गयाजी में पितृ दीपावली : विष्णुपद मंदिर और देवघाट दीपों से जगमगाए
गयाजी : पितृपक्ष मेला के दौरान गयाजी के विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के देवघाट पर शुक्रवार को पारंपरिक पितृ दीपावली का आयोजन हुआ। देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने घी के दीयों से परिसर को रोशन कर पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना की।

पितृ दीपावली की परंपरा और मान्यता
पितृपक्ष के 14वें दिन (त्रयोदशी) को पितृ दीपावली मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन दीपदान करने से पितरों का स्वर्ग मार्ग प्रकाशमय हो जाता है। घी का दीया जलाकर लोग अपने पितरों को याद करते हैं और उनके आशीर्वाद की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पितरों के राह में अंधेरा न रहे। इसलिए दीयों की रोशनी से मार्ग को आलोकित किया जाता है।
दीपों से जगमगाया विष्णुपद मंदिर और देवघाट
पितृ दीपावली के अवसर पर विष्णुपद मंदिर परिसर और देवघाट आकर्षक रोशनी से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने रंगोली, स्वास्तिक और ॐ के प्रतीक बनाकर दीयों की सजावट की। हजारों घी के दीयों से वातावरण में भक्ति और उत्साह का माहौल छा गया।
श्रद्धालुओं का उत्साह और अनुभव
पितृ दीपावली को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था देखने को मिली। ओडिशा के कटक से आए दीपक अग्रवाल और उमा अग्रवाल ने बताया कि वे गयाजी में पिंडदान और श्राद्ध कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज हम अपने पितरों की तस्वीर और उनके नाम पर दीया जलाकर दीपावली मना रहे हैं, ताकि वे खुश हों और हमें आशीर्वाद दें।
पितृपक्ष मेला में उमड़ा जनसैलाब
हर साल की तरह इस बार भी पितृपक्ष मेला में लाखों की संख्या में श्रद्धालु गयाजी पहुंचे। दूर-दराज से आए हिंदू सनातन धर्मावलंबियों ने यहां पिंडदान, तर्पण और कर्मकांड कर अपने पितरों की आत्मा की शांति और उद्धार की कामना की।
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आशीष कुमार की रिपोर्ट
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