झारखंड में पारा शिक्षक से सहायक आचार्य बने शिक्षकों की पेंशन के मामले में शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है।
Para Teacher Pension रांची: झारखंड में पारा शिक्षक से सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त हुए शिक्षकों को पेंशन का लाभ देने के मामले में शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट का रुख किया है। विभाग ने झारखंड हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। राज्य में 10 हजार से अधिक ऐसे शिक्षक हैं, जो पारा शिक्षक के रूप में सेवा देने के बाद सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे शिक्षकों की भी है, जो सहायक आचार्य के पद पर 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे। ऐसे शिक्षकों को पेंशन का लाभ मिलने को लेकर मामला महत्वपूर्ण हो गया है।
Key Highlights
पारा शिक्षक से सहायक आचार्य बने शिक्षकों की पेंशन का मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है।
हाईकोर्ट ने पारा शिक्षक के रूप में की गई संविदा सेवा को पेंशन योग्य माना था।
सरकार को पारा शिक्षक की सेवा अवधि जोड़कर पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया गया था।
इस मामले से राज्य के 10 हजार से अधिक शिक्षकों के प्रभावित होने की संभावना है।
Para Teacher Pension:हाईकोर्ट ने पारा शिक्षक की सेवा को पेंशन योग्य माना था
पारा शिक्षकों ने अपनी पूर्व संविदा सेवा को पेंशन के लिए जोड़ने की मांग को लेकर झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
कोर्ट ने कहा था कि नियमित नियुक्ति से पहले संविदा के आधार पर की गई सेवा अवधि को भी पेंशन के लिए योग्य माना जाएगा। इसके आधार पर सरकार को पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को जोड़कर पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ देने का निर्देश दिया गया था।
Para Teacher Pension:10 साल की सेवा पूरी नहीं करने वाले शिक्षकों का मामला अहम
सहायक आचार्य के पद पर नियुक्त होने के बाद पेंशन के लिए निर्धारित सेवा अवधि पूरी करना कई शिक्षकों के लिए चुनौती बन गई है। बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो सहायक आचार्य के पद पर 10 वर्ष की सेवा पूरी करने से पहले ही सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
यदि केवल सहायक आचार्य के पद पर की गई सेवा को ही पेंशन के लिए आधार माना जाता है, तो ऐसे शिक्षकों को पेंशन का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसी वजह से पारा शिक्षक के रूप में की गई पूर्व सेवा को पेंशन में जोड़ने का मामला शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण है।
Para Teacher Pension:शिक्षा विभाग ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब शिक्षा विभाग ने पुनर्विचार याचिका दायर की है। विभाग की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद यह स्पष्ट होगा कि पूर्व में पारा शिक्षक के रूप में की गई संविदा सेवा को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभ के लिए किस तरह जोड़ा जाएगा।
इस मामले के फैसले का असर राज्य के हजारों पारा शिक्षक से सहायक आचार्य बने शिक्षकों पर पड़ सकता है। खासकर उन शिक्षकों के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, जो सहायक आचार्य के पद पर 10 वर्ष की सेवा पूरी किए बिना सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
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