मंजेश कुमार
नई दिल्ली: देश भर में लाखों छात्र हर वर्ष प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा की तैयारी करने के लिए ये छात्र देश के विभिन्न Coaching Centers का रुख करते हैं। कोचिंग संस्थानों के प्रचार में किये गए दावों और वादों की वजह से अक्सर छात्र धोखा खा जाते हैं और पता चलता है कि उनका वक्त और पैसा दोनों बर्बाद हो गया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।
अब कोचिंग संस्थानों के प्रचार में किये जा राजे दावों और वादों पर अंकुश लगाने के लिए एक नया गाइडलाइन जारी किया है। यह दिशा निर्देश पचास या उससे अधिक छात्र वाले संस्थानों पर लागू होंगे। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए 45 कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई की है। सीसीपीए ने 18 कोचिंग संस्थानों पर करीब साढ़े 54 लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया है।
लेनी होगी लिखित सहमति
कोचिंग संस्थानों के लिए दिशा निर्देश के बारे में बात करते हुए सीसीपीए की सचिव निधि खरे ने कहा कि इस दिशानिर्देश के बाद कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों में पारदर्शिता आएगी। अब कोई भी कोचिंग संस्थान शत प्रतिशत सफलता की गारंटी नहीं दे सकेंगे। इसके साथ ही वे बिना लिखित सहमति के किसी सफल उम्मीदवार का नाम, फोटो या प्रशंसा पत्र का उपयोग अपने विज्ञापन में नहीं कर सकेंगे।
विज्ञापन की करें जांच
सीसीपीए की सचिव निधि खरे ने कहा कि अक्सर यूपीएससी के छात्र प्रारंभिक और मुख्य परीक्षाएं खुद ही पास करते हैं और वे इंटरव्यू की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान का रुख करते हैं। उन्होंने छात्रों को भी सलाह दी कि किसी भी कोचिंग संस्थान में दाखिला लेने के पहले यह जांच जरूर कर लें कि चयनित उम्मीदवार ने किस पाठ्यक्रम में दाखिला लिया था।
सुविधाओं की देनी होगी सही जानकारी
सीसीपीए की सचिव निधि खरे ने कहा कि कोचिंग संस्थानों के लिए जारी दिशा निर्देशों के अनुसार अब कोचिंग संस्थानों को अपनी सेवा, सुविधा, संसाधन और बुनियादी ढांचे की सही जानकारी देनी होगी। विज्ञापन में सही जानकारी नहीं देने वाले संस्थानों के ऊपर कार्रवाई की जाएगी और उनके ऊपर पचास लाख रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। साथ ही विज्ञापन पर रोक भी लग सकती है।
नहीं चलेगी मनमानी
सीसीपीए की सचिव निधि खरे ने कहा कि नए दिशा निर्देश के अनुसार अब कोचिंग संस्थान निराधार वादे नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही उन्हें कोर्स और उसकी अवधि की पूरी जानकारी देनी होगी, विज्ञापनों में शिक्षकों की भी सही जानकारी देनी होगी। फीस और रिफंड की नीतियां पारदर्शी बनानी होगी साथ ही किसी भी तरह की भ्रामक चीजें कोचिंग संस्थान अपने विज्ञापन में प्रदर्शित नहीं कर सकेंगे।
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