Nitin Gadkari की बेबाक बोल – नेता स्वार्थवश होते हैं जातिवादी, जनता नहीं…

डिजिटल डेस्क : Nitin Gadkari की बेबाक बोल – नेता स्वार्थवश होते हैं जातिवादी, जनता नहीं…। वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari की महाराष्ट्र में कहे गए बेबाक बोल अचानक से सुर्खियों में हैं।

केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari के बेबाक बोल से सियासी नेतागण भी निर्विकार हो गए हैं और सभी चुप हैं। किसी ने Nitin Gadkari के बेबाक बोल पर टिप्पणी करने की हिम्मत नहीं की है।

महाराष्ट्र के अमरावती में डॉ. पंजाबराव उर्फ ​​भाऊसाहेब देशमुख मेमोरियल अवार्ड समारोह में बेबाकी से बोलते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने काफी अहम बातें कहीं।

केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने कहा कि – ‘…नेता लोग अपने स्वार्थ के लिए जातिवादी होते हैं, जनता नहीं। …लोग जातिवादी नहीं होते, बल्कि नेता अपने स्वार्थ के लिए जातिवादी होते हैं।’

Nitin Gadkari की इस टिप्पणी ने मानों पूरी सियासी महफिल जनता के बीच लूट ली है और उसी क्रम में लगातार यह बयान तेजी से वायरल होने लगा है।

‘नेताओं में होड़ कि कौन ज्यादा पिछड़ा…’

महाराष्ट्र के अमरावती में डॉ. पंजाबराव उर्फ ​​भाऊसाहेब देशमुख मेमोरियल अवार्ड समारोह में वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari यहीं नहीं रुके। Nitin Gadkari ने मौजूदा राजनीतिक दौर में नेताओं में पिछड़ों का मसीहा बनने की मची होड़ पर करारा प्रहार किया।

केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने बड़े ही बेबाकी से कहा कि – ‘…आजकल पिछड़ापन राजनीतिक हित बनता जा रहा है। …अब तो नेताओं में इस बात की होड़ लगी रहती है कि कौन ज्यादा पिछड़ा है।

…नेता चुनावी लाभ के लिए अपने समुदायों को अधिक पिछड़ा साबित करने की होड़ में लगे हैं। …पिछड़ेपन पर चर्चा सामाजिक न्याय से हटकर राजनीतिक वार्ता में सौदेबाजी की चिप बन गई है।

…जाति को राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करना गलत है, ठीक नहीं है। इसी क्रम में वास्तविक सामाजिक उत्थान के बजाय चुनावी लाभ के लिए कृत्रिम रूप से विभाजन पैदा किया जाता है।

…इसीलिए जातिगत भेदभाव खत्म होना चाहिए और इसकी प्रक्रिया खुद से शुरू होनी चाहिए।’

वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र के अमरावती में एक कार्यक्रम में।
वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र के अमरावती में एक कार्यक्रम में।

‘सच्चे नेतृत्व को पोस्टर या विज्ञापनों की जरूरत नहीं होती…’

अमरावती में डॉ. पंजाबराव उर्फ ​​भाऊसाहेब देशमुख मेमोरियल अवार्ड समारोह में वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने अपने बेबाक अंदाज में और भी बहुतेरी बातें कहीं जो मौजूदा दौर के सियासी लोगों को काफी चुभने वाली हैं।

Nitin Gadkari ने बेबाकी से आगे यह भी कहा कि – ‘…सच्चे नेतृत्व के लिए पोस्टर या विज्ञापनों की जरूरत नहीं होती। …राजनीति को आत्म-प्रचार के बजाय समाज सेवा पर आधारित होना चाहिए। …राजनीति को केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए।

…हमें इसके उद्देश्य को फिर से परिभाषित करना चाहिए और अत्यधिक चुनावी खर्च को समाप्त करना चाहिए। …चुनावों की बढ़ती लेन-देन वाली प्रकृति काफी दुखद है।  

…मैं अपनी शर्तों पर राजनीति करूंगा, चाहे वे मुझे वोट दें या नहीं। …मेरा कर्तव्य बिना किसी पक्षपात या समझौते के सभी के विकास के लिए काम करना है।

…. मैं जाति के आधार पर भेदभाव नहीं करता हूं। चाहे मुझे फिर वोट मिले या न मिले। लोग जाति के आधार पर मुझसे मिलने आते हैं। …मैंने उन सबसे 50,000 लोगों में कह दिया कि जो करेगा जाति की बात, उसके कस के मारूंगा लात।’

वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र के अमरावती में एक कार्यक्रम में।
वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री महाराष्ट्र के अमरावती में एक कार्यक्रम में।

Nitin Gadkari – अपने सिद्धांत पर अटल रहूंगा…चाहे चुनाव हारूं या…

इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari ने आगे कहा कि – ‘…मैं धर्म और जाति की बातें सार्वजनिक रूप से नहीं करता। …चाहे चुनाव हार जाऊं या मंत्री पद चला जाए, मैं अपने इस सिद्धांत पर अटल रहूंगा।

…किसी व्यक्ति का मूल्य जाति, धर्म, भाषा या लिंग के बजाय उसके गुणों से निर्धारित होना चाहिए। …किसी व्यक्ति को उसकी जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग से नहीं, बल्कि उसके गुणों से जाना जाता है। ….इसलिए हम जाति, संप्रदाय, धर्म, भाषा या लिंग के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेंगे।

मैं राजनीति में हूं और यहां यह सब चलता रहता है, लेकिन मैं इससे इनकार करता हूं। …भले ही इससे मुझे वोट मिले या न मिले। …मैं अपने हिसाब से चलता हूं।  कई लोग अपनी जातिगत पहचान के आधार पर मुझसे संपर्क करते थे, लेकिन मैं अपने सिद्धांतों पर अडिग रहा।

…महाराष्ट्र के ही मेलघाट के आदिवासी क्षेत्र में काम करने के अपना अनुभव अभी भी याद है। वहां जाकर गंभीर कुपोषण और गरीबी को प्रत्यक्ष अनुभव किया। …महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री के रूप में मैंने उस क्षेत्र का दौरा किया और सड़कों, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छ पेयजल और स्कूलों की अनुपस्थिति देखकर चौंक गया था।

…मुझे अभी भी वह भयावह सच्चाई याद है – हजारों बच्चे कुपोषण के कारण मर रहे थे, चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं थी और आदिवासी परिवार बुनियादी सेवाओं से कटे हुए थे। …यह देखकर दिल टूट गया कि आजादी के दशकों बाद भी ऐसी स्थितियां मौजूद थीं।’

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