सुशील मोदी को पद्म भूषण और निर्मला देवी को पद्म श्री

दिल्ली : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कल यानी 28 अप्रैल को नई दिल्ली में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम व भाजपा के वरिष्ठ नेता स्व. सुशील कुमार मोदी (मरणोपरांत) को सार्वजनिक जीवन में पद्म भूषण और निर्मला देवी को कला के क्षेत्र में पद्म श्री से सम्मानित किया। पुरस्कार विजेताओं के जीवन और कार्यों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

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सुशील मोदी बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उप-मुख्यमंत्रियों में से एक थे

सुशील कुमार मोदी बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले उप-मुख्यमंत्रियों में से एक थे, जिन्होंने बिहार के विकास में बहुत योगदान दिया। उन्होंने बिहार की अर्थव्यवस्था को बदल दिया और भारत में वस्‍तु और सेवा कर शुरू करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। उन्हें चारों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में संसद सदस्य, विधानसभा और विधान परिषद के सदस्य का हिस्सा होने का अनूठा गौरव प्राप्त था। पांच जनवरी 1952 को जन्मे मोदी 10 वर्ष की आयु से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। वे आरएसएस के प्रचारक थे। वर्ष 1977 से वर्ष 1986 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के पूर्णकालिक कार्यकर्ता थे। वर्ष 1983 से वर्ष 1986 तक अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के महासचिव थे। वे वर्ष 1973 से वर्ष 1977 तक पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के कैबिनेट सदस्य और महासचिव थे। वे जय प्रकाश आंदोलन (1973) के दौरान सक्रिय थे और आपातकाल (1975-1977) के दौरान 19 महीने तक जेल में रहे।

वर्ष 1990 में सक्रिय राजनीति में आए सुशील 

सुशील मोदी वर्ष 1990 में सक्रिय राजनीति में आए और वर्ष1990 से वर्ष2004 तक पटना निर्वाचन क्षेत्र से बिहार विधान सभा के सदस्य चुने गए। उन्होंने बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री (2005-2013 और 2017-2020)के रूप में सेवाकी।  बिहार के सबसे लंबे समय तक वित्त मंत्री रहने के कारण, उन्हें राज्य के प्रभावी राजकोषीय प्रबंधन का श्रेय दिया जाता है, जिससे स्थिरता का दौर शुरू हुआ। उन्होंने राज्य के राजस्व में तेजी से वृद्धि की और राज्य को राजस्व अधिशेष वाले राज्य में बदल दिया। उन्होंने विकासात्मक  व्यय में वृद्धि की और राज्य के लिए उद्योगों को बढ़ाने और निवेश आकर्षित करने में सक्षम थे। उन्हें नवोन्मेषी विचारों के लिए भी जाना जाता था, जिसमें महिलाओं के कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए जेंडर बजट की अवधारणा की शुरुआत की। राज्य वित्त मंत्रियों की अधिकार प्राप्त समिति के अध्यक्ष (2011-2013) के रूप में उन्होंने भारत में वस्तु एवं सेवा कर की शुरुआत के लिए आम सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जीएसटी की शुरुआत के बाद वे जीएसटी परिषद (2017-2020) में विभिन्न मंत्रिसमूह के संयोजक/सदस्य रहे।

सुमो ने मृत्यु के बाद अंग व शरीर दान’ के बारे में जागरूकता फैलाने में प्रमुख भूमिका निभाई

