जमशेदपुर के मानगो दंगा मामले में अदालत ने साक्ष्य के अभाव में फिरोज खान और नुरुल हक झुन्ना समेत 19 आरोपियों को बरी कर दिया। मामला वर्ष 2017 की हिंसा से जुड़ा था।
Mango Riot Case जमशेदपुर: वर्ष 2017 में मानगो में हुए दंगा और हिंसा से जुड़े चर्चित मामले में शुक्रवार को बड़ा फैसला आया। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 की अदालत ने साक्ष्य के अभाव में पूर्व कांग्रेस नेता फिरोज खान, नुरुल हक उर्फ झुन्ना समेत 19 आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करने में सफल नहीं हो सका।
इस फैसले के बाद लंबे समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।
Mango Riot Case:पुलिस गवाहों की गवाही के बावजूद आरोप साबित नहीं हुए
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता जाहिद इकबाल ने अदालत को बताया कि मामले में तत्कालीन मानगो थाना प्रभारी फूलननाथ, आजादनगर थाना प्रभारी जितेंद्र ठाकुर, उलीडीह थाना प्रभारी मुकेश चौधरी सहित कई पुलिस अधिकारियों और जवानों की गवाही कराई गई थी।
हालांकि, पुलिस जांच एजेंसियां आरोपियों के खिलाफ ऐसे ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकीं, जिनके आधार पर अपराध सिद्ध किया जा सके। बचाव पक्ष ने पुलिस जांच में गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि कमजोर जांच के कारण कई लोगों को अनावश्यक रूप से जेल जाना पड़ा।
Key Highlights
वर्ष 2017 के मानगो दंगा मामले में 19 आरोपी बरी
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-1 की अदालत ने सुनाया फैसला
कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दी राहत
बचाव पक्ष ने पुलिस जांच में गंभीर खामियों का उठाया मुद्दा
इसी मामले में पहले कांग्रेस नेता शहनवाज आलम समेत आठ आरोपी भी हो चुके हैं बरी
Mango Riot Case:ये आरोपी हुए बरी
अदालत द्वारा बरी किए गए आरोपियों में फिरोज खान, नुरुल हक उर्फ झुन्ना, आफताब आलम उर्फ सोनू, महताब आलम, मोहम्मद सलाउद्दीन, तौफिक अहमद, मोहम्मद राशिद, अलमीर अंसारी, मोहम्मद अलाउद्दीन उर्फ बाबू, मोहम्मद रेहान उर्फ रहमान, असद हसन, मोहम्मद हाफिज उर्फ लल्लू, मोहम्मद बेलाल गुफरान, मोहम्मद फेकू उर्फ महमूद आलम, मोनू आलम, शौकत अली, मोहम्मद सरफुद्दीन उर्फ सरफू और मोहम्मद शामी उर्फ शमीउल्लाह शामिल हैं।
इससे पहले इसी मामले में कांग्रेस नेता शहनवाज आलम समेत आठ अन्य आरोपियों को भी अदालत साक्ष्य के अभाव में बरी कर चुकी है।
Mango Riot Case:बच्चा चोरी की अफवाह के बाद भड़की थी हिंसा
यह मामला वर्ष 2017 में सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर क्षेत्र में बच्चा चोरी की अफवाह के बाद चार युवकों की पीट-पीटकर हत्या किए जाने की घटना से जुड़ा है। इस घटना के बाद जमशेदपुर के मानगो इलाके में तनाव फैल गया था और कई स्थानों पर तोड़फोड़ एवं हिंसक घटनाएं हुई थीं।
उपद्रव के दौरान मानगो थाना पर भी पथराव किया गया था। इसके बाद मानगो, आजादनगर और उलीडीह थाना क्षेत्रों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई थीं। मामलों में फिरोज खान, शहनवाज आलम, नुरुल हक झुन्ना, आफताब अहमद सिद्दीकी सहित लगभग 500 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
Mango Riot Case:करीब 100 लोगों को भेजा गया था जेल
दंगा और हिंसा के बाद पुलिस ने व्यापक अभियान चलाकर करीब 100 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हालांकि वर्षों तक चली सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद अदालत ने कई आरोपियों को राहत देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया है।
यह फैसला एक बार फिर आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच और मजबूत साक्ष्य के महत्व को रेखांकित करता है।
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