शिकारीपाड़ा : अवैध खनन मामले में 15 लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज

शिकारीपाड़ा (दुमका) : अवैध खनन मामले में 15 लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज- अवैध खनन

मामले में जिला प्रशासन दुमका लगातार कार्रवाई में जुटा हुआ है.

पिछले 3 दिनों से लगातार चल रही छापेमारी में जहां दर्जनों व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है.

वहीं कुछ व्यक्तियों की गिरफ्तारी भी हुई है.

शनिवार को उपायुक्त दुमका के नेतृत्व में 15 टीमों ने शिकारीपाड़ा के पत्थर औद्योगिक क्षेत्र में

लगभग सभी खनन क्षेत्रों में एक साथ छापेमारी की थी और

60 से अधिक क्रेशर और खदान के कार्यालयों को ध्वस्त किया गया था.

7 अभियुक्तों की हो चुकी है गिरफ्तारी

इस संबंध में रविवार को जिला खनन पदाधिकारी कृष्ण कुमार किस्कू के लिखित बयान पर

कांड संख्या 73/22 दर्ज किया गया जिसमें 15 व्यक्तियों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है. आईपीसी की धारा 379, 411 तथा जेएमएमसी के सुसंगत धाराओं और विस्फोटक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. प्राथमिकी में शोस्टी मंडल तथा अर्जुन मंडल आसन बनी, बेनागड़िया के मेराज, फिरोज तथा मिथुन, जरमुंडी के बाबू धन किस्कू, ग्राम कौवामहल के अकालुद्दीन मियां, पश्चिम बंगाल के भूपेंद्र विश्वास कुलकुली थाना शिकारीपाड़ा के डॉक्टर राय, रामजाम के मंगल मुर्मू तथा पीरु मुर्मू, अपूर्वा साहा, सुजीत मंडल तथा प्रसनजीत पंचा के नाम शामिल है जिसमें से 7 अभियुक्तों की गिरफ्तारी हो चुकी है.

बुलडोजर चला कर किया ध्वस्त

बताते चलें कि उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने शिकारीपाड़ा के पत्थर औद्योगिक क्षेत्र में शनिवार को अबतक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है. कार्रवाई के तहत अवैध रूप से संचालित कई क्रशर, क्रशर कार्यालय और अन्य संरचनाओं पर बुलडोजर चला कर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया.

अवैध खनन के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई

जिले से भारी पुलिस बल के साथ गयी अधिकारियों की टीम ने ऐसे सभी क्रशर यूनिटों पर कार्रवाई कर उन्हें ढाह दिया है जो बंद कर रखे गये थे या जिसके वैद्य होने का कागजात दिखाने कोई सामने नहीं आया. ऐसे क्रशरों को अवैध मानते हुए बुलडोजर चला कर उन्हें नेस्तनाबूद कर दिया गया है. उपायुक्त रवि शंकर शुक्ला ने बताया कि अवैध खनन और परिवहन के खिलाफ जिला प्रशासन की कड़ी कारवाई अभी जारी रहेगी.

सीएम हेमंत के निर्देश के बाद अधिकारी रेस

बताते चलें कि पूजा सिंघल के ईडी प्रकरण के बाद जब दुमका डीएमओ को ईडी के द्वारा समन दिया गया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अवैध खनन एवं कारोबार पर रोक लगाने का स्पष्ट निर्देश जिला अधिकारियों को दिया तो उसके बाद से ही लगने लगा था कि दुमका जिले में चल रहे अवैध पत्थर एवं कोयले के कारोबार पर कभी भी बिजली गिर सकती है.

रिपोर्ट: सद्दाम हुसैन

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