मोदी कई सामाजिक कार्यों से सक्रिय रूप से जुड़े रहे और उन्होंने ‘मृत्यु के बाद अंग और शरीर दान’ के बारे में जागरूकता फैलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। वे रक्तदान के लिए ब्लड बैंक स्थापित करने और बिहार में थैलेसीमिया रोगियों के लिए मुफ्त रक्त आधान का आयोजन/व्यवस्था करने में सक्रिय रूप से शामिल थे। वे बिहार में दिव्यांगों की समस्याओं को दूर करने के लिए सहायता करने में भी शामिल थे। मोदी का राजनीतिक जीवन बहुत लंबा और सफल रहा। जिसमें वे वर्ष 1990 से वर्ष 2004 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इस दौरान वे भाजपा के मुख्य सचेतक, विपक्ष के नेता (1996-2004), बिहार सरकार में संसदीय कार्य मंत्री (2000) रहे। वर्ष 2004 में वे भागलपुर निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के सांसद चुने गए। वर्ष 2005 से 2020 तक वे बिहार विधान परिषद के सदस्य रहे। उन्होंने वर्ष 2005-2013 और वर्ष 2017-2020 के बीच उप-मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया। वे वर्ष 2020-2024 तक राज्यसभा के सांसद चुने गए और कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष रहे। 13 मई 2024 को मोदी का निधन हो गया।

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निर्मला देवी ने सुजनी शिल्प के संरक्षण और वैश्विक प्रचार में असाधारण योगदान दिया है

भुसुरा महिला विकास समिति के अध्यक्ष निर्मला देवी ने सुजनी शिल्प के संरक्षण और वैश्विक प्रचार में असाधारण योगदान दिया है। इस पारंपरिक कला के प्रति उनके अथक समर्पण ने इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में मदद की है। 15 अगस्त 1947 को जन्‍मी निर्मला देवी आर्थिक समस्याओं के कारण अपनी मैट्रिक की पढ़ाई पूरी नहीं कर पाईं। तब से वह सुजनी शिल्प को आगे बढ़ाने और दुनिया भर में इसकढ़ाई की पहचान स्थापित करने के लिए काम कर रही हैं। सुजनी कढ़ाई के प्रचार और संरक्षण में अपने अपार योगदान के लिए बड़े पैमाने पर उनकी पहचान है। अपने प्रयासों से उन्होंने अनगिनत महिलाओं को सुजनी कढ़ाई में प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया है, जिससे उनकी आमदनीमें काफी बढ़ोतरी हुई है और उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता मिली है। उनके नेतृत्व में भुसुरा महिला विकास समिति क्षेत्र की महिलाओं के लिए आशा की किरण बन गई है, जो उन्हें वैश्विक मंच पर अपने शिल्प का प्रदर्शन करने में सक्षम बनाती है। महिलाओं के उत्थान और इस महीन शिल्प को संरक्षित करने में निर्मला देवी का योगदान उनके विजन और सामाजिक सशक्तिकरण के प्रति उनके समर्पण का प्रमाण है।

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निर्मला देवी ने सुजनी शिल्प के संरक्षण और वैश्विक प्रचार में असाधारण योगदान दिया है

2007 में सुजनी कढ़ाई के लिए भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग हासिल करना था

निर्मला देवी की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 2007 में सुजनी कढ़ाई के लिए भौगोलिक संकेत (GI) टैग हासिल करना था। यह एक मील का पत्थर था, जिसने इसकी अनूठी सांस्कृतिक पहचान स्थापित करने और इस सदियों पुराने शिल्प में लगे कारीगरों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद की। उनकी महीन और कलात्मक कढ़ाई का काम बिहार, मुंबई और यहां तक कि लंदन के संग्रहालयों में प्रदर्शित किया गया है, जो सुजनी कढ़ाई की समृद्ध विरासत को दुनिया में प्रदर्शित करता है। अपने अटूट समर्पण से, उन्होंने सुजनी कढ़ाई को वैश्विक मंच पर सफलतापूर्वक स्थापित किया है और भावी पीढ़ियों के लिए इसकी विरासत को संरक्षित किया है। उनके प्रयासों को मान्‍यता देते हुए निर्मला देवी को कढ़ाई और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। जैसे कि 2003 में दिल्ली राजभवन में राष्ट्रीय पुरस्कार और 2007 में राज्य पुरस्कार उन्हें मिला है।

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