गृहिणी महिलाओं को मिला पंख, दिया जा रहा पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण

Navada : नरहट प्रखंड के पुंथर पंचायत का एक छोटा सा गांव है करमा. शहरी चकाचौन्ध से दूर बुनियादी सुविधाओं से जुझता एक बेहद  ही साधारण सा गांव.

लेकिन इस गांव का एक इंजीनियर उमेश विश्वकर्मा ने गृहिणी-महिलाओं से लेकर विद्यार्थियों और बेरोजगारों को पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण देने की जीद ठानी है.

प्रशिक्षण कार्य शुरु भी हो चुका है. गृहिणी महिलाओं को भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. ऐसी ही एक गृहिणी और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली सोनी कुमारी ने बताया कि मैं एक गृहिणी महिला हूं, खुली आकाश में उड़ने का अनुभव बहुत ही रोमांचक रहा. संतोष कुमार ने भी बताया कि इस तरह का अनुभव मेरी जिंदगी में पहली बार मिला. जबकि रेखा कुमारी ने बताया कि इस तरह आकाश में उड़ना गृहिणी महिलाओं के लिए बेहद ही रोमांचक रहा.

इंजीनियर उमेश विश्वकर्मा बताते हैं कि हमारा उद्देश्य होनहार ग्रामीण और साधारण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों और गृहिणियों को पायलट प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ना है. इन्हे शिवनारायण चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से  प्रशिक्षण देकर रोजगार मुहैया कराया जाएगा. अभी वर्तमान में 2 सीटर पैराग्लाइडिंग उपलब्ध है, लेकिन कुछ ही दिनों में  3 सीटर पैराग्लाइडिंग लाने की योजना है. इसकी तैयारी की जा चुकी है.

                                      ग्रामीण क्षेत्रों में होगा रोजगार सृजन

पैराग्लाइडिंग के पायलट कुलदीप तार ने बताया कि विद्यार्थियों को पायलट की आगे की पढ़ाई के लिए विशेष तौर पर दिशा निर्देश दिया जाएगा. इस कदम से ग्रामीण क्षेत्र में टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार का सृजन भी होगा.paragali02 22Scope News

             पैराग्लाइडिंग क्या है 

पैराग्लाइडर एक मनोरंजक और प्रतिस्पर्धी-साहसिक खेल है. हल्के, फ्री-फ्लाइंग, फुट-लॉन्च ग्लाइडर एयरक्राफ्ट जिसमें कोई कठोर प्राथमिक संरचना नहीं है. पायलट एक हार्नेस में बैठता है या एक कपड़े के पंख के नीचे निलंबित कोकून जैसे ‘स्पीड बैग’ में लेट जाता है. पंख का आकार निलंबन रेखाओं द्वारा बनाए रखा जाता है, पंख के सामने हवा में प्रवेश करने वाले हवा का दबाव, और हवा के वायुगतिकीय बल बाहर की तरफ बहता है.

इंजन का उपयोग न करने के बावजूद, पैराग्लाइडर कई घंटों तक उड़ सकता है और कई सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. हालांकि, एक से दो घंटे की उड़ानें और करीबन 10 किलोमीटर की दूरी तय करना ही बेहतर है.  लिफ्ट के स्रोतों के कुशल दोहन से पायलट ऊंचाई हासिल कर सकता है. अक्सर कुछ हजार मीटर की ऊंचाई तक चढ़ता है. पैराग्लाइडर की खासियत एरोप्लेन की तरह टेक ओवर और लैंडिंग होता है 50 मीटर जमीन पर भी इसकी लैंडिंग होता है.

रिपोर्ट-अनील

Weather Update: रांची में बारिश थमी तो बढ़ा तापमान, 8 सितंबर...

रांची में बारिश थमने के बाद तापमान बढ़ा है। 8 सितंबर से मौसम बदलने के आसार हैं। 9 सितंबर को झारखंड के सात जिलों...

Giridih News: झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू का निधन, देर...

झारखंड के कैबिनेट मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू का निधन हो गया। देर रात अचानक सीने में दर्द के बाद अस्पताल में...

Saran Flood Relief 2026: सारण में बाढ़ से मचा संकट, राहत-बचाव...

Saran Flood Relief 2026: सारण जिले में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत, बचाव और स्वास्थ्य सेवाओं...