पलामू डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत अनाथ बच्चों से मिलने एकौनी गांव पहुंचे। बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और संपत्ति अधिकार सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
Palamu Administration पलामू: झारखंड के पलामू जिला प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली एक बार फिर सामने आयी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी Dilip Pratap Singh Shekhawat शनिवार को जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर हुसैनाबाद प्रखंड के लोटनिया पंचायत स्थित एकौनी गांव पहुंचे और वहां रहने वाले तीन अनाथ बच्चों से मुलाकात की।
Palamu Administration: सोशल मीडिया पर मिली थी जानकारी
जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक व्यक्ति ने पोस्ट कर बताया था कि एकौनी गांव में रहने वाले तीन छोटे बच्चे अपने माता-पिता को खो चुके हैं और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने X के माध्यम से ही पलामू उपायुक्त को बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का निर्देश दिया था।
Key Highlights
मुख्यमंत्री के निर्देश पर अनाथ बच्चों से मिलने गांव पहुंचे पलामू डीसी
जिला मुख्यालय से 80 किमी दूर एकौनी गांव पहुंचे अधिकारी
बच्चों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने का दिया निर्देश
राशन कार्ड और पारिवारिक लाभ योजना की प्रक्रिया शुरू
पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी सुनिश्चित कराने का आदेश
Palamu Administration: बच्चों की समस्याएं सुनीं, योजनाओं से जोड़ने का निर्देश
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उपायुक्त ने तुरंत कार्रवाई करते हुए स्वयं गांव पहुंचकर बच्चों और उनके परिजनों से बातचीत की। इस दौरान हुसैनाबाद एसडीओ, बीडीओ और अंचल अधिकारी भी मौजूद रहे। उपायुक्त ने बच्चों की पारिवारिक स्थिति, पढ़ाई और भविष्य से जुड़ी जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चों को तत्काल स्पॉन्सरशिप योजना और पारिवारिक लाभ योजना से जोड़ा जाये। साथ ही राशन कार्ड में दो बच्चों का नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी जल्द पूरी करने को कहा गया।
Palamu Administration: पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का निर्देश
बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से उपायुक्त ने अंचल अधिकारी को निर्देश दिया कि रजिस्ट्री डीड के माध्यम से बच्चों को उनकी पैतृक संपत्ति में विधिवत हिस्सेदारी सुनिश्चित करायी जाये।
मानवीय संवेदना का परिचय देते हुए उपायुक्त ने बच्चों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया और कहा, “जब भी किसी चीज की जरूरत लगे या कोई परेशानी हो, सीधे मुझे फोन करना।”
इस पहल की स्थानीय लोगों ने सराहना की है और इसे प्रशासन की संवेदनशीलता का उदाहरण बताया है।
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