति, सभी चेतनाओं के मूल को देखने आई थीं। वह यहां सनातनी आस्था के प्रहरियों, साधु-संतों से मिलीं। लॉरेन पहली बार महाकुंभ में आई थीं।

…महाकुंभ में आने से पहले कमला बनीं लॉरेन पॉवेल ने वाराणसी में जाकर काशी विश्वनाथ के दर्शन किया। गंगा में नौकायन के बाद  सिर पर दुपट्टा डालकर बाबा विश्वनाथ के दरबार पहुंचीं थीं। गर्भगृह के बाहर से ही बाबा का आशीर्वाद लिया था। चूंकि सनातन धर्म में गैर हिंदू शिवलिंग का स्पर्श नहीं करते, इस बात का ध्यान रखते हुए उन्होंने बाहर से ही दर्शन किया था’।

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